हमारी बॉडी लेंगुएज (Hamari Sharirik Bhasha)

Hamari Sharirik Bhasha Ka Gyan

     अगर किसी व्यक्ति को कहा जाए कि हमारे शरीर के अंग बात करते हैं तो वह जरूर हमारी तरफ कुछ अजीब नजरों से देखेगा या फिर कहेगा कि कहीं पागल तो नहीं हो गए हो, बोलने के लिए तो जुबान होती है फिर शरीर के अंग कैसे बोलेंगे। वैसे देखा जाए तो गलती उन लोगों की भी नहीं है क्योंकि उन्होने आज तक बॉडी लेंगुएज (Hamari Sharirik Bhasha) जैसी भाषा के बारे में पढ़ा ही नहीं। न हीं उन्होंने कभी यह सोचा कि एक व्यक्ति के मन की भाषा को दूसरा व्यक्ति भी पढ़ सकता है।

     वास्तव में हमारे शरीर के सब अंगों में ही प्राकृतिक भाषा लिखी हुई है जिसका प्रयोग हम अपने मन की भावनाओं और समय के अनुसार करते रहते हैं। जैसा कि आपने आमतौर पर देखा होगा कि यदि कोई व्यक्ति खुश है तो उसके चेहरे के हावभाव से ही उसकी खुशी का पता चल जाता है और यदि कोई व्यक्ति उदास है तो उसका लटका हुआ चेहरा ही उसके दुख को प्रकट कर देता है। यदि व्यक्ति गुस्से में है तो उसकी आंखों से गुस्सा झलक रहा होगा।

     उदाहरण के लिए आप देखें कि जब कोई व्यक्ति कोई अपराध करके भागता है तो वह ज्यादातर सहमा हुआ सा रहता है, उसकी आंखों में डर साफ-तौर पर नजर आता है। उसके शरीर के अन्य अंग भी स्वयं बता देते हैं कि वह व्यक्ति किसी से छिपता फिर रहा है।

     भले ही सामने वाला व्यक्ति नहीं जानता कि वह अपराधी है, मगर फिर भी वह उससे डरता है।

     मन की भावनाएं जब शारीरिक अंगों द्वारा प्रकट होने लगती है तो उसे ही बॉडी लेंगुएज (Hamari Sharirik Bhasha) कहते हैं। बॉडी लेंगुएज कोई नई भाषा नहीं बल्कि बहुत भाषा पुरानी है मगर फिर भी हमारे देश में इसे बहुत ही कम लोग जानते हैं।




     अक्सर दो प्रेमियों को आपने देखा होगा उनमें ज्यादातर आंखों के द्वारा ही बातें होती है। प्रेमी प्रेमिका की आंखों द्वारा ही उसके दिल में उतर जाना चाहता है। वैसे भी कहते हैं कि प्यार आंखों से ही शुरु होता है और फिर दिल में उतरता है।

हमारी पुरानी फिल्मों में भी इसको लेकर बहुत से गाने बने है और हिट भी हुए हैं जैसे- आंखों ही आंखों में इशारा हो गया बैठे-बैठे जीने का सहारा हो गया या इस प्यार से मेरी तरफ न देखो प्यार हो जाएगा। इन गानों को सुनकर ऐसा महसूस होता है कि यह विषय किसी से अछूता नहीं है लेकिन लोगों की नजरों में फिर भी बहुत कम है।

    Hamari Sharirik Bhasha में शरीर के हर अंग की अपनी-अपनी भाषा होती है। कई बार सारे शरीर के अंग काम करते हैं और उन सब अंगों की भाषा करीब-करीब सब जगह एक ही प्रकार की होती है, मगर उन इशारों को समझने के तरीके अलग-अलग हैं तथा उनका उपयोग भी अपने-अपने देश व सभ्यता के अनुसार ही होता है। जब आप अपने देश की ओर देखेंगे तो पता चलेगा कि हमारी सभ्यता पश्चिमी देशों से बिल्कुल ही भिन्न है।

     हमारी सभ्यता में बड़ों का सम्मान करना, उन्हें प्रणाम करना बताया जाता है। आपने अक्सर देखा होगा कि नेता चुनाव प्रचार के समय जब जनता के सामने जाते हैं तो उनके दोनों हाथ जुड़े हुए होते हैं।

आमतौर पर जब कोई बड़ा आदमी या सगा-संबंधी हमे मिलता है तो हम उन्हे नमस्कार करते हैं, इसके लिए हम अपने दोनों हाथ जोड़ लेते हैं। भले ही हम मुंह से नमस्कार न भी बोलें तो भी दोनों हाथ जोड़ने का अर्थ समझने में देर नहीं लगती कि हम दूसरे व्यक्ति को नमस्कार कर रहे हैं।

कल्पना करें कि अगर कोई नेता दिनभर में हजारों आदमियों के पास जाता है तो वह कितनी बार नमस्कार बोलेगा। इसलिए वह केवल अपने दोनों हाथ जोड़कर ही नमस्कार कर लेता है और मुंह से कुछ भी नहीं बोलता। केवल उसके थोड़े से होंठ हिलते नजर आते हैं। यह भी बॉडी लेंगुएज का ही कमाल है कि हम बिना सामने वाले व्यक्ति के कुछ बोले, उसके हाथ जोड़कर प्रणाम करने का अर्थ फौरन समझ जाते हैं।

     केवल हाथ जोड़ने की बात नहीं होती। वास्तव में हमारे शरीर के अंदर जो हमारा मन है, पहले वह सोचता है कि मुझे यह करना है, उसके बाद इसी कल्पना से हमारे शरीर की ज्ञानेन्द्रियां जागृत होती है। इसी संचार माध्यम से हमारे मस्तिष्क में जो भावना उठती है, जो विचार उठते हैं, वही बॉडी लेंगुएज (Hamari Sharirik Bhasha) के रूप में हमारे सामने होते हैं जिसे सामने वाला व्यक्ति तुरंत समझ जाता है। हमारे चेहरे पर वही भाव होते हैं जो हमारे मन और मस्तिष्क में जन्म ले चुके होते हैं। उस समय हमारी जुबान का काम हमारे अंग करते हैं।

     एक भीख मांगने वाले को ही देख लीजिए। वह अपने मुंह से कुछ भी नहीं कहता बल्कि अपना हाथ किसी के भी आगे फैलाकर खड़ा हो जाता है और सामने वाला तुरंत समझ जाता हैं कि वह भीख मांग रहा है। ऐसे अवसर पर केवल उसके हाथ ही काम नहीं करते बल्कि उसकी आंखों में भी भीख पाने की चमक नजर आती है।

ऐसी ही भीख की चमक उसके चेहरे पर भी देखी जा सकती है, वह अपने मुंह से कुछ भी नहीं बोलता मगर उसके फैलाए हुए हाथ, चेहरे व आंखों से यह बात साफ हो जाती है कि वह भीख मांग रहा है। साधारण तौर पर इन छोटी-छोटी बातों पर कोई ध्यान नहीं देता। कोई नहीं सोचता कि उस आदमी ने हमें बोला तो कुछ नहीं, फिर भी हम समझ गए हैं कि वह हमसे कुछ मांग रहा है। यह सब कमाल तो Hamari Sharirik Bhasha का ही है।

     हमारे शरीर के सारे अंग हमारे मन-मस्तिष्क के साथ मिलकर ही काम करते हैं। जैसा हम सोचते हैं और जो भी हम करना चाहते हैं, वैसे ही हमारे अंग काम करने लगते हैं- जैसे कि कोई आदमी बहुत खुश है, और बड़े मजे से झूमता हुए चल रहा है। उसकी चाल में तेजी होती है और वह होंठों से सीटी बजाता हुआ चलता है। यह खुशी उसकी जुबान से नहीं, उसके शारीरिक अंगों से ही पता चल जाती है।

यही हमारी बॉडी लेंगुएज है, जो हमारे शरीर के अंग बोलते हैंऐसे ही किसी व्यक्ति की लॉटरी निकल आती है या किसी आदमी को नौकरी मिल जाती है तो वह बहुत ही खुश होते हुए सामने अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहता है- “देखो मेरी लॉटरी लग गई” या दोनों हाथों को हिलाते हुए कहता है कि-“मेरी नौकरी मिल गई।”

इस चित्र में यह बात साफ रूप से नजर आती है कि वह आदमी अपनी इच्छा पूरी होने पर कितना खुश नजर आ रहा है। वह पूरी तरह खुशी में डूबा हुआ है। उसके शरीर के सारे अंग काम कर रहे हैं। खुशी की यह लहर उसकी चमकती आंखों में भी देखी जा सकती है। उसके चलने का अंदाज और खड़ा होना भी खुशी का प्रतीक बन जाता है। यही हमारी बॉडी लेंगुएज है, जो हमारे शरीर के अंग बोलते हैं।

हर देश के लोगों की बॉडी लेंगुएज अलग-अलग इशारों के बल पर ही चलती है। सभी देशों में किसी इशारे का अर्थ एक नहीं निकाला जा सकता है। हर अंग जब अपनी भाषा (Hamari Sharirik Bhasha) बोलता है तो उस भाषा का अर्थ अपने देश की सभ्यता के अनुसार निकाला जाता है। हालांकि उस इशारे का तरीका एक ही होता है।

तुम जीरो थे, जीरो हो और जीरो ही रहोगेअंदाज एक होता है, मगर उसका अर्थ अपने-अपने दृष्टिकोण के अनुसार ही निकाला जाता है।

इस चित्र में देखें कि एक आदमी के दोनों होंठ खुले हैं और उसकी आंखों में एक विचित्र सी चमक नजर आ रही है। उसने अपने हाथ की तर्जनी अंगुली और अंगूठे को मिलाकर गोल-चक्र सा बना रखा है। देखने में यह साधारण-सी बात लगती है लेकिन हमारे देश में इसका सीधा अर्थ निकालता है “जीरो”। तुमने आज तक कुछ नहीं किया, तुम जीरो थे, जीरो हो और जीरो ही रहोगे।

 ऐसी Hamari Sharirik Bhasha को अलग भाषा में देखा अथवा समझा जाता है। हमारे देश में इसका अर्थ “जीरो” से जुड़ा हुआ है। इसका प्रयोग कई रूपों में होता है। कोई बच्चा जब परीक्षा में फेल हो जाता है तो उसका मजाक उड़ाने के लिए उसके सामने इस इशारे को करके आंख मार देते हैं। कोई मुंह से कुछ नहीं बोलता, मगर वह लड़का झट से समझ जाता है कि यह “जीरो” का इशारा उसको चिढ़ाने के मकसद से किया जा रहा है।

मगर यह इशारा अमेरिका में 19वीं सदी से बहुत ही प्रसिद्ध और लोकप्रिय रहा है। जिसका अर्थ ok में लिया जाता है। ok का अर्थ है, सबकुछ ठीक-ठाक है। ok शब्द तो अब संसार में प्रसिद्ध हो चुका है। ok शब्द वास्तव में अंग्रेजी के ही एक शब्द All Correct का ही बिगड़ा हुआ रूप है, जिसे लोगों ने इस प्रकार से प्रयोग किया Oll Korrect वैसे पढ़ने में दोनों ही एक जैसे लगते हैं मगर ok. को उसी Oll Korrect के साथ जोड़ा गया है। यानी सब कुछ ठीक-ठाक है। यह इशारा बहुत से देशों में इसी प्रकार से प्रसिद्ध भी है और प्रचलित भी।

मगर एक बात और भी आश्चर्य की यह है कि पश्चिमी देशों भी जापान एक ऐसा देश है जहां पर भी इस इशारे का अर्थ “जीरो” ही है। इससे यह साफ हो जाता है कि बॉडी लेंगुएज की भाषा का हर देश में अलग-अलग अर्थ निकाला जाता है।

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