घर की सजावट – सरल वास्तु शास्त्र

घर की सजावट - सरल वास्तु शास्त्र

घर की सजावट एवं सरल वास्तु शास्त्र

घर की सजावट और वास्तु का संबंध: सरल वास्तु शास्त्र का उपयोग केवल मकान को सुंदर एवं व्यवस्थित बनाने के लिए ही नहीं किया जाता है बल्कि इसका प्रयोग मकान में रहने वाले लोगों को सुख, समृद्धि एवं मानसिक शांति देने के लिए भी किया जाता है। इसके अनुसार मकान का निर्माण करवाने से मकान में रहने वाले लोगों में सुख-शांति बनी रहती है।

विद्वानों का मानना है कि मकान (घर) बन जाने के बाद सरल वास्तु शास्त्र के अनुसार उसे ठीक करने के लिए तोड़-फोड़ करना उचित नहीं होता। इसलिए मकान का निर्माण करवाते समय ही सावधानी रखना चाहिए और उसी के अनुसार निर्माण कराना चाहिए।

यदि मकान बनवाते समय वास्तुदोष रह गया हो तो कमरे को सरल वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की सजावट की जाए तो भी उसका दोष दूर हो जाएगा। बाहरी सजावट से तो अन्य लोग ही प्रभावित होते हैं जबकि घर की आंतरिक साज-सज्जा स्वयं को आनंदित करती है। आंतरिक साज-सज्जा मकान के सौंदर्य की परिचायक है। वास्तु श्रृंगार की बाहरी व आंतरिक साज-सज्जा का प्रतीक है।

सामाजिक जीवन में मनुष्य के लिए घर का होना उतना ही आवश्यक है जितना कि अन्य प्राकृतिक तत्वों का। इसलिए सरल वास्तु शास्त्र में घर  के लिए नियम एवं सिद्धांत बनाए गए हैं। सरल वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की सजावट को बाहर की सुंदरता के अलावा अंदर की सुंदरता को भी उचित ढंग सजाया जाए तो उस घर में रहने वाले परिवार सुखी एवं प्रसन्न रहता है। घर की सजावट का सरल वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के अनुरुप होने से मकान के गुणों में बढ़ोतरी होती है। वास्तु-ज्ञान रहित आंतरिक साज-सजावट व्यर्थ है।

साज-सजावट आंतरिक हो या बाहरी दोनों ही सुंदर एवं मोहक वातावरण का निर्माण करने वाला होता है जिससे उसके संपर्क में रहने वाले व्यक्ति प्रसन्न एवं खुश रहते हैं। घर की सजावट दूसरों को आकर्षित करने के लिए होती है जबकि घर के अंदर कमरों की सजावट आत्मसंतुष्टि, सुख एवं शांति के लिए होती है। घर की आंतरिक सजावट और आसपास बिखरी रंग बिरंगी वस्तुएं अपने प्रभाव से अच्छे वातावरण का निर्माण करती है।

सरल वास्तु शास्त्र मानव जीवन के विकास व ह्नास में सहायक है और इसका संबंध सजावट से भी होता है। घर बनवाने के बाद उसके आंतरिक सजावट के लिए सरल वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों पर विचार करना चाहिए। मकान की आंतरिक सजावट के समय यह विशेष रुप से ध्यान रखना चाहिए की अंदर की सजावट आसपास के वातावरण के विपरीत न हो यदि ऐसा हुआ तो उसमें निवास करने वाले लोग सुखी एवं शांत जीवन व्यतीत नहीं कर सकते। अतः घर की सजावट से पहले वास्तुशास्त्री से सलाह लेकर ही सजावट करवाएं। सरल वास्तु शास्त्र के अनुसार मकान की अंदर व बाहर से सजावट कराने से घर में रहने वाले लोग सुखी एवं प्रसन्न रहते हैं तथा वह हमेशा उन्नति की ओर बढ़ते रहते हैं। सरल वास्तु शास्त्र के अनुसार सजावट कराने से वास्तुदोष भी दूर हो जाते हैं।

सरल वास्तु शास्त्र के अनुसार मकान की स्थिति, आसपास का वातावरण एवं ज्योतिष द्वारा मकान पर ग्रहों की स्थिति का शुभ-अशुभ का विचार करके ही घर के अंदर या बाहर सजावट करवानी चाहिए। घर की दीवारों का रंग, पर्दों का रंग एवं लकड़ी की सजावट करनी चाहिए। ड्राइंगरुम, डाइनिंग हॉल, गेस्ट रूम आदि की सजावट पर विचार करना चाहिए। इन कमरों में रखी जाने वाली वस्तुओं तथा उनके रंग-रूप, आकार आदि पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

प्रकृति में मौजूद सभी रंगों का अपना एक अलग महत्व है जिनके प्रभाव एवं परिणाम भी अलग होते हैं। दैनिक जीवन में काम आने वाली उपयोगी वस्तुओं का हम से घनिष्ठ संबंध है। ग्रहों के बलाबल और मकान के तत्वों से ही यह निश्चित किया जा सकता है कि मकान की वस्तुओं, दीवारों व काष्ठ की वस्तुओं का क्या रंग होना चाहिए। घर की सजावट एवं छोटी-छोटी बातों का संबंध सुख-दुख एवं हानि-लाभ से होता है।

विभिन्न आचार्यों का मानना है कि तन व मन के सौंदर्य के साथ-साथ मकान भी सुंदर व भव्य होना चाहिए। मकान बनवाने के लिए सुंदर एवं अनुकूल भूमि को खरीदना चाहिए तथा उस पर सरल वास्तु शास्त्र के नियमानुसार सुंदर एवं आकर्षक घर का निर्माण करवाना चाहिए ताकि वह अपने परिवार के साथ सुखी एवं शांति से जीवन-यापन कर सके। यदि जीवन में सौंदर्यता एवं आकर्षण न हो तो वह जीवन बदरंग एवं व्यर्थ प्रतीत होता है। वस्तुतः वास्तु अनुकूल आकर्षक व सुंदर मकान बनाकर अपने अनुकूल रंगों के अनुरूप घर की भीतरी दीवारों, दरवाजों व वस्तुओं के द्वारा आंतरिक साज-सज्जा करनी चाहिए।

अंदर के कमरों का आयतन- मकान के अंदर के कमरों का निर्माण करते समय उसके आयतन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। कमरों का माप विषम नहीं होना चाहिए अर्थात 20 X 19, 10 X 9, 8 X 7, 21 X 20 आयतन वाला कमरा नहीं बनवाना चाहिए। यदि कमरे का आयतन विषम हो तो परिवार में सुख-शांति नहीं रहेगी। यह भी प्रयास करना चाहिए की भीतरी कमरों में चार से अधिक कोण न हों।

     पूर्व व उत्तर के बीच ईशान कोण में भूलकर भी शौचालय नहीं बनवाना चाहिए। सरल वास्तु शास्त्र में इस कोण को सबसे उच्च एवं शुद्ध माना गया है। ईशान कोण में देवताओं का निवास होता है इसलिए यहां पूजाघर बनवाना अत्यंत शुभ माना गया है। यदि बना-बनाया मकान खरीदा हो और उसमें शौचालय ईशान कोण में हो तो इसे तुरंत ही बदल देना चाहिए। यह मकान परिवार की सुख-शांति एवं उन्नति व समृद्धि के लिए उचित नहीं होता। मकान के ईशान कोण में शिकार करते हुए शेर का चित्र या दर्पण अवश्य लगाएं। सैप्टिक टैंक हमेशा उत्तर-पश्चिम या वायव्य कोण में लगवाना चाहिए।

सरल वास्तु शास्त्र में रंगों का महत्व

घर की सजावट के लिए चिप्स के फर्श बनाते समय काले रंग के पत्थरों का अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके अधिक प्रयोग से राहु का प्रभाव बढ़ता है जिससे मकान में रहने वाले चिंता एवं परेशानी से ग्रस्त रहते हैं।

दीवार एवं फर्श के लिए सफेद रंग का अधिक प्रयोग करना हानिकारक प्रभाव पैदा करने वाला होता है। सफेद रंग का अधिक प्रयोग करने से मकान में रहने वाले लोग अधिक महत्वकांक्षी हो जाते हैं जिससे वह अपने भविष्य की चिंता न करते हुए भोग-विलास में इतने खो जाते हैं कि उसे अपने परिवारिक जीवन का ध्यान ही नहीं करता है।

यदि शुक्र की प्रभाव शक्ति उच्च हो तो सफेद रंग का प्रयोग करना शुभ होता है लेकिन कमजोर हो तो सफेद रंग का प्रयोग करना अशुभ होता है। यदि शुक्र उच्च, शक्तिशाली एवं केन्द्र या त्रिकोण में हो या मित्रक्षेत्री हो तो घर की सजावट में निर्मलता व पीले व शुभ रंग का प्रयोग करना उचित होता है। यदि गुरु अशुभ हो, शत्रुक्षेत्री व कमजोर हो तो पीले व शुभ्र रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इससे परिवार में आपसी मतभेद पैदा होता है जिससे लड़ाई-झगड़े की आशंका बनी रहती है। गुरु-शुक्र का संबंध होने पर भी पीले व सफेद रंग का अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए। इससे घर में चिंता एवं परेशानी बनी रहती है।

प्रत्येक राशि एवं ग्रह का अपना एक अलग महत्व होता है जिसका उपयोग प्रकृति एवं सरल वास्तु शास्त्र के अनुसार करने से शुभ फल मिलता है। सरल वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि मकान को बाहर एवं अंदर से रंग करवाएं तो मकान निर्माण के समय उत्पन्न वास्तुदोष समाप्त हो सकता है।

सरल वास्तु शास्त्र के अनुसार विभिन्न रंग एवं उसका प्रभाव- 

    • गहरा शुद्ध लाल रंग प्यार एवं मिलन को दर्शाता है। इस रंग से मकान को रंगवाने से उसमें रहने वाले व्यक्ति के मन में प्रेम की भावना पैदा होती है।
    • मध्यम लाल रंग को स्वास्थ्य एवं जीवंतता माना गया है। अतः इस रंग का उपयोग करने से स्वास्थ्य एवं प्रसन्नता का माहौल बना रहता है।
    • चमकदार लाल रंग चाहत एवं लालसा का प्रतीक माना गया है। इस रंग का उपयोग कमरों में करने से व्यक्ति में किसी चीज के प्रति चाह एवं लालसा बढ़ती है।
    • गाढ़ा गुलाबी रंग को स्त्रीत्व एवं उत्सव का सूचक कहा गया है।
    • मध्यम गुलाबी रंग कोमलता व सरल स्वभाव को दर्शाता है। इस रंग का उपयोग कमरे में करने से उसमें रहने वाले व्यक्ति का मन कोमल एवं शांत स्वभाव बना रहता है अर्थात यह रंग क्रोधित व्यक्ति को शांत करने का भी सूचक है।
    • गहरा नारंगी रंग महत्वकांक्षा को दर्शाता है। इस रंग वाले कमरे में रहने से महत्वकांक्षाएं बनी रहती है।
    • मध्यम नारंगी रंग संघर्षशीलता व उत्साह को दर्शाता है।
    • हल्का नारंगी रंग तीव्रता का सूचक माना गया है।
    • गहरा भूरा रंग उपयुक्तता को दर्शाता है।
    • मध्यम पीले रंग का उपयोग अच्छाई का सूचक है।
    • हल्का पीला रंग बुद्धिमत्ता का सूचक है।
    • गहरा पीला रंग स्फूर्ति देने वाला होता है।
    • तीव्र मध्यम पीला रंग मानवताप्रेमी का सूचक है।
    • तीव्र हल्का सुनहरा रंग मोहक एवं आकर्षक होता है।
    • मध्यम सुनहरा रंग सम्पन्नता का सूचक है।
    • गाढ़ा मध्यम सुनहरा रंग वैभव को दर्शाता है।
    • गहरा हरा रंग भोलेपन या मासूमियत को दर्शाता है।
    • मध्यम हरा रंग को खुलापन एवं व्यावहारिकता का सूचक माना गया है।
    • तीव्र मध्यम नीले रंग को आदर्शवाद का सूचक माना जाता है।
    • गहरा नीला रंग ईमानदारी एवं परिश्रम का सूचक है।
    • हल्का नीला रंग शांति एवं अपनेपन को दर्शाता है।
    • हल्का मध्यम नीला रंग दयालुता को दर्शाता है।
    • हल्का बैंगनी रंग कोमलता का सूचक है।
    • गहरा बैंगनी रंग वैभव का प्रतीक है।

फर्श का आलेखन (चित्रकारी)-

मकान बनने के बाद उसके फर्श पर अनेक आलेखन बनाने की भी रुचि होती है। फर्श में स्वास्तिक, देवी-देवता या उनके प्रतीक, शंख, चक्र, गदा, पुष्प, तोरण, मुकुट, पुस्तक, लेखनी वीणा एवं पशु-पक्षियों की आकृति व अण्डाकार अंकन नहीं बनाना चाहिए। यदि ऐसा करेंगे तो मनोरोग व मानसिक विक्षिप्तता हो सकती है। षट्कोण व कुम्भादि अंकित कराने से धनहानि की संभावना रहती है। फर्श में सर्वतोभद्र, सप्त व अष्टदल के पुष्प, प्रतीक, चतुर्वर्ग, कमल का चिह्न एवं चूनड़ी आदि का चित्र बनाना सुंदर एवं शुभ होता है। यहां अंकित द्वीप, टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं, शून्य, क्रॉस आदि अंकित नहीं कराने चाहिएं। कमरे के सभी कोणों में एकसमान रंग रखना चाहिए। अलग-अलग कोणों में अलग-अलग रंगों का होना अशुभ प्रभाव पैदा कर सकता है।

दीवारों एवं तस्वीर-

किसी भी कमरे की दीवार टूटी, गंदी एवं भद्दी नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे उसमें रहने वाले के मन पर बुरा असर पड़ता है। ऐसी दीवार निराशा, अनुत्साह, वैमनस्य एवं क्रोध को बढ़ाने वाली होती है। इस दीवार से व्यक्ति चिंताग्रस्त एवं परेशान रहने लगता है। कमरे की दीवारों पर सजावट के रूप में हिंसक पशुओं व सर्वादि की भयावह आकृतियां नहीं बनवानी चाहिए। सौम्य, लुभावनी व मन को पुलकित करने वाली तस्वीर नहीं बनवानी चाहिए।

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