कैसे दूर करें, जमीन वास्तु दोष

कैसे दूर करें जमीन वास्तु दोष - Vastu Tips in Hindi

जमीन पर मकान बनाने के लिए ज्योतिष शास्त्र

किसी भी तरह की जमीन पर मकान को बनाने से पहले उस जमीन के मालिक के योग के बारे में जानकारी जन्मपत्री के द्वारा किसी अच्छे तथा चतुर विद्वान ज्योतिष से करवाना बहुत ही अच्छा रहता है क्योंकि ऐसा करने से जमीन वास्तु दोष का पता चल जाता है। ज्योतिष के अनुसार ही व्यक्ति के जन्म, स्थान और जन्म स्थान के आधार पर ही ग्रहों की अवस्था को देखकर ही जन्मपत्री को बनाया जाता है। जन्मपत्री व्यक्ति के कर्मों की पूंजी मानी जाती है, अपने भाग्य को जानकर उसको अच्छा तथा उन्नतिशील बनाने के लिए समय, ग्रहों की अवस्था तथा कर्म आदि सभी तरह की सुविधाओं के बारे में अध्ययन करके व्यक्ति अच्छे कर्मों को करने में लग जाता है। इसलिए इस काम के लिए यह जरूरी हो जाता है कि जमीन को खरीदने एवं उसका मालिकाना हक पाने के लिए मकान को बनाने से पहले ही जन्मपत्रिका की मदद से अच्छी दशा व प्रश्न लग्न के आधार पर अच्छी जानकारी के प्राप्त हो जाने पर किसी भी तरह की कोई रूकावट पैदा नहीं होती है।

ज्योतिष शास्त्र के अंदर प्राचीन महाऋषियों ने ऐसे-ऐसे मुहूर्त और उसके योगों के बारे में जानकारी दी है, जिसके आधार पर जमीन को खरीदने तथा उसको बेचने के लिए मकान के मालिक के अच्छे समय के बारे में बताया गया है। जमीन को खरीदने तथा बेचने जैसे दोनों ही पक्षों की 5/6/10/11/15 तथा कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तारीखों में बृहस्पतिवार तथा शुक्रवार की मृगशिरा, पुनर्वसु, मघा, अनुराधा, आश्लेषा, विशाखा, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वा भाद्रपद, मूल तथा रेवती नक्षत्र व शुभ के खरीदने तथा बेचने के लिए इस तरह के समय को देखा जा सकता है।



जमीन वास्तु दोष का प्रभाव

कई बार देखा जाता है कि बहुत से व्यक्ति सही जानकारी के बगैर ही जमीन को खरीद लेते हैं तथा बेच देते हैं और इसके बारे में किसी भी तरह की नहीं सोचते हैं। इसके बाद इस तरह की जमीन में पैदा होने वाले हानिकारक परिणामों (जमीन वास्तु दोष) के मिलने पर पछताते रहते हैं। इस तरह के व्यक्ति अपनी जमीन तथा अपने मकान दोनों से ही परेशान रहने लगते हैं। इस तरह के व्यक्ति अपने मकान व जमीन दोनों का ही इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं और अपने मकान व जमीन में लगाई हुई कीमत के न मिल पाने पर पछताते रह जाते हैं। इन व्यक्तियों की जमीन तथा मकान की लागत मूल्य से भी कम कीमत पर भी कोई भी व्यक्ति इनकी जगह को नहीं खरीदता है। अधिकतर मकान तथा मकान के सुख के बारे में राशि तथा लग्न के चौथे भाव अथवा स्थान से किया जाता है जैसे-

  1. गुरु ग्रह की महादशा में बलवान शुक्र ग्रह केंद्र से युक्त होकर पांचवें अथवा ग्यारहवें भाव या स्थान में हो, तो जातक धर्मशाला, कुआं, तालाब तथा सिनेमाहाल आदि बनवा सकता है।
  2. चतुर्थेश बलवान होकर 1,4,7,10 स्थानों में अच्छे ग्रह से मिलकर बैठे हो अथवा चतुर्थेश जिस राशि में गया हो, उस राशि में नौवे अंश के स्वामी 1,4,7,10 स्थानों में बैठे हो, तो जातक को मकान का लाभ, सुख तथा जमीन वास्तु दोष के प्रभाव से छुटकारा मिल जाता है।
  3. चंद्रमा की महादशा, शुक्र ग्रह की महादशा में शुक्र ग्रह उच्च स्थान पर अथवा अपने भाग में होने पर नए मकान का निर्माण होता है तथा सातवां स्थान शुक्र ग्रह से युक्त हो तो व्यक्ति को इससे सुख-संपत्ति तथा मकान-खेत की बढ़ोतरी होती है।
  4. शनि ग्रह की महादशा में बलवान मंगल ग्रह की अंतर्दशा हो व मंगल ग्रह 1,4,5,9,10 स्थान में हो अथवा लग्नेश से मिला हो, तो नए मकान को बनाने का लाभ मिलता है।
  5. चौथे लग्न में गुरु ग्रह से युक्त या दृष्ट होने पर मंदिर को बनाने का सौभाग्य मिलता है।
  6. कारकांश कुंडली के चौथे स्थान में गुरु स्थित हो, तो मकान या भवन अच्छा माना जाता है और जमीन वास्तु दोष प्रभाव भी नहीं पड़ता।
  7. लग्नेश, धनेष और चतुर्थेश- इस तरह के तीनों ग्रहों में जिसके ग्रह 1,4,5,7,9,10 स्थानों में गए हो, तो जातक को उतनी ही संख्या में मकानों का मालिक बनने का सौभाग्य मिलता है तथा इसके साथ ही साथ नौ तथा ग्यारह घर के बारे में सोच-विचार करना चाहिए।
  8. जातक की जन्मकुंडली में चंद्र ग्रह, बुध ग्रह, गुरु (बृहस्पति ग्रह) ग्रह, शुक्र ग्रह की दृष्टि, अगर चौथे स्थान पर हो तो जातक को बाग-बगीचों का लाभ मिलता है तथा सुख प्राप्त होता है।
  9. चौथा भाव बुध ग्रह से युक्त अथवा दृष्ट होने पर जातक को बहुत बड़ा मकान तथा वैभवयुक्त मकान को बनाने का सुख तथा उसका अवसर प्राप्त होता है।
  10. जातक की कारकांश कुण्डली के चौथे स्थान में अगर सूर्य ग्रह हो, तो पर्ण, घास तथा फूल आदि का ग्रह सुख एवं मकान को बनाने का सुख योग मिलता है।



  11. लाभ स्थान का स्वामी चौथे मकान में स्थित हो तथा चतुर्थेश लाभ स्थान अथवा दसवें स्थान में गया हो तो जातक को धन के साथ ही मकान की प्राप्ति होती है।
  12. लग्नेश यदि चौथे भाव या चतुर्थेश लग्न में स्थित हो तो जातक को मकान का लाभ प्राप्त होता है।
  13. गुरु ग्रह की महादशा में मंगल ग्रह का अंतर एवं मंगल उच्च अथवा स्वग्रही 1,7,5,4,9,10वें भाव में हो, तो इस दशा में जमीन का लाभ, होटल, मिल आदि का निर्माण होता है।
  14. गुरु ग्रह की महादशा में शनि ग्रह का अन्तर हो, तो जमीन वास्तु दोष का प्रभाव नहीं पड़ता है।
  15. मंगल ग्रह की महादशा में शुक्र ग्रह की अन्तर हो व शुक्र ग्रह 1,4,5,9,10 भाव में उच्च त्रिकोणी अथवा दशमेश से युक्त हो तो तालाब, धर्मशाला तथा कुआं आदि बनवाने का कार्य जातक करता है।
  16. गुरु ग्रह की महादशा में गुरु ग्रह का अन्तर एवं गुरु ग्रह उच्च स्थान पर हो, तो जातक को जमीन तथा मकान को बनाने का योग प्राप्त होता है।
  17. बुध ग्रह के होने पर साधारण तथा साफ मकान के सुख का योग जातक को प्राप्त होता है।

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