आपका आलिंगन कैसे बचा सकता है, बच्चे को एग्जाम फोबिया से

Exam phobia

एग्जाम फोबिया (Exam Phobia) परीक्षार्थियों की बड़ी समस्यां बन हुई है। अब आप जानना चाहेंगे कि एग्जाम फोबिया  क्या होता है? इसको समझने के लिए सबसे पहले हमे फोबिया को जानना जरुरी है।

फोबिया क्या है?

जब किसी भी व्यक्ति के मन में किसी प्रकार के किसी चीज को लेकर डर लगा रहता है तो उस डर को फोबिया कहा जाता है। फिर चाहे व डर किसी अंधेरे से हो, अकेलेपन से हो, ऊंचाई से हो या परीक्षा और परीक्षा के रिजल्ट का हो । जब ये डर धीरे-धीरे दिल में घर बना लेता है तो इस बात का पता खुद उन्हें भी पता नहीं चलता जो इससे पीड़ित होते हैं।

एग्जाम फोबिया (Exam Phobia)

जब किसी छात्र को एग्जाम का डर सताने लगता है तो उसे Exam Phobia कहा जाता है। CBSE के परीक्षा जब नदीक आता है तो बहुत से छात्र डरे रहते हैं और सोचते रहते हैं कि परीक्षा की तैयारी कैसे की जाये, परीक्षा देने के बाद क्या रिजल्ट आयेगा। ऐसे में एग्जाम फोबिया से पीड़ित छात्रों के डर को अभिभावक ही निकाल सकते हैं। अभिभावक को चाहिए कि वे अपने बच्चों से ज्यादा उम्मीदें न लगाये, प्रदर्शन को लेकर डर उत्पन्न न करें और अपने बच्चों को प्यार से समझायें। बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाने की कोशिश करें। कहते हैं न जब मन में किसी चीज का डर नहीं होता और आत्मविश्वास उपर होता है तो पहाड़ों को गिराने की भी हौसला आ जाती है तो फिर एग्जाम क्या चीज है।

एग्जाम फोबिया (Exam Phobia) को समझाने के लिए आज मैं आपनी आपबीती आपके सामने प्रतुत करने जा रहा हूं। आशा है आपको पसंद आयेगी।

बात उन दिनों की हैं जब मैं दसवीं क्लास में पहली बार फेल हुआ था। फेल होने के बाद जब मैं घर जा रहा था तो मैं बहुत ही डरा, सहमा, शर्म और ग्लानि से भरा महसूस कर रहा था। उस समय मैं ही जानता था कि मेरे मन की दशा क्या है।

यह बात साल 2004 की है जब मैं 9वीं क्लास को पार करके 10वीं क्लास में गया था। क्लास में मेरी पहली ही बैच थी। मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। 10वीं क्लास में पड़ते हुए दिन कब गुजर गये और कब परीक्षा की घड़ी आ गई मुझे पता ही नहीं चला। मेरे सारे सहपाठियों की तरह मुझ पर भी एग्जाम का डर सता रहा था या यू कहिए मुझे भी ‘एग्जाम फोबिया’ (Exam Phobia) हो गया था। डर के मारे न तो मुझसे पढ़ाई अच्छी हुई और न ही पेपर अच्छे गये।

जब एग्जाम के नतीजे का दिन आया, तो मेरे पिता को पूर्वानुमान हो गया था इसलिए उन्होने मेरे बड़े भाई को मेरे साथ स्कूल भेजा। मार्कशीट मिली तो मैं 6 में से दो विषय गणित और अंग्रेजी में फेल हो गया था। इन विषय में मुझे इतने कम नम्बर मिले थे कि सरकार द्वारा तय किए 30 नम्बर के ‘ग्रेस मार्क्स’ भी कम पड़ जाए। मुझे एकमात्र ‘सुकून’ था कि मेरे कुछ दोस्त भी फेल हो गये थे।

पिता की अदालत में मुझे अपने बचाव के लिए मेरे पास बस इसी ‘तर्क’  का सहारा था कि सारे दोस्त फेल हो गए और मैं सप्लीमेंट्री का पात्र तो हूँ!

उस समय मेरे मन में हजारों सवाल चल रहे थे और सोच रहा था कि जब मै घर पहुंचेंगा तो पिता जी को कैसे कहुंगा और वे क्या पूछेंगे। मैं अपनी नाकामयाबी का दस्तावेज थामकर अपने भाई के साथ घर पहुंचा।

कहते हैं न कि माता-पिता तो अपने संतान की सूरत देखकर ही अंदाजा लगा लेते हैं कि क्या हुआ है और क्या नहीं। इसलिए मेरे पिताजी ने भी अंदाजा लगा लिया कि क्या हुआ है। उनके सामने मैं कुछ बोल न पाया और मैं बोलने लायक भी नहीं था। मेरे पिताजी भी समझ गये थे कि यह समय इसे कुछ बोलना ठीक नहीं है।

आप अवश्य जानना चाहेंगे कि इसके बाद क्या हुआ?  पिताजी ने अपनी जेब से 100 रुपये का नोट निकाला और बड़े भाई को दिया तथा कहा कि इसके साथ जाओ और इसे फ़िल्म दिखा लाओ।

तब मेरे भाई ने मुझे लेकर दिल्ली के एक मशहूर सिनेमा हौल पर एक कॉमेडी फिल्म दिखाई। फिल्म के इंटरवैल में भाई ने सैंडविच और पॉपकॉर्न खिलाया। इसके बाद जब हम घर वापस आये तो शाम को पाँच बजे मैने कुछ खाया। उस दिन ‘रिज़ल्ट फ़ोबिया’ ने भूख के गले पर छुरी जो चला रखी थी।

पिताजी के इस लाड प्यार के कारण मेरे में काफी बदलाव आ गया और उसके बाद मैं कभी भी फेल न हुआ। मेरे साथ साल दर साल बेहतर ही होता चला गाया।

Exam Phobia से बचने के लिए सुपर30 का सुझाव

इस कहानी पर रिसर्च करके हमें यही पता चला कि जब आपका बच्चा मायूस मुख घर आये और कहे कि पेपर अच्छा नहीं गया तो उसे कभी मत डाटियें बल्कि उसे प्यार से समझाइयें और उसके हौसले को बड़ाइये। क्योंकि ऐसे समय में बच्चे को आपकी सबसे ज्यादी जरूरत होती है।

आप उस समय को याद कीजिए जब वह पेपर देकर उछलता हुआ घर आया था और आपने उसे बाहों में भर लिया था इसलिए तब भी बाहों में भर लीजिए जब वह अपने बैग को फैंककर नहीं रखकर जूते उतारे। इस समय उसे आपके आलिंगन की ज्यादा जरुरत है।

जब बच्चों के परीक्षा के दिन आये तो अपने आलिंगनों की खुशबू को संभालकर रखिये क्योंकि इस समय आपको अपने बच्चे के लिए इसकी ज्यादा जरुरत पड़ेगी।

A great message for all parents.

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