विभिन्न प्रकार की भूमि पर मकानों का निर्माण करवाना – Vastu Tips

Building a new home on different types of Lands - Vastu Tips

विभिन्न प्रकार की भूमि पर मकानों का निर्माण करवाना

सबसे अच्छे गुणों वाला प्लाट या जमीन वह मानी जाती है जो आकार में चौकोर, वृत्त तथा समांतर हो तथा जिसका रास्ता पूर्व तथा उत्तर दिशा में निकलता हो।
सबसे शुभ प्लाट या जमीन वह मानी जाती है जिसका रास्ता उत्तर दिशा या पूर्व दिशा की तरफ होता है तथा इस जमीन का आकार चौकोर, वृत्त तथा समांतर हो।
अच्छा प्लाट वह माना जाता है जिसका रास्ता पूर्व दिशा में या उत्तर दिशा में होता है तथा पश्चिम दिशा या दक्षिण दिशा में रास्ता हो और जिस जमीन की आकृत्ति चौकोर, वृत्त तथा समांतर हो।

साधारण तरह का प्लाट या जमीन वह मानी जाती है. दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ जिसका रास्ता निकलता हो तथा जिसका आकार चौकोर, वृत्त तथा समांतर होती हो।

मरम्मत करके रहने लायक प्लाट या जमीन का आकार चौकोन करके बदल लेना चाहिए।
जो जमीन वृत्त के आकार की तथा समांतर नहीं हो और जिसके अहाते के अंदर जमीन में पानी की टंकी, कुंआ या ट्यूबवैल हों, उस जगह को वास्तु के अनुसार पूर्व दिशा, ईशान दिशा या उत्तर की दिशा में हो तो वह अच्छी मानी जाती है। उसकी गहराई जितनी ज्यादा हो, उतना ही अच्छा माना जाता है। कुआं या पानी की टंकी की जगह मकान के चबूतरे से ऊंचाई में कुछ नीची ही होनी चाहिए। पुराने जमाने के मंदिरों के मैदान (परिसर) में पूर्व-ईशान की दिशा में पानी की टंकियां होती थी। इन पानी की टंकियों की सहायता से ही धन या समृद्धि की प्राप्ति होती थी। आज भी पुराने समय की तरह ही भगवान की पूजा करते समय जल की जरूरत होती है। जल की टंकी के रखने के स्थान में भी निम्नलिखित फल की प्राप्ति होती है जैसे-

ईशान दिशा की तरफ अगर पानी की टंकी रखी हो, तो वह बहुत ही ज्यादा अच्छी मानी जाती है। इससे धन की बढोतरी तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
पूर्व दिशा में पानी की टंकी का रखा होना अच्छा माना जाता है तथा इससे धन की बढ़ोतरी, ऐश्वर्य की प्राप्ति तथा समृद्धि की बढोत्तरी होती है।

आग्नेय दिशा की तरफ किसी भी तरह के कुएं का होना या पानी की टंकी का रखा होना गलत माना गया है। इस दिशा में पानी की टंकी का रखा होना व्यक्ति के पूरी तरह से सर्वनाश का होना, मन में सुख-शांति न रहना तथा घर की स्त्रियों को शारीरिक कष्ट आदि का होना लगा रहता है। घर के मालिक को अपनी संतान के लिए बहुत अधिक परेशानी आती है तथा कभी-कभी मृत्यु के होने की आशंका भी हो जाती है।

जिनके मकान में पानी की टंकियां नैऋत्य दिशा की तरफ रखी हो, तो इस प्रकार से रखना सही नहीं होता है। इस तरह से टंकी का रखना घर में नुकसान का होना बताया जाता है तथा इसके होने पर वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के मालिक के लड़ाई-झगड़े भी होते रहते हैं।

जिन व्यक्तियों के मकान में पानी की टंकियां पश्चिम दिशा की तरफ बनी हुई हो या लगी हुई हो, तो वह साधारण समझी जाती है। ऐसे मकानों के मालिकों को अपने शत्रुओं से हमेशा भय लगा रहता है तथा उनको गलत परिणामों के निकलने की भी संभावना बनी रहती है।

जिनके मकानों में पानी की टंकियां वायव्य दिशा की तरफ हों, तो वह भी साधारण मानी जाती है तथा उनको अपने शत्रुओं से डर लगा रहता है। इनका गलत परिणाम निकलने का संभावना बनी रहती है।

उत्तर दिशा की तरफ रखी हुई पानी की टंकियों को उत्तम माना गया है। इससे धन की बढ़ोतरी होती है, ऐश्वर्य में वृद्धि होती है तथा इनके परिवार के सदस्य हमेशा सुखी रहते हैं।

जिनके मकान की पानी की टंकियां बीचो-बीच बनी हो, तो यह नुकसान देने वाली होती है तथा इससे व्यक्ति का सम्पूर्ण नाश होता है और उसको रोग, धन-संपति का नुकसान और मृत्यु के होने की संभावना बनी रहती है।

जिनके मकान की पानी की टंकियां मकान की नींव में होती है, उनके घर में रोग तथा विनाश के होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए पानी की टंकी, कुआं जहां तक हो सके, पूर्व या ईशान दिशा में लगवाने चाहिए।

इस बात का बहुत ही ज्यादा ध्यान रखना चाहिए कि जिनके मकान में कुआं, पानी की टंकियां तथा बोरिंग सही दिशा न हो, तो उनको सही दिशा में बनवा लेना चाहिए, वर्ना उनको जीवनभर परेशानियों को ही उठाना पड़ सकता है। इस चीजों पर तंत्र-मंत्र आदि सभी तरह के दैविक उपाय कामयाब नहीं हो सकते हैं।

पूरी जमीन पर वास्तुशास्त्र की रचना किस स्थान पर सही होती है, इसके बारे में जानना बहुत ही जरूरी होता है। किसी भी स्थान और किसी भी तरह की वास्तुशास्त्र की रचना सुंदर होने पर भी अगर उसके आस-पास अयोग्य दिशा में खाली स्थान रह जाता है तो दुबारा से परेशानियां आने लग जाती है। इसलिए यह बहुत ही जरूरी हो जाता है कि वास्तु के स्थान को जानना बहुत ही महत्व रखता है। वास्तु रचना को सदा ही जमीन की नैऋत्य दिशा की तरफ से ही किया जाना चाहिए।

वास्तु का बांधकाम जमीन के एक चौथाई भाग में ही होना चाहिए। इस पर चार-पांच मंजिलों तक वास्तु बनाई जा सकती है तथा ¾ भाग के स्थान को खुला रखना चाहिए। इस तरह के स्थान को पूर्व दिशा और उत्तर दिशा में ज्यादा तथा दक्षिण-पश्चिम दिशा में बिलकुल ही कम रखना चाहिए। पूर्व दिशा तथा उत्तर दिशा की तरफ के अच्छे गुणधर्म कम ही मात्रा मे सुख-शांति देने वाले होते हैं तो जमीन या प्लाट की नैऋत्य दिशा में जड़त्व आता है, भारीपन आता है तथा घर का पूरा का पूरा वातावरण एक ही कंपन में टिका रहता है और घर में परेशानियां भी कम ही आती है।

मकान के पूर्व तथा उत्तर दिशा की तरफ जितनी ज्यादा से ज्यादा खुली जगह को छोड़ सकते हो, उतनी ही छोड़कर मकान को बनाया जाना चाहिए। पश्चिमी-दक्षिण दिशा में जितने भी कम स्थान को छोड़ा जाए उतना ही अच्छा माना जाता है। अपने मकान आदि में दक्षिण दिशा और पश्चिम दिशा के बरामदे मे जो खुला स्थान होता है वहां पर अधिक से अधिक पेड़-पौधों को लगाना चाहिए, जिससे कि उन दिशाओं का अनचाहा असर मकान पर न पड़े। मकान के अंदर रहने वाले सदस्यों को परेशानियां का कम ही सामना करना पड़ता है। पूर्व दिशा तथा उत्तर की दिशा में जहां तक हो सके, पेड़-पौधे नहीं होने चाहिए, क्योंकि इनके पास के पेड़, पौधे कुदरत के मार्ग में रुकावट पैदा कर सकते हैं।

यदि पूर्व-उत्तर की दिशा में पेड़-पौधे इत्यादि हो तो उनकी पूजा करके उनसे माफी मांगनी चाहिए और इसके बाद इन पेड़-पौधे को उस स्थान से उखाड़ या काट लेना चाहिए। पेड़ों को कभी-भी आधा या अधूरी नहीं तोड़ना चाहिए। इस तरह के पेड़ जिन पर बिजली गिरी हो, औदुंबर, आम का पेड़ तथा खजूर का पेड़ आदि, इसी तरह से ही मंदिरों की जगह के पेड़, श्मशान घाट में उगने वाले कटेरे के पेड़ घर के आस-पास नहीं होने चाहिए। ताड़ के पेड़, इमली के, लताओं से भरे-घिरे पेड़, हवा से गिरने वाले पेड़ तथा मूर्ति की आकृति की तरह के पेड़ भी घर के आस-पास नहीं होने चाहिए। इस तरह के पेड़ों के होने पर आर्थिक हानि और दुश्मनों का भी डर सताता रहता है। अशोक, देवदार, चंदन और औषधि तथा वनस्पतियों का घर के आस-पास होना बहुत ही शुभ तथा लाभदायक माना जाता है। घर के सामने किसी भी तरह के पेड़ का होना नुकसानदायक माना जाता है। पूर्व की दिशा में बरगद का पेड़, दक्षिण की दिशा में गूलर का पेड़ या औदुंबर का पेड़ और पश्चिम-उत्तर की दिशा में पीपल के पेड़ का होना नुकसानदायक नहीं माना जाता है।

अगर मकान के पास पूर्व की दिशा में घास या हरियाली हो, तो बहुत ही अच्छा होता है। इसी तरह से ही सुगंधित फूलों के पौधे भी पूरब की दिशा में परंतु ज्यादा ऊंचाई में नहीं होने चाहिए। पूर्व की दिशा और उत्तर दिशा में गुलाब की क्यारियों को लगाया जाए तो घी में शक्कर की तरह से काम करता है। अगर पूर्व उत्तर की दिशा में हरियाली हो या चबूतरे की ऊंचाई तक के फूल के छोटे-छोटे पौधे भी लगे हो, तो क्या कहना। मकान के उत्तर-पूर्व की दिशा की ओर की दीवार की बढ़ती हुई लताओं को नहीं बढने देना चाहिए। बाग-बगीचे की बनावट इस तरह से होनी चाहिए कि जो कोई भी उसको देखे तो मन-प्रसन्न हो जाए। हो सके तो किसी भी तरह के कंटीले पौधों को बाग-बगीचे में नहीं लगाना चाहिए। बाग-बगीचे में पूर्व-उत्तर की दिशा की तरफ पानी की निकासी का होना (निकलना) बहुत ही अच्छा माना जाता है। पंरतु यह पानी पश्चिम-दक्षिण दिशा से नहीं निकलना चाहिए। अगर बाग तथा बगीचों में सेवंती के फूल के पौधे भी हो तो इससे मच्छरों के परेशान करने की तकलीफ भी काफी हद तक कम हो जाती है।
मकान के पश्चिम की तरफ के नैऋत्य की दिशा में सबसे ऊंचे स्थान पर (मकान से भी और ऊंचे स्थान पर) पानी की टंकी को रखना चाहिए। प्रातःकाल सूरज की रोशनी भी सबसे पहले उस स्थान तक पहुंच जाती है। इस पानी की टंकी के कारण ही नैऋत्य कोण भारी हो जाता है तथा घर में सुख-शांति की बढोतरी होने लगती है। इसके विपरीत अगर पानी की टंकी को रखा जाए तो इससे नुकसान होना का खतरा बढ़ जाता है तथा दूसरे स्थान पर पानी की टंकी के रखने की वजह से कार्य में रुकावटें भी आ सकती है।

बिजली का खंभा या फिर बिजली का ट्रांसफार्मर भी घर की आग्नेय दिशा में होना चाहिए। इस तरह के मकान के अंदर रहने वाले सदस्यों को ऐश्वर्य और शांति भी मिलती रहेगी। वर्ना बहुत ही ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आग्नेय दिशा में खाली रहने वाले कोने को किसी भी तरीके से पानी की टंकी तथा शौचालय आदि के इस्तेमाल में नहीं लाना चाहिए। मकान के सभी तरह के कूड़े-कचरे तथा ड्रेनेज चैंबर- इस तरह की सभी वस्तुओं को मकान की पश्चिम दिशा की तरफ ही बनवाने चाहिए तथा उस पर जरूरत के अनुसार ही ध्यान को रखकर बाकायदा सफाई आदि भी समय-समय पर करवाते रहना चाहिए। अगर आवश्यकता पड़े, तो पश्चिम की दिशा से उसको हटा देना चाहिए। इस बात को भी ध्यान में भी रखना चाहिए कि पूर्व-उत्तर की दिशा में इस तरह की गंदगी तथा कूड़ा-कचरा के ढेर आदि होंगें, तो मकान या गृह के अंदर के सदस्य भी रोग से ग्रस्त हो सकते हैं। इसी प्रकार से जमीन के मुख्य गेट या दरवाजे के पास भी किसी भी तरह की गंदगी का होना मकान के सदस्यों की कामयाबी में बाधा डालता है।

मकान की आकृति- जिस प्रकार से खाली जमीन की आकृति का भी महत्व होता है, उसी प्रकार से गृह या मकान के होनी वाली आकृत्ति भी बहुत ज्यादा महत्व रखती है। अगर मकान की आकृत्ति चौकोर या चार कोणों वाली हो, तो इससे घर में हमेशा ही सुख-शांति रहती है। अगर मकान का चारों कोणों में से कोई भी एक किनारा आफसेट हों तो उस मकान के रहन-सहन में फर्क आने लगेगा। यदि ईशान दिशा में आफसेट होगा तो उस घर में समृद्धि में कमी आने लग जाती है। अगर पूर्व की दिशा में आफसेट हो, तो उस घर में हमेशा लड़ाई-झगड़े होते रहेंगें तथा घर की सुख-शांति भी खत्म हो जाएगी। मकान अगर छोटा-बड़ा होगा तो कोई सा भी कार्य सही तरीके से नहीं हो पाएगा। इस तरह के मकान का मालिक हमेशा ज्यादा बोलने वाला होता है तथा उसको कोर्ट-कचहरी के मुकद्दमों में मजा आता है।
अगर किसी भी तरह का मकान हो, तो उसमें हर रोज ही हर तरह के कार्य में परेशानियां आती रहती है।

मकान के फर्श की ढलान- अगर पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की तरफ जमीन या प्लाट की ढलान या झुकाव हो, तो उसी प्रकार से मकान के फर्श की ढलान या झुकाव भी पूर्व-उत्तर दिशा की तरफ ही होनी चाहिए। कहने का तात्पर्य यह है कि बांधकाम का चबूतरा पूर्व या उत्तर की दिशा में कम ऊंचाई का और दक्षिण-पश्चिम की दिशा में ज्यादा ऊंचाई का होना चाहिए। अगर चबूतरे का बांधकाम भी नैऋत्य दिशा, पश्चिम दिशा तथा दक्षिण दिशा, इन दिशाओं में ऊंचा होना चाहिए, जिससे की चबूतरे की बाजुएं काफी वजनदार बन सकें। इसलिए जहां तक हो सके बताएं गए घर या मकान के फर्श या जमीन का ढलान या झुकाव होगा तो उस मकान के रहने-सहने का वातावरण ठीक तरह से होगा। ऐसे मकान वालों के घर में धन का खर्च भी बहुत कम होगा और सभी तरह के व्यापार भी बिना किसी परेशानी के ठीक तरह से चलते रहेंगे, अन्यथा सब कुछ गड़बड़ा सकता है। ऐसे घर के सदस्यों को काफी हानि भी हो सकती है। घर या मकान को बनाते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर ही मकान को बनवाना चाहिए, जैसे-

  1. मकान को बनाते समय सबसे पहले इस बात का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है कि मकान की बनने वाली दीवारें पत्थर की नहीं होनी चाहिए। पत्थर के बने हुए मकानों में सिर्फ एक-दो पीढ़ियां ही रह सकती है तथा इससे आगे की पीढ़ियां उस मकान को छोड़कर दूसरे स्थान पर रहने के लिए चली जाती है।
  2. मकान के सामने की दीवार टेढ़े-मेढ़े पत्थर की बनी होगी, तो उस मकान में रहने वाले सदस्य सुखी जीवन को व्यतीत नहीं कर सकते हैं।
  3. जिस मकान को बनवाना हो, उस मकान की दीवारों में दरार का पड़ना, दीवारों का टूटना, दीवारों को लंबाई में ज्यादा न होना तथा महराबों के अदंर दरार का पड़ना आदि इस तरह के कार्य नहीं होने चाहिए। अगर इस तरह की दीवारें होगी तो उस मकान में रहने वाले परिवार के सदस्यों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
  4. मकान को बनाते समय पूर्व की दिशा से दीवार को बांधने से मकान के बनाने में बहुत ही ज्यादा समय लगता है। इसलिए पूर्व दिशा की दीवार को हमेशा ही सबसे अंत में बनाना अच्छा माना जाता है।
  5. मकान को बनाते समय इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी हो जाता है कि मकान की दीवार या इसकी जमीन में कभी भी सीलन आदि नहीं रहनी चाहिए, नहीं तो मकान में रहने वाले सदस्यों को कोई न कोई रोग होता रहेगा।
  6. मकान को बनवाते समय अगर किसी तरह का कोई कोना ठीक न हो या वह कमजोर बन गया हो, तो उस कोने को सुधरवा लेना चाहिए नहीं तो बेवजह ही मन में डर पैदा होता रहेगा।
  7. अगर मकान में लगने वाले पत्थर खोखले और बांधकाम कच्चा होगा तो उसमें रहने वाले लोगों के मन में हमेशा ही बुरे विचार पनपते रहेंगे।
  8. अगर मकान की पश्चिम दिशा की दीवार टेढ़ी-मेढ़ी हों या उन दीवारों में दरार आदि आ गई हों, तो इसकी वजह से मकान के अंदर चोर आदि के घुसने का डर लगा रहता है तथा नुकसान भी काफी हो सकता है।
  9. मकान की दक्षिण दिशा की दीवार यदि टेढ़ी-मेढ़ी हों या उन दीवारों में दरारे भी आ गई हों, तो इससे भी चोरों के घुसने का डर लगा रहता है तथा मकान के सदस्यों का स्वास्थ्य भी खराब हो सकता है।

दरवाजेः-

  1. मकान को बनवाते समय इस बात का भी बहुत ही ध्यान रखना जरूरी है कि मकान के पास में दो दरवाजे होने चाहिए। एक दरवाजा या गेट तो मकान के बाहर आने-जाने के लिए तथा दूसरा गेट या दरवाजा पीछे की तरफ होना चाहिए, इस तरह की सुविधा के होने से सारे कार्य बारी-बारी से पूरे होते रहते हैं। अगर मकान या घर बड़ा हो, तो मकान के बाहर की तरफ का गेट या दरवाजे सम संख्या में ही होने चाहिए।
  2. मकान के अंदर जाने का दरवाजा या गेट पीछे के दरवाजा या गेट की अपेक्षा में ऊंचा और चौड़ा हो, तो बहुत ही अच्छा होता है। इन दरवाजे के दो पल्ले होने चाहिए। अगर इस तरह से मकान के दरवाजे नहीं होंगें तो परिवार के हर कार्यों में कई तरह की परेशानियां पैदा होती रहेगी।
  3. मकान के पीछे का गेट या दरवाजा आगे के मुख्य दरवाजे की अपेक्षा में थोड़ा नीचा होना चाहिए और उस दरवाजे की चौड़ाई भी कम ही हो, तो बहुत अच्छा माना जाता है।
  4. मकान के अंदर के सभी दरवाजे एक ही तरह की लकड़ी अर्थात एक ही किस्म की लकड़ी के होने चाहिए जैसे लोहे की चौखट और लकड़ी का दरवाजा या गेट अथवा लकड़ी की चौखट और उसमें लोहे के गेट या दरवाजे को लगना ठीक नहीं माना जाता है।
  5. मकान के अंदर लगने वाले मुख्य गेट या दरवाजे के पल्ले कभी-भी स्वचालित यानी कि अपने आप खुलने वाले या बंद होने वाले नहीं होने चाहिए। अपने आप खुलने या बंद होने वाले दरवाजों से कुलक्षय होना है यानी कि उस परिवार के कुल की बरबादी होती है। उस मकान में हमेशा डर उत्पन्न होता रहता है और घर के सदस्यों को कई तरह के रोग भी होते रहते हैं।
  6. मकान में लगने वाले दरवाजों में कभी-भी किसी तरह की कोई आवाज आदि नहीं होनी चाहिए, इस तरह से होने में घर में डर उत्पन्न होता रहता है। दरवाजों के कब्जों में तेल डलवाने से किसी तरह की कोई आवाज पैदा नहीं होती है।
  7. मकान का मुख्य गेट या दरवाजा कभी भी बाहर की तरफ खुलने वाला नहीं होना चाहिए। मकान का मुख्य दरवाजा हमेशा ही अंदर की तरफ ही खुलने वाला होना चाहिए, नहीं तो घर में बहुत सी परेशानियों का सामना उठाना पड़ता है तथा इससे घर का पूरा का पूरा वातावरण (माहौल) खराब हो जाता है।
  8. मकान के मुख्य गेट की ऊंचाई और चौड़ाई एक ही समान होनी चाहिए, नहीं तो किसी भी तरह का कोई कार्य सही तरह से नहीं हो पाएगा और घर की सुख-शांति में भी परेशानी आ सकती है।
  9. मकान के अंदर एक ही लाईन में दो से ज्यादा दरवाजे नहीं होने चाहिए।
  10. दरवाजे को हमेशा ही दीवार की सीध में लगवाना चाहिए वर्ना मकान मालिक को आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है।
  11. मकान के मुख्य गेट या दरवाजे की चौखट के ऊपर एक रोशनदान होने से मकान के अंदर सुख का माहौल बना रहता है।
  12. मकान के मुख्य गेट पर कभी-भी दरार आदि नहीं होनी चाहिए, वर्ना ऐसे मकानों में हमेशा धन की कमी होती रहती है।

मकान के अंदर घुसने के मुख्य दरवाजे का रुख जिस दिशा में होगा उससे उस मकान की परिस्थिति के लक्षण भी निम्नलिखित तरीके से मिलते रहते हैं जैसे-

  • जिनके मकान का मुख्य दरवाजा ईशान दिशा की तरफ हो, वह सबसे अच्छा माना जाता है, इससे मकान में रहने वाले सदस्यों में श्रद्धा उत्पन्न होती रहती है। ऐसे मकान के अंदर हमेशा भगवान का वास रहता है। इनमें लड़ाई-झगड़े भी न के बराबर ही होते हैं। इनमें हमेशा खुशियां ही खुशियां बरसती रहती है। मन में किसी भी तरह के बुरे विचार या गलत विकृतियां पैदा नहीं होती हैं।
  • पूर्व दिशा की तरफ जिनके मकान का मुख्य गेट या दरवाजा होता है वह बहुत लाभकारी तथा अच्छा माना जाता है। ऐसे मकानों में सूर्य की रोशनी के आने से बहुत ही लाभ होता है तथा यश भी बढ़ता है। इससे श्रद्धा और ऐश्वर्य की प्राप्ति भी होती रहती है, परंतु दूसरों के काम में रुकावट देने की प्रवृत्ति बढ़ती रहती है, परंतु ऐसा स्वभाव दूसरों के लिए अच्छा साबित होता है। दूसरों को अपनी सलाह देना, अपने अनुभवों का फायदा देना, यह सब साधु-संतों के स्वभाव की तरह होता है।
  • आग्नेय दिशा की तरफ मकान के मुख्य दरवाजे को लगवाने से इस मकान के स्वामी का बहुत ही खर्चा होता रहता है। ऐसे मकान के स्वामी के पुत्र आदि अपने मकान को छोड़कर चले जाते हैं। इस तरह के मकान की संतानों के ज्यादातर प्रेम विवाह ही होते हैं तथा उनमें श्रद्धा की बहुत ही कमी होती है। ऐसे परिवार के सदस्य अधिकतर परेशानियों में घिरे रहते हैं।
  • जिनके मकान के मुख्य दरवाजे दक्षिण दिशा की तरफ बने होते हैं, नुकसान देने वाले होते हैं। ऐसे मकानों के सदस्यों का स्वास्थ्य बार-बार खराब होता रहता है। अधिकतर लड़ाई-झगड़े भी होते रहते हैं और इनके मकानों में चोरी के होने का भी भय सताता रहता है। ऐसे मकानों में टैक्स वाले छापे भी मारते हैं। इनके परिवार के सदस्यों में भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्वास की कमी रहती है। ऐसे मकानों के सदस्यों के पास धन की प्राप्त होती रहती है तथा इनके हाथ में धन आता तो जरूर है, पंरतु कब और कैसा। किस तरह का कोई भारी नुकसान हो जाए इस के बारे में कुछ भी मालूम नहीं हो पाता है।
  • नैऋत्य दिशा की तरफ के मुख्य दरवाजे नुकसानदायक ही होते हैं।
  • जिनके मकान का मुख्य गेट या दरवाजा पश्चिम दिशा की तरफ होता है, उनको साधारण परिणाम ही मिलता है। ऐसे मकान के स्वामी को काले धन के बहुत ज्यादा मिलने की उम्मीद होती हैं।
  • जिनके मकान का मुख्य दरवाजा वायव्य दिशा की तरफ होता है उससे साधारण परिणाम ही मिलते हैं। ऐसे मकान के मालिक के यहां हमेशा चोरी होने का डर रहता है।
  • ऐसे मकान जिनके मुख्य दरवाजे या गेट उत्तर दिशा की तरफ बने होते हैं, वे लाभदायक माने जाते हैं। ऐसे मकान में रहने वाले सदस्यों का व्यवहार बिलकुल ही किसी व्यापारी की तरह का होता है तथा इनकी बोली भी बहुत ही मीठी होती है। ऐसे व्यक्ति केवल अपने मतलब की ही बातों को करते हैं। ऐसे व्यक्ति किसी भी तरह की बातों को करते है तो उनका इशारा सिर्फ पैसों की तरफ ही होता है।
  • अगर किसी के मकान के मुख्य दरवाजे के रंग की पपड़ियां झड़ती रहती हो, तो समझ लेना चाहिए कि उस मकान वालों पर बाहर के सदस्य झल्लाते रहते हैं।
  • मकान का मुख्य दरवाजा या गेट किसी भी वजह से दक्षिण दिशा की तरफ नहीं होना चाहिए। इस तरफ का मुख्य दरवाजा बहुत ही ज्यादा अशुभ माना जाता है।
  • मकान का मुख्य दरवाजा कभी-भी ज्यादा ऊंचा या चौड़ा नहीं होना चाहिए। दरवाजे के ज्यादा चौड़े होने की वजह से मकान में हमेशा डर बना रहता है। रात-दिन हमेशा ही चिंता के होने की वजह से मकान के मालिक या सदस्यों का स्वास्थ्य खराब होता रहता है तथा इसके साथ ही एकदम से आर्थिक हानि भी हो जाती है।
  • मकान के मुख्य गेट के पल्ले कभी-भी एक बाजू में चौड़े और दूसरे बाजू में कम नहीं होने चाहिए। ऐसा होने से घर में रहने वाले सदस्यों को हमेशा ही किसी तरह का डर सताता रहता है।
  • मुख्य गेट या दरवाजे पर किसी भी तरह के दाग या धब्बे के होने पर मन में परेशानियां पैदा होती रहती है।
  • मकान का मुख्य गेट या दरवाजा कभी-भी टूटा नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे घर के अंदर गरीबी आती है।
  • अगर किसी के मकान में केवल एक ही दरवाजा या गेट हो तो (जो बाहर और अंदर आने-जाने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता हो) इससे परेशानियां कम नहीं होती है बल्कि इससे समस्याएं और भी ज्यादा बिगड़ती चली जाती है।
  • मकान के अंदर या बाहर की तरफ आने-जाने वाले मुख्य दरवाजे के जोड़ सही तरीके से बने होने चाहिए, नहीं तो काफी मुसीबतों को उठाना पड़ सकता है।
  • मकान के नीचे के फ्लोर के दरवाजे के ऊपर दूसरे फ्लोर के दरवाजे नहीं होने चाहिए।
  • मकान के दरवाजे कभी-भी आमने-सामने की तरफ नहीं होने चाहिए। उसी तरह से किसी भी और दूसरे मकान के दरवाजे भी अपने मकान के दरवाजे के सामने नहीं होने चाहिए।
  • मकान में कम से कम मुख्य गेट के प्रमुख दरवाजे की चौखट का होना जरूरी होता है।
  • मकान के बनने वाले दरवाजे के बराबर में मुख्य गेट या दरवाजा बहुत ही सुंदर दिखाई देना चाहिए। मकान के मुख्य दरवाजे पर नक्कासी (चित्रकारी) हो तो घर में खुशी तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  • अगर मकान का मुख्य गेट का ऊपर का भाग टेढ़ा-मेढ़ा हो तो मकान के स्वामी को हमेशा परेशानियां उठानी पड़ती है।
  • अगर मकान का मुख्य दरवाजा मकान के अंदर की बाजू में झुका हुआ हो, तो उस मकान में किसी न किसी की मृत्यु के होने का डर लगा रहता है।
  • यदि किसी के मकान के अंदर जाने का मुख्य दरवाजा बाहर की तरफ झुकता हुआ दिखाई देता हो, इससे उस मकान में चोरी होने का भय लगा रहता है।
  • जिनके मकान का मुख्य दरवाजा या गेट बहुत ही छोटा होता है, ऐसे दरवाजे घर के कुल (परिवार) को समाप्त करने वाले होते हैं।
  • अगर पहले उपस्थित दरवाजे पर दूसरे किसी दरवाजे का किवाड़ खुलता हुआ हो तो इसको नुकसानदायक माना जाता है।
  • मकान का मुख्य दरवाजा या गेट जिस तरीके से सजाया हो, उस तरह से और दूसरे दरवाजे सजाए हुए नहीं होने चाहिए, इस तरह का होना हानिकारक समझा जाता है।

जिस प्रकार से सभी व्यक्ति अपने-अपने बाल-बच्चों का विशेष ध्यान रखते हैं उसी तरह से हमें भी अपने मकान के कम से कम मुख्य दरवाजे या गेट का तो ध्यान रखना बहुत ही जरूरी होता है। इसलिए मकान के मुख्य दरवाजे का बहुत ही ध्यान रखना चाहिए।

मकान के मुख्य दरवाजे पर चौखट का होना भी बहुत ही जरूरी माना जाता है। आज के इस युग में किसी भी मकान के मुख्य गेट की चौखट नहीं बनाई जाती है। चौखट का न रखना मानों आज के इस युग में एक तरह का फैशन सा बन गया है। मकान के बनने वाले मुख्य दरवाजे की चौखट केवल तीन ही लकड़ियों की ही बनी होती है। असलियत में चौखट को सिर्फ चार लकड़िय़ों की वस्तु माना जाता है। चौखट का अर्थ ही यह होता है कि चार लकड़ियों से बनी वास्तु जो बिल्कुल हिसाब से 90 डिग्री के कोण बनाकर बननी चाहिए। लेकिन तीन लकड़ियों में 90 डिग्री का कोण बनना बहुत ही मुश्किल होता है। आज के युग में दरवाजे की चौखट के नीचे वाले भाग में एक अस्थाई बैटन की पट्टी को लगाया जाता है और फर्श को बिछाने के बाद उस बैटन की पट्टी को निकाल लिया जाता है और फिर किसी भी तरह का समाधान कर लेते हैं कि पूरी की पूरी चौखट अब 90 डिग्री की दिशा में ही बनी है और 90 डिग्री अंश के कोण में ही रहेगी। पंरतु कुछ ही समय के बाद 90 डिग्री का यह कोण कुछ कम अथवा ज्यादा होता दिखाई देने लगता है। वास्तुशास्त्र का बुनियादी सिद्धान्त (नियम) तो यही कहता है कि मुख्य गेट या दरवाजे की दहलीज हमेशा ही 90 डिग्री के अंश के कोण में ही बनी रहनी चाहिए, नहीं तो कई तरह की परेशानियों को उठाना पड़ सकता है।    इस चौथी लकड़ी से ही दरवाजे की चौखट बनती है। इस तरह से कहा जाता है कि जब किसी भी मंदिर के अंदर घुसते हैं तो सबसे पहले हम झुककर मंदिर की चौखट को स्पर्श करने के बाद ही मंदिर के अंदर घुसते हैं और उसके बाद ही हम मंदिर के अंदर भगवान के दर्शन कर पाते हैं। इसलिए किसी भी मकान में कम से कम मुख्य गेट या दरवाजे पर एक चौखट का होना बहुत ही जरूरी हो जाता है। मकान के मुख्य दरवाजे की चौखट के होने से बाहर के रास्ते की रुकावटें (विकृत्तियां) तथा तकलीफें आदि चौखट के बाहर ही रह जाती है तथा वे मकान के अंदर नहीं घुस पाती है। इसलिए इसी भावना से प्रेरित होकर ही भारतीय स्त्रियां अधिकतर सुबह के समय में घर की चौखट की भी पूजा-अर्चना करती है और वहां पर हल्दी-सिंदूर आदि को चढ़ा करके यहीं मन्नत मागंती है कि मकान के अंदर रहने वाले सभी सदस्यों की आने वाली परेशानियों को चौखट के बाहर ही रोककर रखो तथा वे किसी भी तरह से अंदर न आने पाएं।

मकान की चौखट के लगाने के बारे में भी एक बहुत ही विशेष बात है, वह यह कि दरवाजे के नीचे की दरार में रेंगने वाले जन्तु मकान में नहीं घुस पाते हैं। ज्यादातर दरवाजों के नीचे वाली दरारों से छिपकली, सांप जैसे रेंगने वाले जीव-जन्तु मकान के भीतर घुस सकते हैं, परंतु चौखट के होने की वजह से ऐसे जीव-जन्तु मकान के अंदर नहीं घुस पाते हैं। चौखट के लिए केवल एक लकडी़ के खर्चें को बचाने के चक्कर में मकान के स्वामी सिर्फ खतरनाक काम ही नहीं करते बल्कि इस तरह से करने से मकान के शुद्ध होने तथा पवित्र होने में कमी आने लगती है। इसलिए आज के युग को देखते हुए मकान में अंदर जाने के मुख्य गेट पर चौखट का होना बहुत ही जरूरी माना जाता है।

खिड़कियां- मकान की खिड़कियां वास्तु शास्त्र के अनुसार मकान की आंखे मानी जाती है। बाहरी दुनिया का ज्ञान हमें आंखों के द्वारा ही प्राप्त होता है। यह ज्ञान की प्राप्ति का माध्यम है। कुदरत के दर्शन भी हम मकान में होने वाली इन खिड़कियों की मदद से ही कर सकते हैं। इसलिए मकान की खिड़कियां मकान के बनवाने पर बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है। खिड़कियों के होने से समृद्धता में बढ़ोत्तरी होती है। पूर्व दिशा में खिड़कियां जितनी ज्यादा संख्या में होती है वह उतनी ही ज्यादा लाभदायक मानी जाती है, क्योंकि इन खिड़कियों से मकान में सूरज की रोशनी भी उतनी ही ज्यादा प्रवेश करेगीं। अगर उत्तर दिशा की तरफ ज्यादा खिड़कियां हों तो उससे धन की ज्यादा प्राप्ति होती है। अगर किसी के मकान में एक भी खिड़की नहीं होगी, तो उस मकान में चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा छाया रहेगा, इसलिए इन बातों को ध्यान में रखना बहुत ही आवश्यक हो जाता है किः-

  • जिनके मकान की खिड़कियां पूर्व दिशा की तरफ होगी, उस मकान में ज्यादा से ज्यादा धन की बढ़ोतरी होती रहेगी, अगर इस तरह से नहीं होगा तो इस घर में रोग बढ़ते चले जाएंगे।
  • जिनके मकान की खिड़कियां उत्तर दिशा की तरफ ज्यादा होगी तो इस मकान में बहुत ज्यादा धन की प्राप्ति होगी तथा इन खिड़कियों के इस दिशा में नहीं होने में परेशानियां आती रहेगी तथा धन भी नष्ट होता चला जाएगा।
  • पश्चिम दिशा की तरफ ज्यादा खिड़कियों के होने पर उस घर में साधारण लाभ की प्राप्ति होती रहेगी।
  • मकान में दक्षिण दिशा की तरफ ज्यादा से ज्यादा खिड़कियां होना नुकसानदायक माना जाता है।
  • मकान में सम संख्या में खिड़कियां का होना शुभ माना जाता है, लेकिन फिर भी मकान में इनकी संख्या दस बीस या तीस नहीं होनी चाहिए।
  • मकान में किसी भी कमरों के खिड़कियों के कांच टूटे हुए नहीं होने चाहिए। अगर इस तरह से किसी के कमरों की खिड़कियों के कांच टूटे हुए हो, तो उनको शीर्घता से बदलवा लेना चाहिए, नहीं तो उस घर में छोटी-छोटी परेशानियां उत्पन्न होती रहेंगी।
  • मकान के किसी भी खिड़कियों के दरवाजे या पल्ले टूटे हुए नहीं होनें चाहिए, अन्यथा उस मकान के परिवार के सदस्यों में एक-दूसरों के प्रति गलत-फहमियां उत्पन्न होती रहेंगी।
  • मकान की खिड़कियां हमेशा पीछे की तरफ से लंबी होनी चाहिए, नहीं तो हमेशा भय लगा रहेगा।
  • मकान की खिड़कियां बंद बाजू में खुलने वाली ही होनी चाहिए।
  • हो सके तो खिड़कियों के ऊपर किसी भी तरह का छज्जा आदि नहीं होना चाहिए।

पुराने सामान से बचें- मकान में होने वाला किसी भी तरह का पुराना सामान अपने साथ ही पुरानी परेशानियां, पुरानी चिंताओं को लाता है। इसलिए नया मकान चाहे जितना भी छोटा क्यों न हों, परंतु नए सामान से ही बनाना बहुत ही अच्छा माना जाता है। किसी भी तरह से अगर पुराने सामान को न इस्तेमाल किया जाए तो वह बहुत ही अच्छा होता है। सदा ही इस बात का ध्यान भी रखना बहुत ही जरूरी हो जाता है कि नए मकान की खुशी हम किस हद तक महसूस कर सकते हैं इसका हम अंदाजा नहीं लगा सकते हैं। किसी भी तरह का मंदिर हो अथवा मस्जिद किसी का भी कोई सामान मकान को बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पंरतु पानी में रहने वाला सामान, रेती तथा पत्थर ये सब लाभदायक होते हैं।

मकान का रंग- मकान के रंग के हिसाब से ही अंदर रहने वाले मकान के सदस्यों को फल मिलता हैं जैसे-

  • अगर किसी के मकान का अंदर और बाहर का रंग नीला हो, तो ऐसे रंग लाभदायक माने जाते हैं।
  • जिनके मकान का रंग बाहर से तथा अंदर से लाल रंग का होता है, वे रंग बहुत ही नुकसानदायक माने जाते हैं तथा इससे धन और संपति को भी नुकसान पहुंचता है।
  • ऐसे मकान जिनका रंग अंदर तथा बाहर से चाकलेट के रंग की तरह का होता है, इस तरह के रंग भी हानिकारक होते हैं।

मकान की ऊंचाई- किसी भी मकान को बनाते समय मकान के अंदर की नींव, दरवाजे, जमीन की आकृत्ति (आकार) आदि के साथ-साथ मकान की ऊंचाई भी महत्वपूर्ण होती है। मकान अगर ऊंचा हो, तो उसके अंदर रहने वाले परिवार के सदस्यों के विचार भी काफी ऊंचे माने जाते हैं। व्यक्ति के विचार मकान की ऊंचाई पर ही टिके होते हैं। उनके विचार ऊंचे और बड़े होने से व्यक्ति का व्यवहार भी ऊंचा और अविकृत तथा सामंजस्यपूर्ण रहता है।

जैसे पुराने समय के राजा तथा महाराजाओं के रहने की जगह तथा महल एवं अंग्रेजों के मकान एवं उनके दफ्तर आदि के मकान भी काफी बड़े होते थे। इसी वजह से उनके विचार आदि भी काफी ऊंचे माने जाते थे। लेकिन आज के युग को देखा जाए तो आज हमारे अफसर बहुत ही छोटे-छोटे से केबिन या दफ्तर आदि में कार्य करते हैं तथा उनका रहने का मकान भी उसी के अनुसार ही बहुत ही छोटे-छोटे बने होते हैं। ऐसे अफसरों का कार्य करने का दिमाग और उनकी कर्तव्यबुद्धि भी इतनी होती है कि वे अपने आफिस में पांच बजने के लिए इंतजार करते रहते हैं तथा वे ये सोचते हैं कि कब जल्दी से पांच बजे और सब कुछ समेटकर अपने घर की तरफ जाएं और मौज-मस्ती करें।

हमारे पहले के पुरखों के बने हुए मकानजितने ऊंचे होते थे. उनकी सोचने की ताकत, धारणा शक्ति तथा काम करने की ताकत भी बहुत ही ज्यादा फैली हुई तथा विकसित रहती थी। आज के युग को देखते हुए मकान की ऊंचाईयों के कम हो जाने की वजह से व्यक्तियों के अंदर भी विचारों में कमी आने लग गई है। मकान जितना ज्यादा ऊंचा होगा, उतना ही लाभदायक होगा। कमरे अगर ऊंचे होते हैं तो कृत्रिमता से उसकी ऊंचाई को कम करने की कोशिश की जा रही है। इसका यह परिणाम निकलता है कि चारों तरफ से किसी भी काम को करने में हमेशा रुकावटे ही आती चली जाती है। इसलिए हो सके तो मकान की ऊंचाई कम करने के बारे में न सोचें और खुद के जीवन को सही तरीके से चलने दें।

मकान के मुख्य गेट या दरवाजे के सामने की तरफ तथा पीछे की तरफ वाले गेट या दरवाजे के सामने किसी भी तरह का कोई बिजली का खंभा तथा पेड़-पौधे आदि नहीं होने चाहिए। अगर इस तरह से होगा तो मकान के सदस्यों के रोजाना के कार्य में बाधाएं उत्पन्न होती रहेगी।

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