भारतीय रीति-रिवाज तथा धर्मशास्त्र

भारतीय रीति-रिवाज तथा धर्मशास्त्र

भारतीय रीति रिवाज़ और परम्पराओं का वैज्ञानिक महत्त्व

(Scientific importance of Indian customs and traditions)

अगर भारत के इतिहास को देखा जाए तो पता चलता है कि पुराने समय में भारत ताकत, धन, संस्कृति तथा रीति-रिवाज में कितना महान था। परंतु उस समय उसमें गिरावट किस वजह से हुई। जहां एक तरफ हमको अपने आदर्शों के बारे में जानना तथा स्वीकार करना चाहिए, जिन्होनें हम लोगों को महान बनाया, वहीं दूसरी तरफ हमें उनकी वजह के बारे में मालूम करना चाहिए जिनकी वजह से इनमें गिरावट आई। आज हम सभी तथ्य को विज्ञान की कसौटी पर जांचते हैं और जो विज्ञान के द्वारा सही तरह से सिद्ध नही होता है, उसे अंधविश्वास कहकर स्वीकार नहीं करते हैं, परंतु अपने पहले की जिदंगी को पूरी तरह से उपेक्षा कर देना भी वैज्ञानिक दृष्टि नहीं है। हमे इसके बारे में भी कोशिश करनी चाहिए कि उसमें क्या बुराईयां थी और वह कौन सा सत्य था कि जिसने हमें हजारों सालों से एक राष्ट्र के रूप में जिंदा रखा हुआ है।

जिस तरह से एक हिरन अपनी नाभि में कस्तूरी के बारे में मालूम न होने की वजह से उसकी खुशबू को ढूंढ़ने के लिए इधर-उधर भागता-फिरता है, उसी तरह से हमें भी अपने धर्मग्रथों के अंदर छिपे हुए उस ज्ञान की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए जो कि तरक्की तथा खुशी पाने का स्रोत माना जाता है।

धर्म तथा दर्शन

हमारी इस पवित्र तथा शुद्ध पृथ्वी को धर्म तथा दर्शन की भूमि कहा जाता है। इस धरती ने हमें कई महान आध्यात्मिक व्यक्ति दिए है। आज के युग में वेदों का अध्ययन करना बहुत ही कम हो गया है क्योंकि उसके द्वारा किसी भी तरह का व्यक्ति अपने जीवन को पालने के लिए प्रतिष्ठापूर्ण साधन नहीं जुटा पाता है। अगर इसी तरह की प्रवृत्ति बनी रही तो इसके परिणामस्वरूप हम बिल्कुल ही समाप्त (नष्ट) हो जाएंगे। हमारे सभी धर्मग्रंथ संस्कृत में हैं तथा उसके बारे में बहुत ही ज्यादा बारीकी से जानकारी लेकर हम अपने धर्म के मूल आधारों तथा अपनी विरासत को समझ सकते हैं। इसलिए यह भी जरुरी हो जाता है कि इस भाषा को सही तरह से महत्व देना चाहिए।

ग्रंथों में बंद पड़ा ज्ञान बेकार है, इसलिए हमको जल्द ही जाग जाना चाहिए और वेदों तथा धर्मग्रंथों में छिपे हुए सच का प्रसार करने की कोशिश करनी चाहिए।




भारतीय समाज में जाति व्यवस्था

यह डर है कि वेदों ने जाति व्यवस्था का प्रचार करके समाज को बांटा है, इस तरह का कहना बिल्कुल ही गलत है। प्राचीन संत तथा ऋषि जिनका चिंतन सारे संकुचित सीमाओं के पार चला गया था, किसी एक महत्वपूर्ण समुदाय की तरक्की करने का प्रचार नहीं कर सकते थे। अगर इस तरह से नहीं होता तो विश्वामित्र, ब्राह्नाण और भगवान परशुराम क्षत्रिय किस तरह से बन सकते थे। यह भी ध्यान देने वाली बहुत ही महत्वपूर्ण बात है कि पुराने समय के महानतम व्यक्ति भगवान राम, भगवान कृष्ण और भगवान बुद्ध जिनकी समस्त देश में ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी पूजा-अर्चना आज भी की जाती है, वे भी तो सभी क्षत्रिय कहलाते थे। इसी तरह से रामायण (Ramayana) के लिखने वाले वाल्मीकि कौन थे। चंद्रगुप्त अपने बचपन में कौन थे और वह राजाओं को बनाने और बिगाड़ने वाला चाणक्य कौन था, इसके बारे में हमें मालूम होना चाहिए कि हमारे धर्म में कोई जाति नहीं है और जिसको जाति माना जाता है वह सिर्फ सामाजिक संस्था (social institution) होती है। इसलिए भारतीय अपने अतीत की जानकारी को जितना ज्यादा बढाएगा, उनका भविष्य भी उतना ही ज्यादा अच्छा बनेगा।

कानून और परंपराएं

भारत की गिरावट इस वजह से नहीं हुई कि पुराने समय के लोगों के कानून और परंपराएं (Laws and Traditions) गंदी थी, बल्कि गिरावट इस वजह से हुई थी कि उनमें अंदर छुपे हुए सही तरह के लक्ष्यों को पूरा नहीं किया जा सका। सिर्फ जनशिक्षा (Public education) के द्वारा ही इस अंधेरेपन को खत्म किया जा सकता है और इसके लिए पहले के शासकों के द्वारा इसे सबसे अच्छी से अच्छी वरीयता दी जानी चाहिए। सभी का लक्ष्य यह होना चाहिए कि जनता की धार्मिक भावनाओं को बिना घायल किए उनकी उन्नत्ति करना तथा उन्हें धर्म, अर्थ, कार्य, मोक्ष प्राप्त करने के अपने अधिकार में मदद देना चाहिए। धर्म का ठीक तरह से मतलब वैदिक आदेशों का बहुत ही सख्ती से पालन करने से है और इस महान महाकाव्य रामायण में इसका सही तरीके से वर्णन भी किया गया है।

सभी देशों का इतिहास सबसे अच्छे तथा सबसे बेकार दौर से गुजरता है। उसी तरह से एक समय था जब भारत सांसारिक सम्पन्नता तथा आध्यात्मिक गौरव के सबसे ऊंचे स्तर पर जाना जाता था और उसके बाद एक समय इस तरह का आया जब भारत बहुत ही ज्यादा गरीबी और अनैतिकता के गहरे गड्ढे में गिरता चला गया। परंतु जब भी भारत की सामाजिक और आध्यात्मिक गिरावट आई, हमारी धरती मां में यानी कि इस जमीन पर आध्यात्मिक दृष्टि वाले बहुत ताकतवर व्यक्तियों ने जन्म लिया, जिन्होने उसका दुबारा से उत्थान कर उसे खोई हुई ताकत तथा अपनी संस्कृति का गौरव प्रदान किया।

महाऋषि वेदव्यास इसी तरह के ही एक आध्यात्मिक महान पुरुष (Spiritual great man) थे जो अपने समय में व्याप्त विखंडन की ताकतों के खिलाफ लड़े और वेदों को इकट्ठा कर महाभारत तथा पुराणों जैसे धार्मिक साहित्य (Religious literature) का सृजन कर भारत को दुबारा से जिंदा किया, परंतु समय का चक्र जिस तरह से धीरे-धीरे आगे बढ़ता चला गया, उसी तरह से भारत में बंटवारे होने के दुबारा से निशान दिखाई देने लगे और उस समय भगवान बुद्ध प्रकट हुए, जिन्होनें अपने अंहिसा तथा दया के अलौकिक संदेश से सभी जनता की परेशानियों को दूर किया। भगवान बुद्ध के बाद महान पुरुष जैसे भगवान महावीर, शंकराचार्य, माधवाचार्य और कई महान पुरुषों ने इस देश और इस देश की संस्कृति में जनजीवन का संचार किया।

वास्तु शास्त्र की सम्पूर्ण जानकारियां

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(This content has been written by Super Thirty India Group)

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