Vastu Dosh Nivaran

Vastu Dosh Nivaran: मकान अथवा जमीन के दोषों की शांति के लिए उपाय

वास्तु दोष निवारण (Vastu Dosh Nivaran, Upay, Puja ): व्यापार करने के लिए सबसे जरूरी होता है कि व्यवसायी अपने अच्छे तथा मीठे स्वभाव की मदद से अपने व्यवसाय को बढ़ाने में निपुण हो। व्यापारी का स्वभाव भी इतना कमजोर नहीं होना चाहिए कि वह सब कुछ नष्ट कर दे तथा इतना सख्त भी भी नहीं होना चाहिए कि ग्राहक उससे मिलने से घबराने लगे। किसी भी तरह के व्यापार को करने के लिए व्यावहारिक स्वभाव अच्छा होना मूलमंत्र माना गया है। व्यापार में अच्छे स्वभाव से धन की प्राप्ति होती है तथा उस स्थान पर धन की देवी लक्ष्मी का वास होता है तथा यश का फैलाव होता है। जिससे बहुत ही ज्यादा सुख की प्राप्ति होती है।

व्यापारी का अच्छा स्वभाव ही संसार का सबसे बड़ा सुख माना जाता है, स्वभाव ही व्यापार का मूलमंत्र है। इसलिए व्यापार करने के लिए स्वभाव बहुत ही अच्छा तथा मीठा होना चाहिए। व्यावसायी का स्वभाव इस तरह का होना चाहिए कि वह रोजाना के समय अपने आने वाले ग्राहकों को अपनी तरफ लुभा सकें।

सभी व्यक्ति इस तरह की उम्मीदों को रखते हैं कि व्यापार तथा व्यवसायी समाज का एक विशेष हिस्सा होता है तथा व्यापार एक तरह से लक्ष्मीवान होता है। एक भिखारी भी किसी व्यापारी की दुकान पर अपनी इन उम्मीदों को लेकर जाता है कि उसको उस दुकानदार से कुछ न कुछ तो मिल ही जाएगा। इसलिए हर दुकानदार को चाहिए कि हर मांगने वाले भिखारी के साथ हमेशा ही नम्र स्वभाव रखे, किसी को भी डांट-फटकार लगाकर नहीं भगाए। माना कि भिखारी मानव समाज में एक तरह से कलंक तथा अभिशाप है और उसे मानव समाज से दूर करने का हम सबको मिल करके प्रयास करना चाहिए। लेकिन इसके बाद भी मांगने वाले भिखारी के साथ बहुत ही नम्र स्वभाव ही दिखाना चाहिए। उनको दुत्कारना नहीं चाहिए।




दिखाया जा रहा सिद्ध बीसा यंत्र पनरिये की शक्ति से बना हुआ है, जिससे जगदंबा मां के बने नर्वाण मंत्र की शक्ति भी मिली हुई है। इस मंत्र को यदि अपने व्यापारिक दुकान की दहलीज या उसकी चौखट के ऊपर लगाया जाए तो किसी की भी बुरी नजर दुकान पर नहीं पड़ती है। किसी का भी श्राप या बददुआ भी इस मंत्र पर प्रभाव नहीं डाल सकते हैं। एक तरह से देखा जाए तो यह मंत्र दुकान को बुरी नजर से बचाने के लिए दुकान का सुरक्षा कवच है। इस कवच को शुद्ध या पवित्र धातु में प्राण प्रतिष्ठा करके रखें, तो बुरे व्यक्तियों की नजर से दुकान का बचाव होता है।

अपने व्यापार करने की जगह पर तथा अपनी दुकान पर श्रीगणेश जी महाराज की मूर्ति को अवश्य ही लगवाना चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान अवश्य ही रखना चाहिए कि इस मूर्ति को कभी-भी दक्षिण दिशा की तरफ नहीं रखना चाहिए। पूज्नीय गणेश जी महाराज को हमेशा ही दुकान के धन वाले गल्ले में विराजमान करना चाहिए।

हमेशा ही अपनी व्यापार करने की दुकान तथा कार्यालय एवं गद्दी आदि में अपने कुल देवता व अपने इष्ट देवता आदि की तस्वीरों को लगाना चाहिए। शिक्षा देने वाले तथा सही रास्ते को बताने वाले अपने गुरु देव की तस्वीर को भी जरूर लगाना चाहिए। दुकानदारों को भी हमेशा इस तरह से करना चाहिए कि उन्हें अपनी दुकान को रोजाना खोलते समय सुबह के वक्त में अपने इष्ट देवता और अपने कुल देवताओं को श्रद्धापूर्वक नमस्कार करने के बाद ही अपनी-अपनी दुकानों को खोलना चाहिए। दुकान में प्रतिष्ठापित देवी-देवताओं की फूलों की माला, धूप तथा दीपक आदि से पूजा-अर्चना करना अच्छा होता है।

दुकानदार को पूजा करते समय मन से, बोली से तथा कर्म से श्रद्धा प्रकट करनी चाहिए। व्यक्ति की आत्मा में शुद्ध तथा पवित्र भाव होगें, तो काम-धंधे (व्यापार) में बढोतरी होती चली जाती है तथा व्यक्ति में पक्के विश्वास की शक्ति का भी प्रसार होता है।

व्यक्ति का यह जीवन खुद के जीने के लिए ही नहीं होता है, बल्कि सारे संसार के लिए होता है। इसलिए दुकानदार या व्यापारी को इस तरह से चाहिए कि वह अपने व्यापार से जो विशुद्ध लाभ मिलता है, उसमें से कुछ भाग को धर्म के काम में भी लगाना चाहिए। किसी भी तरह के सार्वजनिक काम या मानव की सेवा के लिए अपनी कमाई का कुछ हिस्सा दान में देता रहें। इस तरह से करने से व्यक्ति को आत्मसुख, जगकल्याण तथा कीर्ति में बढोतरी होती है और व्यापार में भी लाभ भी होता रहता है।

अपने व्यापार में से ईमानदारी की कमाई का छठे भाग या दसवें भाग को धर्म के काम में लगाते रहना चाहिए। ऐसा करने से बहुत ज्यादा धन की बढ़ोतरी भी होती रहेगी और व्यापार में भी तरक्की होती रहेगी। धर्म का काम करने से प्राणी मात्र का कल्याण भी होता रहेगा।

दृष्टिदोषनिवारार्थ विपणोद्वारस्तम्भयोः।

जम्बीरं स्थापयेत सम्यक मरीचीद्वयसंयुतम।।

Vastu Dosh Nivaran: कभी-कभी व्यापारिक उन्नति अचानक ही हो जाती है तथा धन-संपति की भी बढो़तरी होती रहती है। इस तरह की बढोतरी का होना कई व्यक्तियों के दिल में सहन नहीं होता है। होड़ तथा द्वेष की भावना को रखने वाले को इससे जलन होने लगती है। कभी-कभी बुरी नजर के पड़ने से व्यापार की गति में कमी आ जाती है। इसी बाधा को ही किसी की नजर का लग जाना कहा जाता है। इसलिए सभी तरह के व्यापारियों को अपने-अपने प्रतिष्ठान के गेट के पास अपनी दुकान, कार्यालय के बाहरी खंभों पर नींबू व सात हरी मिर्चों को बांधना चाहिए। नींबू तथा मिर्चों को ऐसे स्थान पर लगाना चाहिए, जहां पर की सबकी निगाहें जा सकें।

व्यापारे संभवेद हानिः कृत्ते यत्ने निरन्तरम।

इन्द्राणीयन्त्रमास्थाप्यं विधिवद वास्तुविद धृतम।।

यह इन्द्राणी यंत्र भी बीसा यंत्र की ही एक मानवीकरण है।

अगर व्यापारिक नजर की दिशा से तथा अलग-अलग तरह से प्रयास करने से भी नुकसान होता रहता है तो व्यापार करने वाले को चाहिए कि वास्तुशास्त्र के जानकारों से इस बारे में सलाह लेकर, इंद्राणि यंत्र को प्रतिष्ठापित करके स्थापित करवाना चाहिए, जिससे कि लगातार होने वाले नुकसान को दूर किया जा सके तथा इससे बचा जा सकें।

चौरी संजायते भू यश्चाग्निदाहो थवा भवते।

स्थाप्य तत् वास्तुविद सिद्धं भौमयन्त्रं विधानतः।।

Vastu Dosh Nivaran: दुकान, आफिस आदि में चोरी हो रही हो, नौकरों के द्वारा किसी चीज या धन को चुरा लेना या फिर अपने ग्राहकों के द्वारा बगैर पैसे दिए किसी वस्तु को दी जा रही हों या दुकान पर चोरों के द्वारा किसी वस्तु को चुराने की कोशिश की जा रही हों तो वास्तुशास्त्र के जानकार से ठीक जगह के बारे में जानकारी लेकर ही भौमयंत्र की विधि-विधान से स्थापना करनी चाहिए। अगर दुकान में आग लगने का शक हो, तो जमीन में भौमयंत्र को लगाना चाहिए। ऐसे यंत्र को पूर्व-उत्तर की दिशा में या फिर पूर्व की दिशा में लगा सकते हैं। जमीन से नीचे दो फीट गहरे गड़ढें को खोद करके पूरी तरह से विधि-विधान करके इसको स्थापित करना चाहिए।

अगर किसी भी व्यापारी का अपनी दुकान में बैठने का मन न करता हो, दुकान में या फिर गल्ले में किसी भी तरह की बढ़ोतरी न हो रही हो, रूपया-पैसा तो लगातार आ रहा हो लेकिन बचत बिल्कुल भी न हो पा रही हो, तो व्यवसाई को दुकान की चौखट या दुकान के मुख्य गेट की चौखट के ऊपर आगे तथा पीछे की तरफ गणेश जी भगवान की मूर्ति को स्थापित करना चाहिए। कहते हैं कि गणेश जी भगवान की आखों में अमृत होता है पर कमर या पीठ में गरीबी होती है। कई व्यापारियों के यहां पर सिर्फ घर के बाहर की तरफ ही गणेश जी भगवान ही लगे होते हैं। इस तरह की तस्वीर या मूर्ति आने वाले व्यक्ति या ग्राहक का कल्याण करती है, मकान के मालिक का नहीं क्योंकि घर के अंदर तो गणेश जी भगवान की निगाह (नजर) नहीं पड़ रही है। इसलिए हम यहां पर यह कहना चाहते हैं कि गणेश जी भगवान की मूर्ति को घर तथा दुकान में मुख्य गेट के ऊपर अंदर तथा बाहर की तरफ लगवाना चाहिए। फिर इसके बाद इसके होने वाले प्रभाव पर ध्यान देना चाहिए।

अगर सफेद रंग के गणेश जी भगवान के साथ ही चांदी का श्रीयंत्र (सिक्के की तरह का) भी दुकान तथा घर के मुख्य गेट पर स्थापित कर दिया जाए अथवा दीवार में गाड़ दिया जाए तो इससे बहुत ही अच्छा लाभ तेज गति से मिलता चला जाता है। उस दुकान या घर में लक्ष्मी व गणेश जी भगवान दोनों की दया की दृष्टि बनी रहती है।

अगर दुकान, आफिस या गद्दी आदि पर सूरज की रोशनी में रूकावट या बाधा भी हो रही हों या फिर स्थापना करते समय नीच का सूरज हो तो उस दुकान में हमेशा लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं। जब व्यापार करने वाले दुकानदार भी नीच राशि के सूरज से प्रभावित हों, तो इस तरह की अवस्था में व्यापारिक लाभ के होने पर भी परेशानियां आने लगती है।

अगर दुकान का मुख सही दिशा में नहीं हों या फिर सार्वजनिक लड़ाई-झगड़ें जैसे- आंदोलन, दंगा-फसाद, असामाजिक व्यक्तियों के द्वारा किया गया बलगाव आदि या फिर गुस्से की स्थिति, आग आदि को लगाना या लूटपाट आदि में सब कुछ बर्बाद होने की अवस्था बनी रहती है तो यमकीलक यंत्र की स्थापना करनी चाहिए, जिससे कि कालदोष को दूर किया जा सके।

राजकीया विपत्तिश्चेत कदाचिद विपणौ पतेत।

सूर्ययंत्र तु संस्थाप्यं सर्वाविघ्न-निवारकम।।

अगर सरकारी तंत्र के द्वारा बार-बार परेशान किया जा रहा हो या और दूसरी किसी वजह से राजकीय परेशानियां आ रही तो इस तरह की अवस्था में सभी भी तरह की समस्याओं को दूर करने वाले सूर्य यंत्र की स्थापना करनी चाहिए।

अगर व्यापार में लाभ होने के बाद भी मन में किसी तरह का सुकून न मिलता हो तथा लड़ाई-झगड़े होते रहते हो या फिर हिस्सेदारों के बीच में लड़ाई-झगड़े की अवस्था बन जाती हों तो इस तरह की अवस्था के होने पर दुकान अथवा किसी भी तरह के प्रतिष्ठान में श्रीलक्ष्मी सहस्त्रनाम के पाठ को करवाना चाहिए। सम्यक की तरक्की के लिए लक्ष्मी मां, गणेश जी भगवान, स्वास्तिक, ओम, कुबेर, मछली, क्रास, 786 आदि शुभ तरह के निशानों को अपनी दुकान अथवा अपने प्रतिष्ठान के मुख्य गेट पर लगाना (स्थापित) चाहिए। हमेशा पूजा करने की जगह उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में ही होनी चाहिए तथा पूजन उत्तर-पश्चिम दिशा या उत्तर दिशा, पूर्व-उत्तर की दिशा की तरफ ही बैठकर करना चाहिए। अगर पानी पीना हो, तो अपने मुंह को उत्तर-पूर्व की दिशा की तरफ ही करके पीएं, तो अच्छा माना जाता है। खाना खाते समय हमेशा ही अपने मुंह को पूर्व दिशा की तरफ ही करके भोजन करना चाहिए। सोते समय दक्षिण दिशा में अपने सिरहाने को रखकर ही सोना वास्तुशास्त्र के अनुसार अच्छा माना जाता है। अगर किसी के मकान में दक्षिणत-पश्चिम दिशा की तरफ ज्यादा दरवाजे तथा खिड़कियां आदि हों, तो वास्तुशास्त्र के दोषों (Vastu Dosh Nivaran) के अनुसार उनको बंद करवा सकते हैं।

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