Vaastu Shastra Baathroom

स्नानघर

(बाथरूम- BATHROOM)

किसी भी मकान में जिस प्रकार अन्य कमरों का महत्व होता है उस प्रकार बाथरूम का भी अपना महत्व होता है। वास्तुशास्त्र (Vastu Shastra) में स्नानघर (बाथरूम) का संबंध जलतत्व से माना गया है। शास्त्रों में जल को धन का प्रतीक माना गया है। वास्तुशास्त्रियों का मानना है कि यदि नल खुला रह जाए और उससे पानी निकलता रहे तो इससे धन की हानि होती है। वास्तुशास्त्र के अनुसार बाथरूम ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहां पानी का बहाव हमे

Vastu Shastra

शा होता रहे। विद्वानों का मानना है कि यदि स्नानघर वास्तुशास्त्र के अनुसार बनाया जाए तो घर-परिवार में आर्थिक संपन्नता लाई जा सकती है। बाथरूम उत्तर दिशा में बनवाना शुभ होता है। यदि इसका निर्माण आग्नेय कोण में किया जाए तो परिवार में आर्थिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। बाथरूम का दरवाजा अन्य कमरों के दरवाजे से छोटा होना चाहिए क्योंकि इस कमरे का बड़ा दरवाजा होना परिवार में खर्च को बढ़ाने वाला होता है।

स्नानघर के लिए वास्तुनियम-

Vaastu principles for a bathroom-

  • वास्तुशास्त्र के अनुसार स्नानघर नैऋत्य कोण से दक्षिण दिशा की ओर या नैऋत्य कोण से पश्चिम दिशा की ओर बनवाना चाहिए या फिर पूर्व दिशा में बनवाना चाहिए।
  • बाथरूम से सटा एवं रसोईघर के पास एक कपड़े एवं बर्तन धोने का स्थान बनवाना शुभ माना जाता है।
  • स्नानघर में नहाने की व्यवस्था ईशान कोण, उत्तर दिशा या पूर्व दिशा में होना चाहिए।
  • बाथरूम और शौचालय हमेशा अलग-अलग होने चाहिए लेकिन स्थान के अभाव में या अन्य कारण से शौचालय उसमें बनवाना ही पड़े तो उसे पश्चिम दिशा में या उत्तर-पश्चिम के बीच वायव्य कोण में बनवाना चाहिए।
  • बाथरूम का फर्श बनवाते समय उसका ढलान पूरव या उत्तर दिशा में होनी चाहिए।
  • स्नानघर में गीजर, हीटर एवं अन्य बिजली के उपकरण दक्षिण-पूर्व के बीच आग्नेय कोण में रखना शुभ होता है।
  • बाथरूम में बाथटब पूर्व, उत्तर या ईशान कोण में रखना Vastu Shastra के अनुकूल शुभ माना जाता है।
  • वास्तुशास्त्र के अनुसार स्नानघर का दरवाजा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • स्नानघर की दीवारों का रंग हल्का होना चाहिए जैसे- सफेद, हल्का नीला, आसमानी आदि।

स्नानघर का दरवाजा-

वास्तु के अनुसार स्नानघर में लगा दरवाजा पूरी तरह से खुलना चाहिए यदि स्नानघर में लगे नल, फव्वारे, वाशबेसिन आदि के कारण दरवाजा पूरी तरह नहीं खुलता हो तो ’ची’ ऊर्जा के प्रवाह के लिए स्नानघर के अंदर व बाहर दर्पण लगवा देने चाहिए। स्नानघर का दरवाजा बनाते समय ध्यान रखें कि उसका दरवाजा छोटा होना अच्छा होता है लेकिन इतना छोटा न हो कि वास्तुदोष उत्पन्न हो।

स्नानघर के फव्वारे-

वास्तुशास्त्र में स्नानघर में फव्वारे का बड़ा महत्व बताया गया है। इसे लगवाते समय ध्यान रखना चाहिए कि इस फव्वारे में नहाते समय खिड़की से बाहर का नजारा दिखाई दे। इस लिए फव्वारा लगवाते समय इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि फव्वारे खिड़की के नीचे न हो।

किसी भी बाथरूम में टब का खिड़की के नीचे होना समस्या उत्पन्न करने वाला एवं वास्तुदोष पैदा करने वाला होता है। यदि खिड़की के नीचे टब लगा हो तो इस वास्तुदोष को दूर करने के लिए खिड़की के सामने एक दर्पण लगवाना चाहिए। इससे खिड़की से आने वाला प्रकाश दर्पण से टकराकर स्नानघर में पूरी तरह फैल जाएगा और वास्तुदोष दूर हो जाएगा।Vaastu Shastra Tip for your home

स्नानघर का दरवाजा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि स्नान करते समय यदि कोई अचानक आ जाए तो शारीरिक ’ची’ ऊर्जा प्रभावित होती है और मन अशांत हो जाता है। टब लगवाते समय ध्यान रखें कि वह गोल या अंडाकार हो। कुछ विद्वानों का मानना है कि गोल या अंडाकर टब सिक्कों का सूचक होता है जिसमें भरा पानी धन संचय को सूचित करता है। ऐसा टब संपन्नता का भी सूचक माना गया है।

कैबिन का महत्व-

स्नानघर में कैबिन का अलग ही महत्व होता है। इसमें अलमारी सामान्य होनी चाहिए। कैबिन का रंग प्राकृतिक हो तो अच्छा माना जाता है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार स्नान के लिए इस्तेमाल होने वाले शैंपू, साबुन, तेल आदि को व्यवस्थित तरीके से रखना चाहिए क्योंकि इन चीजों के अस्त-व्यस्त होने से हानिकारक प्रभाव पड़ता है। ऐसी चीजों जिसके इस्तेमाल करते समय ध्वनि निकलती हो वे चीजें अधिक वास्तुदोष उत्पन्न करती है अतः इस समस्या को दूर करने के लिए स्नान के समय उपयोग होने वाली वस्तुओं को सीमित मात्रा में तथा अलमारी में व्यवस्थित तरीके से रखकर ही उपयोग करना चाहिए।

साज-सजावट-

वास्तुशास्त्र के अनुसार बाथरूम में हमेशा हल्के या सफेद रंग का इस्तेमाल करना चाहिए। स्नानघर में फर्श पर टाइल्स लगवानी चाहिए लेकिन टाइल्स लगवाते समय यह ध्यान रखें कि वह ठंडी न हों क्योंकि इससे बाथरूम में मौजूद ऊर्जा प्रभावित होती है। इसके कारण व्यक्ति के सामने आर्थिक समस्या पैदा हो जाती है। इस तरह की समस्या को दूर करने के लिए स्नानघर के दरवाजे पर वाटरप्रूफ चिक लगवाना चाहिए।

प्रकाश व दर्पण-

वास्तुशास्त्रियों के अनुसार बाथरूम में लैंप या अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे शॉटसर्किट होने की संभावना रहती है। स्नानघर में छत या दीवार पर लगी लाइट ही पर्याप्त होती है। स्नानघर में प्लेन शीशों का ही इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि यह उस कमरे में आने वाली ऊर्जा शक्ति को बिखरने नहीं देता है। बाथरूम का निर्माण इस प्रकार होना चाहिए कि उसमें भरपूर्ण प्रकाश आनी चाहिए इससे स्नान के बाद शरीर में ऊर्जा एवं स्फूर्ति आती है।

स्नान करते समय संगीत-

आमतौर पर नल से निकलने वाले पानी की आवाज ही इतनी प्रभावशाली होती है कि स्नान घर में अन्य कोई ध्वनि सिस्टम की व्यवस्था करने की आवश्यकता ही नहीं होती लेकिन फिर भी इसमें घंटी लगाना वास्तुशास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार उचित रहता है। स्नानघर में घंटी की आवाज आत्मिक अनुभूति देने के साथ-साथ भविष्य संबंधी दोषों को भी दूर करने में सक्षम होती है।

यदि स्नानघर में पूर्व दिशा की ओर घंटी लगाई जाए तो इससे मन में संतुष्टि एवं आशा की भावना पैदा होती है। दक्षिण दिशा में घंटी लगाना उचित नहीं माना जाता है क्योंकि यह दिशा आग्नेय प्रधान है जो जल की विरोधी होती है।

गर्मी के मौसम में शाम के समय स्नान करते समय हल्की आवाज में संगीत सुनना लाभप्रद होता है। इससे मन को शांति एवं सुकून मिलता है। सुबह के समय स्नान करते समय संगीत सुनने से व्यक्ति पूरे दिन तरोताजा महसूस करता है।

स्नानघर में पौधे-

बाथरूम में पौधे लगाने के मामले में सतर्कता बरतनी चाहिए। स्नान घर में नम वातावरण वाले पौधों का उपयोग करना चाहिए। यदि व्यक्ति उत्साह व ज्ञान वृद्धि चाहता हो तो स्नान घर में पौधे उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखने चाहिए। जीवन में आशावान बनने के लिए पौधे पूर्व दिशा में रखने चाहिए।

स्नानघर में रंगों का प्रयोग-

स्नानघर की दक्षिण से पूर्व दिशा में जामुनी रंग का रैक लगवाना चाहिए और उसमें ब्रश, तौलिया आदि रखने चाहिए, इससे धन एवं कलात्मक गुणों में वृद्धि होती है। टूथ ब्रश को रखने वाला होल्डर अगर गुलाबी हो तो इससे रिश्तों में मजबूती पैदा होती है। यह जीवन में शांतिदायक भी होता है।

विशेष- यदि कोई व्यक्ति आर्थिक समस्याओं से ग्रस्त हो या धन का उचित उपयोग न हो पा रहा हो तो बाथरूम इस दोष को दूर करने में उपयोगी सिद्ध होता है। यदि ऐसा व्यक्ति अपना बाथरूम अधिक बड़ा बनवाए तो इन समस्याओं का समाधान हो सकता है। स्नानघर यदि छोटा या संकरा हो तो दीवार पर दर्पण लगाकर खुलेपन का अहसास किया जा सकता है साथ ही इससे शुभ प्रभाव भी उत्पन्न किया जा सकता है।

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