जन्मपत्री से जानिये जनम कुन्डली का ज्ञान

जन्मपत्री - horoscope by date of birth in hindi

जन्मपत्री क्यों बताती है जन्मकुंडली

किसी भी व्यक्ति की जन्मपत्री (Horoscope) को देखकर उस व्यक्ति के बिल्कुल सही जन्म समय पर आकाश में स्थित नक्षत्रों को देखकर ज्योतिषी की मदद से उसके जीवन में होने वाली घटनाओं के बारे में पता किया जा सकता है। किसी भी व्यक्ति की जन्मपत्री को बनाने के लिए चाहे वह स्त्री हो या फिर पुरुष यानी कि उसके लिंग, पैदा होने का समय, दिन, तारीख तथा उसके पैदा होने की जगह की जानकारी का होना बहुत ही ज्यादा जरुरी होता है। हिंदू और पश्चिमी राशियों में 22 डिग्री का अंतर होता है। इसका यह मतलब हुआ कि अगर हिंदू जन्मपत्री के अनुसार एक ग्रह 20 डिग्री कर्क राशि में स्थित है, तो पश्चिमी ज्योतिष (Western astrology) के आधार पर वह सिंह राशि की बारहवीं अथवा तेरहवीं डिग्री में होगा। यही वजह है कि हमें इन दोनों क्रियाओं को आपस में मिलाना नहीं चाहिए, इनमें से किसी एक को ही मानना चाहिए। हिंदू ज्योतिष (Hindu astrology) के आधार पर, साधारण उद्देश्य से भविष्यवाणी करने के लिए राशिचक्र और नवमास आरेख ही पर्याप्त होता है। जन्मपत्री के बारह घरों में मानव जीवन की सभी महत्वपूर्ण घटनाएं छिपी हुई होती है। जन्मपत्री के घर को संस्कृत भाषा में भाव कहा जाता है। यह जरुरी नहीं है कि जन्मपत्री के बारह घर अथवा भाव राशिचक्र (zodiac) के बारह निशानों में मिलते-जुलते हों। वे असलियत में परिवर्तनशील होते हैं। सभी निशान तीस डिग्री के फैलाव में होते हैं। लेकिन एक मकान अथवा भाव की लंबाई जन्म के समय और पैदा होने की जगह के अक्षांश पर ही निर्भर करती है।




     जन्मपत्री के बारे में अध्ययन करने तथा उसका निर्णय करके बताई गई बातों के बारे में पता लगाया जाता है जैसे किः- उसकी उम्र तथा मृत्यु, व्यक्ति का रंग-रूप और उसका दिमाग, स्वास्थ्य तथा रोग, उसकी पढ़ाई-लिखाई और आर्थिक संभावनाएं, उसकी शादी व उसकी संतान के बारे में, उसके जीवन का भरण-पोषण की जीविका चलाने के बारे में, माता-पिता तथा भाई, दुश्मन और ऋण, दुर्घटनाओं के होने का समय आदि। वास्तु शिल्प शास्त्र (Architectural craft) में विशेष तरीके से काम को शुरू करने का एक निश्चित समय का निर्णय करने, मकान के मुख्य गेट या दरवाजे और ग्रह प्रवेश समारोह आदि का समय निर्धारित करने के लिए बताई गई बातें बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है, ताकि इन कामों के लिए ऐसा समय अथवा मुहूर्त निकाला जाए, जिससे कि इसमें रहने वाले व्यक्ति संपन्न तथा सही तरीके से सुखपूर्वक रह सके।

जैसे किः- 8-8-1992 ईसवी सन् में भारत में 7.35 बजे शाम के समय पैदा होने वाले व्यक्ति की जन्मपत्री की राशि और नवमास आरेख इस तरह से होते हैं-

     मकान अथवा इमारत के बनाने के बारे में वह जमीन जिस व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत होती है, उसी की जन्मपत्री के आधार पर (उसके मकान या भवन के बारे में) सोचा जा सकता है।

वास्तु शास्त्र की सम्पूर्ण जानकारियां

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