क्या बॉडी लेंगुएज को समझने में भूल हो सकती है?

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अब आम आदमी के मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि क्या हमारी बॉडी लेंगुएज (Body Language) का हर इशारा ठीक ही होता है?

ऐसे कई सवाल हमारी बॉडी लेंगुएज ज्ञान में और भी उठ खड़े होंगे क्योंकि जो भाषा लिखी नहीं जाती, पढ़ी नहीं जाती केवल शारीरिक अंगों द्वारा ही समझी जा सकती है, तो उसमें कई बार संदेह पैदा हो ही सकता है।

कोई न कोई आदमी जरा-सी भूल करके बड़े से बड़ा नुकसान उठा सकता है इसलिए हमें बॉडी लेंगुएज के ज्ञान को बहुत गहराई से जानना होगा।

जब भी आप अपने सामने खड़े किसी व्यक्ति की बॉडी लेंगुएज पढ़ना चाहते हैं तो उसके लिए यह देखना होगा कि जो व्यक्ति आपके सामने खड़ा है, यदि वह झूठ बोल रहा है तो उसके होंठों पर हल्की सी हंसी की लकीर फूटती है, इस हंसी में फीकापन होता है और व्यक्ति की आंखों की पुतलियां उस हंसी के साथ घूमती हैं और उसके होंठ कुछ धीरे-धीरे इस प्रकार हिलते हैं, जैसे कांप रहे हों।

Understanding body language

आंखों और भौंहों में कुछ तनाव सा आ जाता है, यदि यह सभी लक्षण उस व्यक्ति में प्रकट होते हैं तो समझ लें कि वह आदमी झूठ बोल रहा है मगर उसके झूठ बोलने का अंदाज कुछ ऐसा है कि वह आपको अपनी इस फीकी हंसी के जाल में फंसा लेना चाहता है।

आपने, अक्सर उन नेताओं को देखा होगा, जो जन-सभाओं में भाषण करते हैं। लम्बे-लम्बे हाथ मारकर, आम जनता की भावनाओं को भड़काने के लिए ऐसे भावुक शब्दों का प्रयोग करते हैं कि सुनने-वाला एक बार तो यह सोचने पर मजबूर हो जाता है, कि वास्तव में ही वह जननेता है जो जनता के लिए अपना सब कुछ त्याग देने के लिए तैयार है।

जरा ध्यान करें और सोचें कि कोई भी व्यक्ति जो अपने चुनाव प्रचार में लाखों रुपये खर्च कर रहा है, उसमें जन-सेवा की भावना तो जरूर होगी क्योंकि उसे आपसे वोट लेकर ही चुनाव जीतना है, मगर वह जनसेवक नहीं हो सकता।

जो भाषा वह बोल रहा है अथवा उसके चेहरे की लाली, आंखों की पुतलियां, हाथों का जोर-जोर से हवा में हिलाना। यह सब उसके मन की भावनाओं का ही तो कमाल है मगर वह इस समय बोल नहीं रहा, बल्कि आपकी भावनाओं से खिलवाड़ करके अपना उल्लू सीधा करना चाहता है, उसकी भाषा में सच्चाई कम और नौटंकी अधिक है।

मगर साधारण लोग उसकी इन भावनात्मक शैली के जाल में फंस जाते हैं। वे नहीं जानते कि यह झूठ बोल रहा है क्योंकि उसने अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों को शारीरिक अंगों द्वारा इस तरह से कहा है कि आप इस बात को मानने पर मजबूर हो जाते हैं।

“भाइयों। मैं आपका सेवक हूं। आपके दुख मेरे दुख हैं। आप मुझे इस बार वोट देकर देखें तो में जनता के सारे दुख दूर कर दूंगा। हर एक के लिए काम, हर एक के लिए घर, महंगाई को दूर करना, आपकी इच्छाओं की पूर्ति करना, जब तक सब काम पूरे नहीं करवा दूंगा, तब तक मैं एक पल के लिए भी चैन से बैठना पसंद नहीं करूंगा। आज मुझे अपने देश की जनता की बुरी हालत देखकर बहुत दुख हो रहा है।

यह कहकर वह सचमुच ही रोने लगता है। यह अलग बात है कि उसके यह आंसू धोखा होते हैं मगर वह आपके सामने इस अंदाज से रोने लगता है कि आप यह मानने पर मजबूर हो जाएंगे कि उसे आपसे दिली हमदर्दी है। वह आपके दुखों पर ही आंसू बहा रहा है।

वास्तव में यह भी एक बॉडी लेंगुएज का अंग है मगर इस पूरी भाषा को पूरी तरह सच नहीं कहा जा सकता, इस भाषा में भी धोखे हो सकते हैं। कई लोग दूसरों को मूर्ख बनाने के लिए इसका सहारा लेते हैं। वैसे भी इस आधुनिक युग में झूठ बोलना एक कला बनता जा रहा है।

ऐसे मौकों पर हमें अपने विवेक का सहारा लेते हुए अपनी आत्मशक्ति का प्रयोग करना होगा। हमें अपने सामने खड़े व्यक्ति के चेहरे के भाव देखकर उसके दिल से उठने वाली भावनाओं की भाषा को पढ़ना होगा। वह अपना मुंह कैसे खोलता है? उसकी आंखों की पुतलियां कैसे नाच रही हैं? उसकी भौंहे कैसे तनी है? यह सब कुछ आपको उस समय पता चलेगा, जब आप बॉडी लेंगुएज का ज्ञान प्राप्त कर लेंगे अन्यथा आप लोगों के धोखे का शिकार होते रहेंगे।

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