Biophysics है Organism पर Research की अनोखी दुनियां, प्रयोग के दौर से गुजर रही है Engineering

Biophysics है Organism पर Research की अनोखी दुनिया

Biophysics है Organism पर Research की अनोखी दुनियां

Biophysics की दुनिया अब काफी विस्तार ले चुकी है। मेडिकल साइंस में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। इससे Medicine और Medical technology को इंप्रूव करने में मदद मिल रही है।
नई पीढ़ी को Technology Base Education को पसंद कर रही है। ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें एक बेहतर माहौल दें।

प्रदेश सरकार को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए कि ऐसे बच्चे Research और development में अपना करियर Build कर सकें। जब ऐसा स्टूडेंट Pure science के लिए काम करेगा, तो इसका फायदा हमारी Society, प्रदेश और देश को होना तय है। सरकार को चाहिए कि इन फील्ड में काम करने वाले बच्चों को Scholarship दे और उनका हौसला बढ़ाए। देश तेजी से युवाओं के देश में तब्दील होता जा रहा है।

ऐसा माना जा रहा है कि 2020 तक आते-आते देश में 29 साल के लोगों की संख्या देश में सबसे ज्यादा होगा। सोचिए, ऐसे समय में engineering के क्षेत्र में कितनी तेजी से हम Develop कर सकेंगे। एक तरीके से चीन, जापान और यूएस जैसे देशों की तुलना में हमारे देश में उनसे 10 साल यंग लोग काम कर रहे होंगे। ऐसे में Science and technology के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के लिए बेहतर Career विकल्प होगा। हाल के सर्वे में इस बात का उल्लेख हुआ है कि 2022 तक आते-आते तक देश में 24 नए सेक्टर्स में 119 मिलियन स्किल से जुड़े लोगों की जरूरत होगी। 1950 के आसपास जापान में तेजी के साथ आर्थिक सुधार दिखाई दिया था। 80 के दशक में ऐसा ही पल चीन में आया था। आगे आने वाले समय में देश में भी ऐसी आर्थिक सुधारों की उम्मीद लगाई जा रही है।

हम अपनी लाइफ के हर मोड़ पर अक्सर सही और best option को select करना पसंद करते हैं। Education के संदर्भ में भी यह बात फिट बैठती है। शिक्षा जीवन का आधार होती है। शिक्षा होने और न होने के बीच में एक बड़ा गैप होता है और ऐसा ही गैप सही तरह से Educated होने और न होने के बीच में भी होता है। ऐसे में यह जरूरी है बच्चों को सही दिशा मिले और वे अपने मन के मुताबिक करियर के विकल्प को चुनें। ऐसा होने की सूरत में वे बेफिक्र होकर आगे बढ़ते हैं और मनचाही मंजिल हासिल कर पाते हैं। यहां पैरंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि उनके मन की स्थिति को समझते हुए उन्हें बेस्ट करियर विकल्प को चुनने में उनकी मदद करें।

जैसे आप अपने जीवन में कई बार दूसरों से मदद चाहते हैं और उनकी ओर आशा भरी नजर से देखते हैं, वैसी ही मनोभावना बच्चों के मन में भी होती है। यह सच है कि एजुकेशन सिस्टम इसी दुनिया का हिस्सा है और कभी न कभी पैरंट्स भी इसका हिस्सा रहे हैं। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी बनती है कि हर रोज बच्चों के लिए समय निकालें और उन्हें सही मार्गदर्शन दें। यह सच है कि Society अब टेक्नो Society में बदल रही है। हम रोजमर्रा जिंदगी में Technology का उपयोग कर रहे हैं और इसके लिए हमें ज्यादा से ज्यादा विज्ञान पर निर्भर होना पड़ रहा है। घर में साफ पानी और ठंडी हवा का फायदा हम उसी Technology के दम पर उठा पा रहे हैं। फोन से लेकर कम्युनिकेशन सिस्टम को दुरूस्त और सुलभ बनाने वाली सारी चीजें इसी Technology का हिस्सा हैं। इन बातों का जिक्र यहां इसलिए कि जो हम उपयोग कर रहे है, वो सारी चीजें हमारे ऊपर हावी हो रही है। इसका नतीजा यह है कि हम नई पीढ़ी को Technology बेस एजुकेशन देना चाहते हैं। ऐसे में engineering का कीड़ा दिमाग में सबसे पहले दौड़ने लगता है।

आज के दौर में एजुकेशन सिस्टम में भी बदलाव दिखाई दे रहे हैं। अगर लोअर क्लासेज की बात करें, तो कहा जा सकता है कि स्कूल्स हायर क्लासेज के कोर्स को लोअर क्लासेज में शामिल कर रहे हैं। यह एक सही स्टेप कहा जा सकता है। इससे जिन बच्चों को साइंस में interest है, उनमें पहले से ही टॉपिक्स की समझ विकसित होने लगती है। लेकिन स्कूल्स को हायर क्लासेज के कोर्स को डायलूट फॉर्म में शामिल करने से बचना चाहिए। बच्चे बेसिक्स को समझें, यह एक अच्छा विकल्प है, लेकिन बेसिक्स को समझने के क्रम में उन्हें यह सब्जेक्ट बोझिल लगने लगे और उनका interest लेवल एकदम से डाऊन हो जाए, यह सही नहीं है। इसलिए स्कूल्स को पॉजिटिव थिंकिंग के साथ बच्चों को साथ लेकर आगे की ओर बढ़ना चाहिए।

इंटरमीडिएट लेवल, ऐसा स्टेप होता है, जब पैरेंट्स, टीचर्स और Students तीनों को ही अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का अहसास करना होता है। इस लेवल तक आते-आते स्टूडेंट की सोच बदल चुकी होती है। अब ओल्ड ट्रेंड नहीं रह गया है, जब ऑप्शन के रूप में सिर्फ engineering और मेडिकल स्ट्रीम हैं। आज के दौर में फैशन, इंटरटेनमेंट, लॉ, सीए, सीएस और भी कई शॉर्ट टर्म प्रफेशनल कोर्सेज आ चुकी हैं। यह भी सही है कि बच्चे विकल्पों को तलाशने में समय नहीं जाया करते हैं।

एजुकेशन एक्सपर्ट कहते हैं कि यह सही है कि Students को शुरू से ही उनके interest के अनुसार फील्ड सिलेक्ट करने की छूट देनी चाहिए। लेकिन मान लें कि कोई बच्चा साइंस और Research में ज्यादा interest शो करता है, तो उसे engineering के बजाए Research स्ट्रीम को ऑप्ट करने की सुविधा मिलनी चाहिए।

Engineering फील्ड में नए प्रयोग हो रहे हैं। ऐसे में engineering में युवाओं की रुचि बढ़ती दिख रही है। देश में अच्छे संस्थानों की कमी नहीं है। पूरी दुनिया में Engineers की डिमांड है। आज के दौर में शायद ही कोई देश ऐसा हो, जहां हमारे Engineers योगदान न दे रहे हों। अच्छी बात यह भी है कि यूनिवर्सिटीज और engineering कॉलेज में अब Research बेस्ड एजुकेशन की ओर ध्यान दिया जा रहा है।

Biophysics में स्टडी करना अपने आपमें एक दिलचस्प अनुभव है। सीधे लफ्जों में समझें, तो कह सकते हैं कि Biophysics अध्ययन का एक ऐसा विषय है, जिसके माध्ययम से जीवित चीजों के भीतर होने वाली भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं को आसानी से समझा जा सकता है। इसमें अणुओं ( मॉलीक्यूल), सेल्स, उत्तकों (टीशूज) और जीवों की शारीरिक रचना पर डीप Research किया जाता है। जैविक प्रणालियों को समझने के लिए Biophysics में Research के दौरान फिजिक्स के सिद्धांतों और तरीकों को यूज किया जाता है। कुल मिलाकर इसे बहुविषयक (इन्टर्डिसप्लनेरी) विज्ञान कहा जा सकता है, जोकि जीव विज्ञान के बेहद करीब है। साइंस की इस ब्रांच में आस-पास मौजूद बायोलॉजिकल सिस्टम को समझने के लिए फिजिक्स और केमिस्ट्री का उपयोग किया

जाता है।

Biophysics की दुनिया अब काफी विस्तार ले चुकी है। मेडिकल साइंस में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। इससे मेडिसिन और मेडिकल Technology को इंप्रूव करने में मदद मिल रही है। इसमें किए जाने वाले Research बड़ी और असाध्य बीमारियों से लड़ने का हौसला दे रहे हैं और इसकी मदद से आने वाले कल में जीवन और भी सरल हो सकेगा। कैंसर जैसी बीमारियों को हम मात दे सकेंगे। जहां तक करियर की बात है, तो कह सकते हैं कि इसमें एक ब्राइट फ्यूचर है। आज जब दुनिया में Research बेस्ड एजुकेशन पर बल दिया जा रहा है, ऐसे में आने वाले कल में देश में भी ऐसे ही फील्ड को बढ़ावा मिलने वाला है। Biophysics का फील्ड पूरी तरह से Research पर आधारित है।

Biophysics का क्षेत्र

मॉलीक्यूलर Biophysics में मॉलीक्यूल्स और पार्टिक्लस की स्टडी की जाती है। वहीं, रेडिएशन Biophysics में Organism पर रेडिएशन के असर के बारे में Research किया जाता है। फॉरेंसिक साइंस से लेकर जैविक तरीके से किए जाने वाले इलाज में इसने दखल दे दी है। मेडिकल टेक्नोलॉजी में यूजल होने वाली हाइटेक मशीनें जैसे कि मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई), कंप्यूटेड एक्जिअल टोमोग्राफी स्कैन Biophysics Research का नतीजा हैं।

क्या करता है बायोफिजिसिस्ट

बायोफिजक्स के क्षेत्र में Research करने वाले को बायोफिजिसिस्ट कहते हैं। वह अणु और परमाणु से लेकर कोशिकाओं और जीवों से लेकर पर्यावरण तक हर एक चीजों पर Research करता है। उनके Research का फील्ड मनुष्य और दूसरे जीवों के दिमाग से लेकर शरीर के दूसरे हिस्से होते हैं। इसके अलावा, पौधे से संबंधित तमाम चीजों पर भी इसमें Research किया जाता है। साइकोलॉजिकल Biophysics में फिजिकल मेकेनिज्म के जरिए लिविंग ऑर्गेनिज्म के व्यवहार और उसके एक्शन के बारे में अध्ययन किया जाता है।

योग्यता और कोर्स

Biophysics जैसा कि नाम से ही पता चल जाता है कि इसमें फिजिक्स और बायोलॉजी दोनों ही विषयों में महारत हासिल करनी होती है। इसके अलावा मैथ्स और केमेस्ट्री में भी रुचि होनी चाहिए। चूंकि इसमें जीवन पर अध्ययन किया जाता है, इसलिए देखने में यह सब्जेक्ट भले ही रोचक लगे, लेकिन भीतर से इसका स्ट्रक्चर बेहद जटिल होता है और इसमें गंभीर विषयों पर अध्ययन किया जाता है। Biophysics में ब्राइट करियर के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी से बैचलर डिग्री की दरकार होती है। कुछ इंस्टीट्यूट्स Biophysics में बैचलर डिग्री कोर्स भी कराते हैं। इसके बाद Biophysics में मास्टर और आगे की स्टडी भी कर सकते हैं। एम्स, महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी, केरल, नैशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ मेंटल हेल्थ ऐंड न्यूरो साइंस, बंगलुरु, पंजाब यूनिवर्सिटी और मुंबई यूनिवर्सिटी से स्टडी कर सकते हैं।

जॉब और सैलरी

Study के बाद सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में सरकारी नौकरी के अवसर मिलते हैं। आज Medicine और Medical Instruments बनाने वाली कंपनियों को हुनरमंदों की दरकार होती है। यहां फ्रेशर को भी बेहतर सैलरी ऑफर होती है, जोकि अनुभव के बाद आसमान छूने लगती है।

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