अंक एवं यंत्र वास्तु शास्त्र

अंक एवं यंत्र वास्तु शास्त्र

संसार में घटित होने वाली ज्यादातर घटनाओं पर मनुष्य का नियंत्रण नहीं होता। इस संसार में उत्पन्न होने वाले सभी प्राणियों की शक्ल-सूरत, सोचने-समझने की शक्ति तथा भाग्य अलग-अलग होते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार प्रत्येक मनुष्य के भाग्य का निर्धारण उसके जन्म के समय, ग्रहों की शुभाशुभ स्थिति के अनुसार किया जाता है। अतः जन्मतिथि के अंक प्रत्येक मनुष्य के लिए उसके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली अंक माने जाते हैं। किसी भी मनुष्य के लिए जन्मतिथि के मूलांक, संयुक्तांक तथा कॉस्मिक नंबर्स का अत्यंत महत्व होता है।

     अंक ज्योतिष के आधार पर कॉस्मिक नम्बर्स के अनुसार वास्तुदोष को दूर किया जा सकता है। जन्मतिथि के आधार पर वास्तुदोष को दूर करने के साथ-साथ यदि व्यक्ति के नाम के अक्षर, जन्मांक, जन्मतिथि के सम्पूर्ण अंकों का कोम्बीनेशन इफेक्ट पद्धति तथा अंक सूत्रगणन के अनुसार अध्ययन एवं आंकलन करके विशेष वास्तुदोष के स्वरूपों को बताया जा सकता है।



विभिन्न कॉस्मिक अंक वाले जातकों के लिए उत्पन्न वास्तुदोष-

कॉस्मिक अंक-1

जिन व्यक्तियों की जन्मतिथि का मूलांक- 1, 10, 19, 28, 37 हो उन व्यक्तियों को अपने मकान या व्यवसाय के लिए अंक 8 (8, 17, 26, 35…) तथा अंक 7 (7, 16, 25, 34…) के योग वाले नम्बरों के प्लाट का चयन नहीं करना चाहिए। पश्चिम एवं दक्षिण-पश्चिम दिशा वाले मकान या व्यापार स्थल अशुभ फल देने वाले होते हैं।

निर्माण स्थल के उत्तर, उत्तर-पूर्व दिशा की ओर भारी निर्माण करवाना, अधिक ऊंचा फर्श बनवाना, डाइगोनल लाइन पर वाटर टैंक, लैट्रिन (शौचालय), रसोईघर, स्टोर आदि का निर्माण करवाना अशुभ माना जाता है।

1 मूलांक वाले व्यक्तियों को अपने मकान के पूर्व दिशा की ओर ताम्बे के पत्र पर ‘सूर्य यंत्र’ खुदवाकर प्राण प्रतिष्ठित करवाकर स्थापित कर देना चाहिए। इससे वास्तुदोष के दोष कम हो जाते हैं।

कॉस्मिक अंक-2

जिन व्यक्तियों की जन्मतिथि का मूलांक 2, 11, 20, 29, 38 हो, उन व्यक्तियों को अपने मकान एवं कारोबार के लिए अंक 9 (9, 18, 27, 36…) तथा अंक 5 (5, 14, 23, 32..) के योग वाले नम्बरों के प्लाट नहीं खरीदने चाहिए और न ही ऐसे स्थान पर मकान ही बनवाना चाहिए।

     दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व की दिशा में मुख वाले मकान अशुभ फल देने वाला होते हैं। इन दिशाओं में बने मकान व्यापार करने के लिए अशुभ माने जाते हैं।

     यदि 2 मूलांक वाला व्यक्ति मकान बनवाता है तो उसे उत्तर-पूर्व में भूमिगत पानी का स्रोत बनवाना चाहिए। उत्तर दिशा में भव्य खिड़कियों या रोशनदानों का निर्माण करना उचित होता है। उत्तर, उत्तर-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर सीढ़ियों का निर्माण नहीं करना चाहिए। 2 मूलांक वाले व्यक्ति को चाहिए कि अपने मकान के मुख्य द्वार पर ‘श्रीयंत्र’ की स्थापना करवाएं। यह वास्तुदोष को कम करके शुभ फल देता है।

कॉस्मिक अंक-3

जिन व्यक्तियों की जन्मतिथि का मूलांक 3, 12, 21, 30, 39 हो उन व्यक्तियों को अपने मकान एवं कारोबार के लिए अंक 4 (4, 13, 22, 31..) के योग वाले नम्बरों के प्लाट नहीं लेने चाहिए।

        वास्तुशास्त्र के अनुसार 3 मूलांक वाले व्यक्तियों को अपने मकान में लाल पत्थर नहीं लगवाना चाहिए। मकान में उत्तर-पूर्व के बीच का स्थान अर्थात ईशान कोण अत्यंत पवित्र होता है। इसलिए इस स्थान पर पूजा-पाठ के लिए कमरा बनवाया जा सकता है। इस स्थान पर कभी भूलकर भी व्यर्थ समान या टूटा-फूटा समान न रखें। ईशान कोण में मूर्ति स्थापना एवं पूजन निश्चित रूप से करवाना उचित होता है।

कॉस्मिक अंक-4

जिन व्यक्तियों की जन्मतिथि का मूलांक 4, 13, 22, 31, 40 हो उन्हें अपने व्यवसाय एवं मकान के लिए अंक 8 (8, 17, 26, 35…) अंक 9 (9, 18, 27, 36…) के योग वाले नम्बरों के प्लाट नहीं खरीदने चाहिए।

     पश्चिम एवं दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुख वाले प्लाट मकान या व्यवसाय के लिए किसी भी स्थिति में 4 मूलांक वालों के लिए शुभ फल नहीं देते। इस स्थान पर मकान या व्यवसाय का कार्य करना अशुभ फलदायक होता है।

     4 मूलांक वाले व्यक्तियों को दक्षिण-पश्चिम के बीच स्थित नैऋत्य कोण के फर्श पूर्व-उत्तर दिशा की अपेक्षा ऊंचा बनवाने चाहिए। उत्तर-पश्चिम एवं दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व में किसी भी स्थिति में गड्ढ़ा या भूमिगत नहीं बनवाना चाहिए।

रहने के लिए या कारोबार के लिए बनवाए गए मकान के मुख्यद्वार पर ‘सूर्य यंत्र’ एवं ‘श्रीयंत्र’ की स्थापना करवाएं। इससे वास्तुदोष दूर होता है और परिवार सुखी रहता है।

कस्मिक अंक-5

जिन व्यक्तियों की जन्मतिथि का मूलांक 5, 14, 23, 32, 41 हो उन्हें अपने मकान बनवाने के लिए या कोई कारोबार के लिए अंक 4 (4, 13, 22, 31…) और अंक 7 (7, 16, 25, 34…) के योग वाले प्लाट या जमीन नहीं खरीदने चाहिए। इन प्लाट पर निर्माण कार्य करवाना इन अंकों वाले जातकों के लिए अशुभ प्रभाव देने वाला होता है।

     दक्षिण-पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम की दिशा में मुख वाले मकान या कारोबार के लिए खरीदा गया प्लाट अशुभ फल देने वाला होता है। अतः ऐसे स्थान को न खरीदना ही उचित होता है।

     इन अंक वाले जातक को मकान बनवाते समय उत्तर-पूर्व में भारी वस्तुओं को रखने के लिए निर्माण नहीं करवाना चाहिए। उत्तर-पूर्व के बीच वाले स्थान अर्थात ईशान कोण को देवताओं का स्थान माना जाता है इसलिए इस स्थान पर लैट्रीन (शौचालय), स्टोर या रसोईघर आदि नहीं बनवाने चाहिए।

     इन तिथियों में पैदा होने वाले व्यक्तियों को अपने मकान के मुख्यद्वार पर ‘अपराजिता यंत्र’ लगाना चाहिए। यह यंत्र वास्तुदोषों को दूर करके मकान में शुभ फलदायक स्थिति को पैदा करता है।




कॉस्मिक अंक-6

शुक्रवार के दिन जन्म लेने वाले जातक मिलनसार, ललित कलाओं का प्रेमी, सौंदर्य प्रेमी, हंसमुख होता है और ये एक खास किस्म की आकर्षण शक्ति को अपने आपमें लिए होते हैं, इसलिए इनका व्यक्तित्व सुंदर और आकर्षक होता है।

जिन व्यक्तियों की जन्मतिथि का मूलांक 6, 15, 24, 42 हो उन्हें अंक 2(2, 11, 20, 29…) 4 (4, 13, 22, 31…) के योग वाले नम्बरों के प्लाट कभी नहीं खरीदने चाहिए। इन जन्मतिथि वाले व्यक्तियों के लिए इन अंक वाले प्लाट को खरीदना उचित नहीं होता है।

     पश्चिम दिशा की ओर मुख वाले मकान, उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर मुख वाले मकान तथा दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुख वाले मकान रहने के लिए या कारोबार के लिए शुभ नहीं होते। मकान के निर्माण में दक्षिण-पूर्व के बीच स्थित आग्नेय कोण में किसी प्रकार का कोई गड्डा या बेसमेंट नहीं बनवाना चाहिए। इस कोण का देवता अग्नि देव है इसलिए इस स्थान पर रसोईघर बनवाना शुभ होता है।

     इन तिथियों में जन्म लेने वाले व्यक्तियों को मकान बनवाने के बाद मुख्यद्वार पर चांदी के पत्र पर ‘त्रिपुरा यंत्र’ बनवाकर लगाना चाहिए।

कॉस्मिक अंक-7-

जिन व्यक्तियों की जन्मतिथि का मूलांक 7, 16, 25, 34, 43 हो उन्हें अपने मकान या कारोबार के लिए ऐसे प्लाट या जमीन को नहीं खरीदना चाहिए जिनका योग 3 या 9 हो जैसे- 3 (3, 12, 21, 30…) 9 (9, 18, 27, 36…)। मूलांक 7 वालों के लिए इस नम्बर के प्लाट खरीदना वास्तुशास्त्र के अनुसार उचित नहीं होता है।

     इन 7, 16, 25, 36… मूलांक वाले व्यक्तियों को अपना मकान या कारोबार के लिए दक्षिण दिशा के द्वार वाले प्लाट नहीं लेने चाहिए।

     7 मूलांक वाले व्यक्तियों को चाहिए कि अपना मकान बनवाते समय उत्तर-पश्चिम दिशा में भारी निर्माण या गड्ढा न बनवाएं। मकान का उत्तर-पूर्व के बीच स्थित ईशान कोण को स्वच्छ एवं हल्का रखें। ईशान कोण दसों दिशा में सबसे पवित्र माना जाता है इसलिए इस स्थान पर पूजा घर बनवाना उचित रहता है।

     7 मूलांक वाले व्यक्तियों को अपने मकान के मेनगेट पर ‘श्रीगणेश’ की मुर्ति के साथ ‘श्री’ एवं ‘कुबेर यंत्र’ स्थापित करवाना चाहिए। इससे वास्तुदोष दूर होते हैं।

कॉस्मिक अंक-8

जिन व्यक्तियों की जन्मतिथि 8 हो या जिनके जन्मतिथि के मूलांकों को जोड़ने पर 8 प्राप्त हो जैसे- 8, 17, 26, 35, 44… उन्हें अपने मकान या कारोबार के लिए अंक 4 (4, 13, 22, 31…) अंक 3 (3, 12, 21, 30..) अंक 1 (1, 10, 19, 28, 37…) के योग वाले नम्बरों के प्लाट नहीं खरीदने चाहिए।

     8 मूलांक वाले व्यक्तियों को दक्षिण-पूर्व तथा उत्तर-पश्चिम दिशा के मुख वाले आवास या कारोबार के लिए मकान नहीं खरीदने चाहिए।

     यदि मूलाकं 8 वाले व्यक्ति मकान का निर्माण करवाते हैं तो दक्षिण-पश्चिम में किचन एवं पूजाघर नहीं बनवाने चाहिए।

     मकान के मुख्यद्वार पर  ‘श्रीगणेश’ की मुर्ति के साथ ‘श्रीनारायण बीसा यंत्र’ की स्थापना करवाएं। यह वास्तुदोष को दूर कर शुभ फल प्रदान करता है।

कॉस्मिक अंक-9

जिन व्यक्तियों की जन्मतिथि का मूलांक 9, 18, 27, 36, 45… हो उन्हें अपने मकान या कारोबार के लिए अंक 4(4, 13, 22, 31..) अंक 7 (7, 16, 25, 34…) के योग वाले नम्बरों के प्लाट नहीं लेने चाहिए।

9 मूलांक वाले व्यक्तियों को पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम दिशा में मुख वाले मकान या इस दिशा में कारोबार के लिए निर्माण कार्य नहीं करवाने चाहिए। वास्तुशास्त्र के लिए 9 अंक वाले व्यक्तियों के लिए इस दिशा में निर्माण कार्य करवाना अशुभ होता है।

9 मूलांक वाले व्यक्तियों को मकान के निर्माण के लिए उत्तर-पूर्व में किचन तथा दक्षिण-पूर्व में पूजा घर नहीं बनवाने चाहिए। संगमरमर के अधिक उपयोग से परहेज रखना चाहिए।

मकान के मुख्यद्वार पर ‘श्रीगणेश’ की मूर्ति तथा उत्तर-पूर्व के कमरे में ‘पंचमुखी हनुमानजी’ की तस्वीर स्थापित करना शुभ माना जाता है।

वास्तु शास्त्र की सम्पूर्ण जानकारियां

  1. जीवन और वास्तुशास्त्र का संबंध
  2. जाने घर का सम्पूर्ण वास्तु शास्त्र
  3. घर, ऑफिस, धन, शिक्षा, स्वास्थ्य, संबंध और शादी के लिए वास्तु शास्त्र टिप्स
  4. वास्तु शास्त्र के आधारभूत नियम
  5. वास्तु शास्त्र के प्रमुख सिद्धान्त
  6. विभिन्न स्थान हेतु वास्तु शास्त्र के नियम एवं निदान
  7. वास्तु का व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव
  8. हिन्दू पंचांग अथार्त हिन्दू कैलेंडर क्या है?
  9. युग तथा वैदिक धर्म
  10. भारतीय ज्योतिष शास्त्र
  11. भवनों के लिए वास्तुकला

(This content has been written by Super Thirty India Group)

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