प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारा ‘एक देश एक चुनाव’ अब मुमकिन नहीं

One Nation One Poll Election

नहीं होगा लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ (One Nation One Poll Election)

हिंदी समाचार (नई दिल्ली): कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक भाषण में यह कहा था कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ (One Nation One Poll Election) होना चाहिए। जिससे देश को बहुत बड़ा लाभ होगा। इसके अनेक फायदे है जैसे कि एक साथ चुनाव होने से देश का बहुत सारे रूपयों तथा समय का बचत होगा। जिसका फायदा हम देश के विकास में लगा सकते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री के इस नारे को सकार होने से पहले ही मुख्य चुनाव आयुक्त ने इसे साफ साफ नकार दिया और कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना मुमकिन नहीं है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह भी कहा कि दोनों चुनाव एक साथ (One Nation One Poll Election) इसलिए नहीं हो सकता कयोंकि इसमें बहुत सारे कानूनी समस्या है। चुनाव कराने से पहले हमें सभी कानूनी दावपेच को समझना होगा कि हमें क्या क्या मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है और इसको दूर करने के लिए क्या क्या कानून होने चाहिए। इसके लिए कानूनी ढांचागत व्यवस्था भी होनी जूरूरी है। बता दें कि केंद्र की भाजपा सरकार दोनो चुनाव एक साथ कराने के पक्ष में है जबकि विपक्ष इसके खिलाफ।

कुछ समाचार सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दोनो चुनाव को एक साथ कराने के लिए यह कहा था कि हमें एक साथ व्यापक बहस करने की जरूरत है और करना चाहिए कि देश के हित के लिए दोनों चुनाव एक साथ हो। उधर दूसरी तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त (ओपी रावत) ने यह कहा कि देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए लीगल फ्रेमवर्क पर काफी काम करने की जरूरत है।

चुनाव आयोग की तरफ से यह स्पष्टीकरण भी आया है कि इस साल के अंत तक होने वाले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम विधानसभा चुनाव को अगले साल अप्रैल-मई तक टाला जा सके ताकि इसे अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ ही कराया जा सकें। बता दें कि मिजोरम विधानसभा का कार्यकाल 15 दिसंबर को समाप्त हो रहा है और जबकि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा 5 जनवरी, 7 जनवरी और 20 जनवरी को समाप्त हो रहा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से साफ साफ यह स्पष्ट हो चुका है कि अब One Nation One Poll Election कराने का कोई चांस ही नहीं । चनाव आयुक्त ने स्पष्टीकरण में यह भा कहा कि हमारे पास केवल 400 का स्टॉफ है और लोकसभा चुनाव के दौरान 1.11 करोड़ लोगों की ड्यूटी लगाई जाती है।

कुछ पत्रकारों ने इवीएम पर उठे सवाल का जवाब भी चुनाव आयोग से पूछा तो चुनाव आयोग कि ओर से यह कहा गया कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन अथार्त इवीएम मशीन खराब होने की शिकायत कोई चिंताजनक नहीं है। हमें केवल 0.5 से 0.6 प्रतिशत मशीनें खराब होने की शिकायत मिली है। इतनी तकनीक खराबी तो आम मशीन में भी कभी कभी आ जाती है। इसको दुरस्त किया जा सकता है।

कुछ पत्रकारों ने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि आज के समय में वोटर वेरीफाइड पेपर ट्रेल मशीनों का इस्तेमाल काफी हो गया है तो क्या इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि राजनीतिक दबाव है कि इन मशीनों का शत प्रतिशत मतदान केंद्रों पर स्तेमाल हो, चनाव आयोग इसके लिए प्रयास कर रही है।

अब कभी हद तक यह स्थिति साफ हो चुकी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होना मुमकिन नहीं है।

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