Sun. May 31st, 2020

घरेलू उद्योग व औद्योगिक संरचनाएं समाज की उन्नति के लिये क्यों आवश्यक है?

घरेलू उद्योग व औद्योगिक संरचनाएं

घरेलू उद्योग व औद्योगिक संरचनाएं

(Domestic industry and industrial structures)

औद्योगिक संरचनाएं देश व समाज की उन्नति के प्रमुख स्रोत है। जिस समाज व देश में घरेलू उद्योग सही उत्पादन नहीं करते, वहां के मजदूर समस्याओं से पीड़ित रहते हैं तब घरेलू उद्योग उत्पादन की गुणवत्ता व लाभ दोनों ही कम हो जाते हैं। जिससे समाज व देश में उत्पादकता कम होने के कारण धीरे-धीरे बर्बादी की ओर चले जाते हैं। पूर्व सोवियत संघ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है वहां ज्यादा लागत में कम गुणवत्ता का उत्पादन होने से अंर्तराष्ट्रीय बाजार में टिक नहीं सका। पूर्व सोवियत संघ के बिखरने का सबसे बड़ा कारण आर्थिक ही था जो प्रत्यक्ष रूप से उद्योग से जुड़ा हुआ है।

(Industrial structures are major sources of progress for the country and society. In a society and country where the domestic industries do not produce rightly, the workers there suffer from problems, then both the quality and profit of the domestic industry production decreases. Due to which the productivity in the society and the country decreases, they go slowly towards waste.

The former Soviet Union is the biggest example of this, because the production of low quality of high cost could not sustain in the international market. The biggest reason for the disintegration of the former Soviet Union was economic, which is directly related to industry.)

बिजनेस करने का तरीका

फैक्टरियों को बनाने में बहुत अधिक धन खर्च होता है। घरेलू उद्योग व सामाजिक उद्योग पर देश की अर्थ व्यवस्था निर्भर है तथा उद्योगो की निश्चित सफलता के लिए वास्तुशास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार निर्माण करवाना चाहिए। जिससे उत्पादन के लिए उसके अनुकूल वातावरण तैयार हो, मशीनें चलते-चलते अचानक रूके नहीं, लेबर की दुविधा न हो, भुगतान व प्राप्त करने की समस्या न हो। मजदूर मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ रहें व घरेलू उद्योग व सामाजिक उद्योग से जुड़े रहकर संतोष का अनुभव करें। आज के युग में उद्योगो के लिए कारखाने के मैदान में जमीन लेनी होती है। जमीन के चयन की प्रक्रिया लगभग आवासीय मकानों के चयन जैसी ही होती है। इसकी स्थापना जिसमें मशीनरी, पानी, बिजली, कच्चा व तैयार माल, प्रशासनिक कार्यालय व मजदूरों के रहने के लिए वास्तु नियमों का कठोरता से पालन करने से उद्योग जरूर सफल होता है।

मुख्यद्वार व सिक्योरिटी आवास-

मुख्यद्वार उत्तरी, पूर्वी, दक्षिणी व पश्चिमी में रखना सही है। मुख्य उत्तर में हो तब सिक्योरिटी आवास (रहने की जगह) वायव्य कोण में रखना सही होता है। मुख्यद्वार पूर्वी दिशा में हो तो सिक्योरिटी केबिन आग्नेय कोण में सही माना जाता है। यदि मुख्यद्वार दक्षिणी आग्नेय या पश्चिमी वायव्य में हो तो सिक्योरिटी की जगह नैऋत्य दिशा में रखनी चाहिए। आवास की ऊंचाई 8 फुट रखना सही होता है। सिक्योरिटी केबिन के मुख्यद्वार पर उस जगह पर सही है जहां आने-जाने की रुकावट न हो लेकिन उस जगह से दृष्टि चारों ओर निर्बाध रहे। केबिन की ढाल उत्तर या पूर्व की ओर होनी चाहिए।

जल संसाधन- पानी के स्रोत उत्तरी ईशान व पूर्वी ईशान से औद्योगिक परिसर (कारखाने का मैदान व घरेलू उद्योग) में रखने चाहिए। अगर नलकूप लगना हो तो भी वह उत्तरी ईशान व पूर्वी ईशान में होना चाहिए। भूमिगत (अंडरग्राउंड) पानी के टैंक भी इन्हीं दिशाओं में बनवाने चाहिए। लेकिन यह ध्यान रखने योग्य है कि जमीन में नैऋत्य व ईशान को मिलाने वाली रेखा तथा मकान की ईशान दिशा का कोना, इन दोनों के बीच कोई पानी का संसाधन नहीं रखना चाहिए। भूमिगत (अंडरग्राउंड) पानी की टंकी नीचे चाहे चौकोर हो लेकिन ऊपर का निर्माण गोल आकार का करना चाहिए। ढक्कन की स्थिति चाहे किसी भी जगह पर हो वह भी गोल आकार की ही होनी चाहिए। नलकूप, भूमिगत (अंडरग्राउंड) पानी की टंकी, उत्तरी व पूर्वी दीवारों से कुछ दूर होनी चाहिए। ओवर हैंड टैक नैऋत्य दिशा मे रखना चाहिए क्योंकि औद्योगिक परिसर व घरेलू उद्योग में नैऋत्य सबसे ऊंचा व भारी होना बहुत जरूरी है। हमेशा यहां यह भी निर्देशित करना सही होगा कि जमीन का चंद्र भाग ही सूर्य भाग से भारी होना चाहिए।

प्रमुख मशीन की जगह-

यदि प्रमुख प्लाट (भूमि) या घरेलू उद्योग चाहे ऑटोमैटिक हो तो उसे नैऋत्य कोण में होना चाहिए। उसके लिए प्लेटफॉर्म बनवाना चाहिए। अगर मशीन भी प्लेटफॉर्म पर ही हो तो सही होगा। यदि प्लॉट बहुत भारी है तो भी उसका प्लेटफॉर्म अन्य जगह से ऊंचा होना चाहिए।

आग्नेय दिशा का निर्माण- यदि घरेलू उद्योग तथा फैक्टरियों के लिए बिजली कनेक्शन, मेन स्विच बोर्ड, बिजली द्वारा ताप उत्पन्न करने वाले उपकरण हो तो उन्हें आग्नेय कोण में होना चाहिए। बॉयलर, ओवन तथा हीटिंग एलीमेंट बनवाना सही रहता है। जिससे बिजली सप्लाई ठीक बनी रहती है तथा ये उपकरण जल्दी खराब नहीं होते क्योंकि आग्नेय कोण के देवता अग्नि है तथा जनरेटर की भी सही जगह आग्नेय कोण है। बॉयलर, जनरेटर, ओवन, बिजली व आग वाले उपकरण वायव्य, ईशान व नैऋत्य में कभी भी नहीं रखना चाहिए। इससे देखरेख का खर्च ज्यादा आयेगा व दुर्घटना की शंका भी बनी रहेगी।

प्रशासक का कमरा या प्रबंधक का कमरा-

औद्योगिक परिसर तथा घरेलू उद्योग में प्रशासनिक कामों के लिए मालिक स्वयं बैठे या अपने किसी भरोसे के व्यक्ति को बैठाएं। उसे कारखाने में अधिक प्रभावशाली जगह मिलना बहुत जरूरी है। इस महत्वपूर्ण कमरे की अधिक अच्छी जगह नैऋत्य कोण है। इस कमरे के लिए बीच उत्तर व पूर्व की जगह भी सही है। प्रबंधक को अपनी कुर्सी इस प्रकार लगानी चाहिए कि उसका मुख पूर्व या उत्तर की ओर रहे तथा आने-जाने वालों का मुख पश्चिम या दक्षिण की तरफ रहें। यदि फैक्ट्री के मैदान में प्रशासनिक मकान अलग से हो तो भी इन सिद्धांतों को अपनाना चाहिए। लेकिन इस मकान की ऊंचाई मुख्य मकान की ऊंचाई से कम ही रखनी चाहिए। नैऋत्य दिशा में प्रबंधक की उपस्थिति से सारी परिस्थितियां उसके अनुसार रहती है तथा काम से संबंधित सारे अधिकार उसके हाथ में रहते हैं।

कार्यालय में एकाउंटस से संबंधित काम बीच उत्तर, पूर्व या आग्येन दिशा में होना सही रहता है। फैक्ट्री तथा घरेलू उद्योग में काम करने वाले मजदूरों के बैठने की व्यवस्था वायव्य कोण में करनी चाहिए जिससे वे कार्यालय में अपना जरूरी काम खत्म करके अपने काम में तुरंत वापिस लग जाएं। प्रबंधक कमरा इस प्रकार बना हो जिससे वह संपूर्ण कार्यालय पर एक साथ नजर रख सके जिससे काम के प्रति गम्भीरता बनी रहे।

यदि प्रशासक के कमरे में शौचालय बनवाना हो तो उसे वायव्य या आग्नेय दिशा में उत्तर व पूर्व की दीवार से हटाकर बनवाना चाहिए।

कच्चामाल-

उद्योग व घरेलू उद्योग में कच्चामाल प्रयोग में लाया जाता है। कच्चेमाल का भंडारण दक्षिण, नैऋत्य तथा पश्चिम दिशा में करना चाहिए। यदि मात्रा ज्यादा हो तो वायव्य दिशा में भी रख सकते हैं। अलग-अलग कामों में कच्चेमाल की परिभाषा बदल जाती है जैसे- प्लास्टिक पैकेजिंग उद्योग में प्लास्टिक शीट या पेपर कच्चामाल है लेकिन प्लास्टिक शीट वाले के लिए प्लास्टिक शीट तैयार माल है। इस उद्योग व घरेलू उद्योग के लिए कच्चामाल प्लास्टिक दाना है जिससे प्लास्टिक शीट बनाई जाती है। अब एक उद्योग प्लास्टिक दाना बनाता है उसके लिए यह तैयार माल है लेकिन कच्चामाल प्लास्टिक का टूटा-फूटा सामान है जिसे वह कबाड़ी से हासिल करता है।

उत्पादन-

किसी भी औद्योगिक इकाई (कंपनी) का एक लक्ष्य होता है वह है किसी भी वस्तु का उत्पादन। इन उत्पादनों को बेचने के लिए जल्द से जल्द बाजार में भेजना चाहिए जिससे विनिमय की तरलता बनी रहे। तैयार माल को कार्य क्षेत्र में वह स्थान देना चाहिए जिससे वह इस जगह ज्यादा समय तक भंड़ारण न हो पाए, तैयार माल का ऑर्डर तुरंत मिल जाए तथा तैयार माल को वायव्य कोण में जगह देनी चाहिए।

तोलने वाली मशीन-

कच्चेमाल व तैयार माल को तोलने की व्यवस्था उत्तर व पूर्व के बीच में मैदान से कुछ दूरी पर होनी चाहिए।

कर्मचारियों व मजदूरो के रहने की जगह-

फैक्ट्री व घरेलू उद्योग के मैदान में मजदूरो व कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था के लिए सही जगह पश्चिमी वायव्य व दक्षिणी आग्नेय कोण होती है। यदि मकानों की संख्या कम है तो उत्तरी वायव्य में भी बना सकते हैं। मुख्य मकानों की ऊंचाई से इन मकानों की ऊंचाई कम रखनी चाहिए। अगर मकान अधिक मंजिलो वाला बनाना हो तो मकान की स्थिति मैदान के नैऋत्य कोण में रखनी चाहिए।

पार्किंग-

गाड़ियों आदि के लिए पार्किंग की जगह वायव्य तथा आग्नेय कोण में होनी चाहिए। प्रशासक खंड में हल्की गाड़ियों के लिए ईशान दिशा में भी व्यवस्था की जा सकती है।

मंदिर- फैक्ट्ररियों या घरेलू उद्योग के मैदान में मंदिर का निर्माण मुख्य भवन के आगे वाले भाग में किया जाना चाहिए। मंदिर को मुख्य मकान के पीछे के भाग में नहीं बनवाना चाहिए। मंदिर के लिए सबसे अच्छी दिशा ईशान कोण है इसे उत्तर व पूर्व के बीच में भी बनवाया जा सकता है। भगवान की प्रतिमा (मूर्ति) का मुख दक्षिण की ओर नहीं रखना चाहिए जिससे दर्शन करने वाले का मुख उत्तर की ओर हो। मंदिर की ऊंचाई ज्यादा नहीं रखनी चाहिए। छोटे उद्यान व पेड़ लगाने चाहिए। लता तथा फूल आदि से वातावरण सुरम्य व ताजगीमय हो जाता है। मैदान में प्रवेश के समय सामने मदिंर होने पर आने-जाने वालो व मजदूरो की मानसिकता काम में एकाग्र होने की हो जाती है।

वृक्षारोपण-

हमेशा बड़े पेड़ मुख्य मकान से दूर दक्षिण व पश्चिम दिशा की ओर लगाने चाहिए जिससे उनकी छाया मकान पर सुबह 9 से 3 बजे तक न पड़े। फैक्ट्ररियों या घरेलू उद्योग के मैदान में छायादार पेड़ लगाने चाहिए। छोटे पेड़, पौधे व फूल आदि पूर्व व उत्तर दिशा की ओर लगाने चाहिए। पेड़ों में कांटेदार पेड़ व झाड़ियां नहीं लगाई जानी चाहिए। पेड़ों में बबूल, कीकर, अनार व सीताफल नहीं लगाना चाहिए। हमेशा मैदान में ही उत्तर व पूर्व दिशा की ओर ज्यादा खाली जगह छोड़नी चाहिए तथा दक्षिण व पश्चिम दिशा की ओर कम जगह छोड़नी चाहिए।

उद्योगशाला की छत व उसकी ढाल-

फैक्टरियों या घरेलू उद्योग की छत ज्यादातर लोहे के पाईप व एंगल से बनी होती है जो सी.जी.आई शीट या एस्बेस्टॉस शीट द्वारा कवर (ढकी) की जाती है। छत की ढाल एक महत्वपूर्ण जगह रखती है। यह ढाल पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखनी चाहिए।

अशुद्ध जल शुद्धिकरण संयंत्र, जल निस्तारण-

काम में प्रयोग किया गया पानी अशुद्ध हो जाता है। पर्यावरण पर बुरा प्रभाव न पड़े इसके लिए अशुद्ध पानी से जहरीले तत्वों को जो जीव जगत व वनस्पति जगत पर बुरे प्रभाव डालते हैं उन्हें अलग करके पानी को शुद्ध किया जाता है। जल शुद्धिकरण संयंत्र उत्तर या पूर्व के बीच में स्थापित करना चाहिए तथा पानी का निस्तारण (शुद्ध) उत्तर या पूर्व के बीच में करना चाहिए।

औद्योगिक मैदान या उत्पादन इकाईयों या फिर घरेलू उद्योग के लिए वास्तु निर्देश-

  • कच्चा माल, तैयार माल या स्क्रेप ईशान कोण में न रखें।
  • जमीन का पिछला भाग आगे के भाग से ज्यादा बड़ा न हो, यदि जमीन विषम आकार में हो तो उसको वास्तु के अनुसार सुधार कर काम में लेना चाहिए।
  • उत्पादन यूनिट के द्वार के सामने कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए नहीं तो इससे उत्पादन में बाधा उत्पन्न होती रहेगी।
  • उत्पादन यूनिट के द्वार आमने-सामने होने चाहिए जिससे काम में एकाग्रता बनी रहे।
  • फैक्टरी के मैदान के वायव्य कोण में कोई निर्माण करवाकर पूरी तरह से उसे बंद न करवाएं।
  • फैक्ट्री व घरेलू उद्योग की जमीन के चयन के लिए आग्नेय से नैऋत्य तथा नैऋत्य से वायव्य कोण वाली जमीन को अच्छा माना जाता है।
  • पानी का स्थान ईशान कोण में होना चाहिए।
  • तैयार माल को वायव्य कोण में रखना चाहिए।
  • ईशान कोण में पानी की भंडारण व्यवस्था करें। यदि पानी के भंडार के लिए ओवर हैड टैंक बनाना हो तो उसे नैऋत्य दिशा में बनवाएं।
  • फैक्टरियों की जमीन में मुख्य प्रवेशद्वार उत्तरी ईशान, पूर्वी ईशान, दक्षिणी आग्नेय व पश्चिमी वायव्य में रखना चाहिए। फैक्ट्री व घरेलू उद्योग में जेनरेटर, ओवन, मेन स्विच, मोटर आदि को आग्येन से प्रभावित भाग में जगह देनी चाहिए। इन्हें कभी-भी ईशान व नैऋत्य कोण में नहीं स्थापित करना चाहिए।
  • तैयार माल हमेशा वायव्य कोण में रखना चाहिए।

पीने के पानी की जगह व आवासीय होटल-

पानी पीने की जगह व आवासीय होटल वास्तु के अनुसार नीचे बताए गए हैं जो व्यापार की सफलता को सुनिश्चित करते हैं। आवासीय होटल में लाईन से रूम सूट बनाने होते हैं जिनमें भोजनालय, किचन व रिसेप्शन अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

  • सभी द्वार उत्तरी ईशान, पूर्वी ईशान, दक्षिणी आग्नेय व पश्चिमी वायव्य कोण में होने चाहिए।
  • होटल के फ्लोर की ढ़ाल ईशान-उत्तर दिशा में होनी चाहिए।
  • रिसेप्शन काउंटर ईशान में रखें। यदि रिसेप्शनिस्ट की सिटिंग उत्तरामुखी या पूर्वामुखी हो तो अच्छा माना जाता है।
  • बरामदा, बालकॉनी, पोर्च या छत ईशान कोण से प्रभावित भाग में बनवानी चाहिए।
  • बिजली नियंत्रण व्यवस्था, किचन, मेन स्विच, पानी गर्म करने की जगह, गैस सिलेंडर, वॉशिंग मशीन, जेनरेटर, सैंट्रली एयर कंडीशनर को आग्नेय से प्रभावित भाग में रखना चाहिए।
  • खाने बनाने वाले का मुंह पूर्वाभिमुख होना चाहिए।
  • भोजन का कमरा पश्चिम दिशा से प्रभावित भाग में या खुली छत पर रखना होना चाहिए।
  • वॉशबेसिन ईशान कोण में तथा शीशा उत्तरी व पूर्वी दीवारों पर लगाना चाहिए।
  • यदि भोजन करने की व्यवस्था छत पर की जाए तो उस स्थिति में पुष्पित व पल्लवित पौधों के गमले रखने से वातावरण सुरम्य व ताजगी भरा हो जाता है।
  • शौचालय व नहाने का कमरा एक साथ बनाना सही रहता है इन्हें हर कमरे के साथ बनाना चाहिए। शौचालय नैऋत्य या वायव्य कोण में बनाना सही रहता है। यदि टाला न जा सके तो टॉयलेट आग्नेय कोण में भी बनाया जा सकता है। लेकिन ईशान दिशा में नहीं बनाना चाहिए।
  • बैड़रुम में बैड की व्यवस्ता इस प्रकार करनी चाहिए जिससे सोने वाला व्यक्ति पूर्व-पश्चिम तथा दक्षिण-उत्तर दूरी पर सोएं।
  • वजन वाले उपकरण, गैराज, चक्की आदि नैऋत्य कोण में होने चाहिए।
  • सोपान (Stair case) के लिए होटल व पानी की जगह का ऑकल्पन रहने वाले मकानों से कुछ अलग होना चाहिए। प्रवेशद्वार के पास से ही सीढ़ियां बनानी चाहिए जिससे आने-जाने में कोई परेशानी न हो। यदि सीढ़ियां मकान के बीच में या अंदर हो तो बेवजह मकान में भीड़-भाड़ बनी रहती है तथा उससे अनुशासन प्रभावित होता है। लेकिन सीढ़ियों की धुरी पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण ही रहनी चाहिए। सीढ़ियों का घुमाव दक्षिणावर्त ही होना चाहिए। छत पर खुलने वाला दरवाजा उत्तरी ईशान, पूर्वी ईशान, दक्षिणी आग्येन या पश्चिमी वायव्य कोण में खुलना चाहिए।
  • आग से डर की स्थिति से बचाव के लिए फायर एस्केप नैऋत्य कोण में बनाना चाहिए। इसे दक्षिण व पश्चिम के बीच में भी बनाया जा सकता है।

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