झूठ बोलने की कला

Jhooth Bolane Ki kala

सच और झूठ के झगड़े भी बड़े अजीबो-गरीब होते हैं। बहुत से लोग इस दुनिया में झूठ बोलने को बहुत बड़ा पाप समझते हैं और बोलते हैं कि झूठ बोलोगे तो नर्क मिलेगा। लेकिन बदलते समय के साथ ही ऐसे लोगों की संख्या भी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जो झूठ बोलने को भी एक कला मानते हैं। उनके अनुसार इस संसार में झूठ बोले बिना कुछ हासिल नहीं हो सकता है। बस इसमें शर्त यह है कि आपक झूठ बोलने की कला आती हो अर्थात आपके द्वारा बोला जाने वाला झूठ ऐसा होना चाहिए कि सामने वाला उसे पूरी तरह से सच मान लें।

बहुत से लोग जाने-अनजाने में बड़ी मासूमियत से झूठ बोल जाते हैं और उनका झूठ छिपाने से भी नहीं छिपता, जिसके कारण वे दूसरे लोगों की नजरों में घृणा के पात्र बन जाते हैं। असल में उनका झूठ पकड़े जाने का कारण भी उनके चेहरे की मासूमियत ही होती है जो झूठ को छिपने नहीं देती। एक चालाक इंसान अपने द्वारा बोले जाने वाले हजारों झूठों को भी छिपा लेता है लेकिन एक भोला-भाला इंसान अपने एक झूठ को भी छिपाने में असफल हो जाता है।

असल में इसका कारण है उस मासूम व्यक्ति के हृदय से उठने वाले भाव। कुछ लोग तो अपने मन से उठने वाले भावों पर अपनी पकड़ को इतना मजबूत बना लेते हैं कि वे झूठ के भावों को सच के भावों के नीचे दबा लेते हैं। उनके मन के भाव जब चेहरे पर आते हैं तो हमें यह कहने पर मजबूर होना पड़ता है कि वे सच ही बोल रहे हैं।

इस चीज को सबसे बड़ा उदाहऱण देखना है तो किसी दिन कोर्ट में जाइये और देखिये कि एक वकील जो अपने क्लांइट को फांसी के तख्ते से बचाने के लिए अदालत में बहस कर रहा है। जबकि उसे यह पता है कि उसका क्लाइंट मुजरिम है औऱ उसने गुनाह किया है लेकिन इस पर भी वह उसे बचाने के लिए अदालत में दलीलें देता है।

इसके साथ-साथ वह भरी अदालत में सबसे सामने जोर-जोर चिल्लाकर कहता है- मेरा क्लाइंट निर्दोष है। इसे बिना वजह के फंसाया जा रहा है। इसके मासूम चेहरे को देखें जज साहब क्या यह किसी का खून कर सकता है। इसने आदमी तो क्या… आज तक एक कीड़ा भी नहीं मारा।” इस प्रकार की दलीलों के साथ ही उसके हाथ, आंखें और शरीर पूरे जोश के साथ काम करते हैं।

उसका बोलने का अंदाज ही ऐसा होता है कि सामने बैठे जज को भी एक बार सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि कहीं वह किसी बेगुनाह आदमी को तो फांसी की सजा देने नहीं जा रहे हैं।

वकील के जोश को देखकर यह मानना पड़ता है कि उसके बोलने का अंदाज ही उसको जीत दिला सकता है। उसकी सफलता के पीछे उसके शारीरिक अंगों का बहुत बड़ा हाथ होता है। उसके मन की भावनाएं जो उसे सफलता के द्वार पर ले जाना चाहती हैं वही भावनाएं उसके शारीरिक अंगों की भाषा अर्थात बॉडी लेंगुएज बनकर सामने बैठे जज और सरकारी वकील को प्रभावित करने का कारण बन जाती है। किसी भी सच को झूठ साबित करना, कोई साधारण कला नहीं है। इसमें तो इंसान का पूरा शरीर काम करता है।

झूठ हमारे कारोबार में एक अंग का रूप धारण करता जा रहा है। लोग झूठ बोलने के नये-नये तरीके निकाल रहे हैं। अच्छा झूठ बोलने वाले ही अपनी कमाई को बढ़ा रहे हैं। इस कार्य में उनके शारीरिक अंग ही उनका सहारा बनते हैं।

एक सफल कलाकार जो अपने अभिनय से लाखों लोगों के मन जीत लेता है, करोड़पति होते हुए भी एक भिखारी का रूप धारण करके उसके किरदार को इतनी सफाई से निभाता है कि हर कोई कुछ क्षणों तक यह मान लेता है कि वास्तव में ही वह एक भिखारी है।

भले ही हम उसके इस कार्य को उसकी कला का कमाल मानते हैं मगर इस कमाल का श्रेय तो उसकी बॉडी लेंगुएज को जाता है, जो उसकी नौटंकी को भी सच मानने पर मजबूर करती है। वह अपनी छवि से विपरीत बनकर अपने चेहरे पर ऐसे भाव पैदा कर लेता है जो उसके जीवन से कोसों दूर होते हैं।

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