Wed. Jun 3rd, 2020

वास्तु शास्त्र के आधारभूत नियम

वास्तु शास्त्र के आधारभूत नियम

वास्तु शास्त्र के आधारभूत नियम और उसकी जानकारियां

जिन मकानों की वायव्य, आग्नेय, नैऋत्य कोण वाली दिशाओं में कुएं या गड्ढे हो, तो ऐसे मकानों में ज्यादार लड़ाई-झगड़े होते देखे जाते हैं। इस तरह से मकानों के लक्षणों को देखते हुए हम इसके बारे में यह बात अवश्य ही कह सकते हैं कि वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) का बहुत ही ज्यादा महत्व है। इसके बारे में पहले ही बताया जा चुका है कि सूर्य और धरती की वजह से ही वास्तु शास्त्र की उत्पत्ति हुई है। सूर्य की पड़ने वाली रोशनी से धरती में पैदा भौगोलिक अवस्था वास्तु शास्त्र की कारणभूत है।

वास्तु शास्त्र के आधारभूत नियम-

    1. मकान में बारिश के पानी या कृत्रिम पानी के निकलने की जगह हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ ही होनी चाहिए।
    2. कमरे में ईशान दिशा से सटाकर मच्छरदानी की डंडियां, झाडू तथा घर की फालतू और बेकार पड़ी वस्तुओं को नहीं रखना चाहिए। इस तरह की वस्तुएं घर के अंदर रखने से गरीबी आती है।
    3. दुकान, फैक्ट्री तथा मकान के सामने के दरवाजे के पास किसी तरह की रुकावट का सामान (खंभा, पेड़ आदि) नहीं होना चाहिए, हमेशा इस तरह की बातों को ध्यान में रखकर ही दुकान, फैक्ट्री तथा मकान को बनवाना चाहिए।
    4. हमेशा इस तरह की बातों का ध्यान रखना चाहिए कि मकान की पूर्व दिशा में ऊंचे पेड़ और ऊंचे मकान नहीं होने पर शुद्ध हवा का वातावरण होता है। इसलिए पश्चिम दिशा में पेड़ों को लगाना बहुत ही अच्छा माना जाता है।
    5. दो बड़े मकानों के मध्य में स्थित एक छोटा व संकरा मकान होना भी शुभ नहीं माना जाता है।
    6. मकान के बाहर की तरफ पेड़ों को लगाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पेड़ मकान से इतनी दूरी या जगह पर होना चाहिए कि उस पर 9 बजे से तीन बजे तक की धूप, पेड़ की छाया बनकर मकान पर नहीं पड़नी चाहिए।
    7. मकान के पास में बेर के पेड़ की झाड़ी, कांटों के पेड़, किसी तरह की कटारी, जिन पेड़ों में से दूध निकलते हों तथा महुआ आदि के पेड़ों को नहीं लगवाना चाहिए।
    8. यदि इन पेड़ों को नहीं कटवाया जा सके तो मकान और इन पेड़ों के बीच में मौलश्री, पुन्नाग, अशोक तथा शुभदायक पेड़ शाल को लगवाना चाहिए।
    9. मकान में नारियल का पेड़, अंगूर, अपराजिता, आम, चंदन, जयन्ती, केशर, केला, चमेली, नीम फलिनी, चम्पा तथा गुलाब आदि के पेड़ को लगवाना चाहिए व मकान में तुलसी के पेड़ को भी जरूर लगाना चाहिए। तुलसी का पेड़ कीड़ों को मारने वाला तथा गंदी एवं बदबूदार हवा को शुद्ध करता है।
    10. वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार व्यापार करने वाले कार्यालयों में आफिस की लॉबी मध्य में (बीच में), आफिस में पूजा करने का स्थान ईशान दिशा में, एकाउंट विभाग का स्थान पश्चिम दिशा में, चैयरमैन का कमरा उत्तर-पूर्व की दिशा में तथा प्रशानिक कमरा पूर्व दिशा की तरफ होना आवश्यक होता है।

  1. फैक्ट्री का मुख्य दरवाजा उत्तर, पूर्व या पश्चिम दिशा में ही होना चाहिए।
  2. कारखानों के अंदर धुआं फैंकने वाली चिमनी (बॉयलर) की दिशा दक्षिण-पूर्व की तरफ ही होनी चाहिए।
  3. फैक्ट्री या कारखानों में मशीन को स्थापित करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मशीन की दिशा पश्चिम दिशा की तरफ तथा काम करने वाले कारीगर या मजदूर का मुंह पूर्व दिशा की तरफ ही होना चाहिए।
  4. वास्तु शास्त्रों के अनुसार हमेशा ही जनरेटर की दिशा पश्चिम तथा दक्षिण दिशा की तरफ ही होनी चाहिए।
  5. होटलों आदि को बनाने के लिए इसकी जमीन का चुनाव चुम्बकीय कम्पास की सहायता से नाप-तोल करके ही करना चाहिए।

वास्तुशास्त्र और उसकी जानकारियां (Information about Vastu Shastra)

  1. वास्तु शास्त्र क्या है?
  2. वास्तु शास्त्र का इतिहास
  3. वास्तु शास्त्र का परिचय
  4. वास्तु शास्त्र का साहित्य
  5. सरल वास्तु शास्त्र
  6. वैदिक वास्तु शास्त्र
  7. वास्तुशास्त्र का विज्ञान से संबंध
  8. वास्तु शास्त्र के प्रमुख सिद्धान्त
  9. वास्तुशास्त्र के सम्पूर्ण नियम और जानकारियां

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