वास्तु शास्त्र का इतिहास

वास्तु शास्त्र इतिहास हिंदी

इतिहास की नजर में वास्तु शास्त्र

(History of Vastu Shastra)

वैसे तो भारतीय इतिहास में वास्तु शास्त्र और शिल्प पहले से ही मौजूद था लेकिन इस विद्या पर उस समय विशेष रूप से खोज की गई जिस समय भारत में आर्यो का आगमन हुआ था। ऋग्वेद से इस बात की जानकारी मिलती है कि हजारों वर्ष पहले भारत में खगोल व ज्योतिष शास्त्र की खोज एवं अध्ययन किया गया था। आदि काल से ही भारतीय ऋषि-मुनियों ने सिद्धांत, निवेश एवं संहिता पर गंभीर अध्ययन किया था। इन लोगों मे फलित ज्योतिष को विभिन्न भागों में बांटा था जिनमें एक वास्तुशास्त्र भी मुख्य है।




वास्तु शब्द का अर्थ

वास्तु शब्द ‘वस्तु’ से बना है और इस संसार में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य के लिए वस्तु की आवश्यकता होती है जो वास्तु के अंतर्गत आती है। परंतु ऋग्वेद में वास्तु का संबंध मकान निर्माण के लिए बताया गया है। वास्तुशास्त्र (Vastu Shastra) का उदय एवं संरचना सृष्टि के पंचभूततात्मक सिद्धांत पर आधारित है।

     कठोपनिषद में लिखा है कि इस संसार में निर्मित कोई भी वस्तु चाहे वह छोटी हो या बड़ी उसका निर्माण पंचतत्व से ही हुआ है। वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि मकान का निर्माण आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी तत्वों को प्राकृतिक स्रोतों से उपलब्ध कराया जाए।

श्रीमद भागवत गीता में लिखा है कि सम्पूर्ण कर्म वास्तव में प्रकृति के गुणों के द्वारा ही सम्पादित होते हैं।

history of vastu shastra in Hindi

ऋग्वेद के अनुसार वास्तु शास्त्र

     ऋग्वेद में मकान निर्माण के संबंध में उत्तम आदेशों का वर्णन किया गया है। उनमें एक स्थान पर सहस्र स्थलों के मकान का उल्लेख है। ईसा पूर्व से 150 ईस्वीं के लगभग हड़प्पा एवं मोहन जोदड़ो के नगरों की खोज से नगरों के जो अवशेष मिले हैं उनसे पता लगता है कि नगर के मकान कितने व्यवस्थित तरीक से बनवाए गए थे। वहीं कनिष्ककालीन बौद्ध स्तूप भी पाया गया। बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में अयोध्या नगर के बारे में मिली जानकारी से हमे वास्तुशास्त्र की उत्पत्ति के बारे में पता चलता है।

     मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त का पाटिलपुत्र नगर के बीच स्थित राजमहल विशालता और सुंदरता में सबसे बढ़कर था। महाभारत में देवशिल्प विश्वकर्मा द्वारा बनवाए गए राजमहल Vastu Shastra के अद्भुत उदाहरण थे।

     मुगलकालीन ताजमहल वास्तु शास्त्र का अनुपम उदाहरण है। दक्षिण भारत में स्थित भगवान वेंकटेश्वर तिरुपति का मंदिर वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों पर ही आधारित है। इसका प्रवेश द्वार पूर्व में एवं पानी का स्रोत उत्तर-पूर्व में है। यह मंदिर सबसे वैभवशाली माना गया है।

भारत और अन्य देशों में वास्तु शास्त्र

     भारत के अतिरिक्त अन्य देशों में भी वास्तुशास्त्र को अलग-अलग नामों से जानते हैं, उनकी भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार, हजारों वर्षों से प्रचलन में हैं तथा उनके अध्ययन से हमें यह आभास अवश्य होता है कि वायुमंडल में न दिखने वाली जो सूक्ष्म ऊर्जा है उसका ज्ञान उन सभी विद्वानों ने प्राप्त किया है जिन्हें भवन निर्माण में प्रयोग पर बल दिया गया क्योंकि हर देश की भौगोलिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं।

     चीन का सांस्कृतिक इतिहास भी बहुत पुराना और संभ्रात है। हजारों साल पहले इस बात की खोज की गई थी कि वायुमंडल में ऐसी तरंगें हैं जो इंसानी जीवन को प्रभावित करती हैं। इस बात की भी खोज की गई थी कि इन तरंगों में सकारात्मक और नकारात्मक चरित्र भी होते हैं।

     डेढ़ हजार साल तक भारत पर लगातार विदेशियों के आक्रमण होते गए जिससे लोक जीवन त्रस्त तो हुआ ही साथ-साथ अपनी पहचान बनाए रखने के लिए अधिक ध्यान दिया जाने लगा जिसके परिणाम स्वरूप हम अपनी प्राचीन विद्याओं को भूलते गए और आक्रांताओं की गुलामी से फंसते चले गए। उनकी कलाओं, भाषा और संस्कृति को अपनाने के लिए विवश होते गए। परंतु भारतीय जिजीविषा बहुत शक्तिशाली थी, उसने आक्रांत संस्कृतियों को भी अपने रंग में रंग लिया और एक नई मिली-जुली सभ्यता को जन्म दिया।

20वीं शताब्दी का वास्तु शास्त्र

     20वीं शताब्दी के अंतिम दशकों पर कुछ पश्चिमी विद्वानों का ध्यान भारतीय वास्तुशास्त्र की ओर गया तो वे दंग रह गए। तब उन्हें ज्ञान हुआ कि वास्तुशास्त्र और शिल्प की जितनी जानकारी भारतीय ग्रंथों में है उतनी कहीं भी नहीं है। जब उन्होंने भारतीय वास्तुशास्त्र की विशेषता अपनानी शुरु की तब हम फिर से वास्तु एवं कला की ओर अभिमुखी हुए। इसके बाद वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) भारतीय समाज में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान ले लिया।

वास्तु शास्त्र की सम्पूर्ण जानकारियां

  1. जीवन और वास्तुशास्त्र का संबंध
  2. जाने घर का सम्पूर्ण वास्तु शास्त्र
  3. घर, ऑफिस, धन, शिक्षा, स्वास्थ्य, संबंध और शादी के लिए वास्तु शास्त्र टिप्स
  4. वास्तु शास्त्र के आधारभूत नियम
  5. वास्तु शास्त्र के प्रमुख सिद्धान्त
  6. अंक एवं यंत्र वास्तु शास्त्र
  7. विभिन्न स्थान हेतु वास्तु शास्त्र के नियम एवं निदान
  8. वास्तु का व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव
  9. हिन्दू पंचांग अथार्त हिन्दू कैलेंडर क्या है?
  10. युग तथा वैदिक धर्म
  11. भारतीय ज्योतिष शास्त्र
  12. भवनों के लिए वास्तुकला

(This content has been written by Super Thirty India Group)

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