पुलिस भर्ती परीक्षा में आरक्षण के नियमों की अनदेखी

यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में आरक्षण के नियमों की अनदेखी को लेकर उम्मीदवारों ने धरना प्रदर्शन किया

यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा: 2013 बैच के उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने नियुक्त न होने के कारण जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के बार धरना दिया

2013 में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने लखनऊ में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर धरना दिया, जिसमें दावा किया गया कि 2013 बैच के उम्मीदवार भी नियुक्त किए गए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। “छह साल हो गए हैं लेकिन हमें अभी तक नियुक्त नहीं किया गया है। यहां तक ​​कि 2018 बैच के उम्मीदवारों को भी नियुक्त किया गया है। अगर हमारी मांगों को नहीं सुना गया तो हम आत्महत्या कर लेंगे” शुक्रवार को विरोध प्रदर्शनों में से एक ने कहा। कुछ पत्रकारों ने इन से सम्पर्क किया और इस सब के बारे में पुछताछ किया तो पता चला कि इन्होने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से संपर्क किया है लेकिन इसका भी फायदा नहीं हुआ।

कुछ विरोध करने वाले लोगों ने आत्महत्या करने की धमकी दी है क्योंकि उनके पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उम्मीदवारों ने धरना प्रदर्शन करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग भी की कि इस मामले में हस्तक्षेप कर हमें न्याय दिलायें।

“हमने उच्च न्यायालय में केस जीता था। अदालत ने कहा कि हमें नियुक्ति पत्र दिए गए हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हमने राज्य के गृह सचिव, मुख्यमंत्री और डीजी-यूपी पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड से मुलाकात की है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।” आत्महत्या करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है, राष्ट्रपति को भी इसके बारे में पत्र लिखा है लेकिन अभी कोई हल नहीं आया है।

पुलिस भर्ती परीक्षा में आरक्षण के नियमों की अनदेखी हुई

पुलिस भर्ती परीक्षा 2013 बैच के एक उम्मीदवार ने कई पत्रकारों से बातचीत किया और कहा कि पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से साल-2013 में सिपाही भर्ती की गई थी। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों की काफी अनदेखी की गई थी। इसी वजह से हमें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

Translate »
error: Content is protected !!