वास्तु शास्त्र के प्रमुख सिद्धान्त

वास्तु शास्त्र के प्रमुख सिद्धान्त - Vastu Principles

वास्तु के प्रमुख सिद्धान्त

किसी भी मकान को बनाने के लिए जमीन का चुनाव करते समय वास्तु शास्त्र को अपनाना बहुत ही जरूरी होता है। वास्तु शास्त्र (vastu shastra) का मकान के प्रवेश करने के लिए बहुत ही व्यापक विज्ञान है, जिससे मकान की नींव से लेकर, चौखट चढाने एवं उपयोग के आधार पर सभी कमरों के लिए अलग-अलग तरह के नियम बनाए गए हैं जैसे कि- मकान को बनवाते समय चिनाई कैसी करनी चाहिए, चिनाई करने वाला कारीगर किस तरह का होना चाहिए, दरवाजे किस जगह पर लगवाने चाहिए तथा मकान की रूप-रेखा किस तरह से बनवानी चाहिए, आदि। लेकिन आज के समय की महंगाई को देखकर इन सभी तरह की बातों को ठीक तरह से अपनाना बहुत ही मुश्किल काम है, इसलिए वास्तु शास्त्र के व्यावहारिक प्रमुख सिद्धान्तों (Vastu Principles) को हम इस अध्याय के माध्यम से बता रहे हैं-




वास्तु शास्त्र के अनुसार घर कैसे बनवायें

खुली जगह-

  • मकान बनवाते समय उसकी योजना बनाते वक्त मकान के चारों तरफ खुली जगह रखना बहुत ही जरूरी होता है।
  • मकान को बनवाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पूर्व दिशा की तरफ खुली जगह ज्यादा रखनी चाहिए, जिससे कि सूर्योदय के समय सूर्य की रोशनी ज्यादा से ज्यादा मकान के अंदर आ सके तथा पूर्व दिशा की बजाय दक्षिण दिशा में कम खुले स्थान को छोड़ना चाहिए।
  •  यदि आप दो मंजिल के मकान को बनवाने जा रहे हैं तो पूर्व दिशा की तरफ एवं उत्तर दिशा में मकान की ऊंचाई कम ही होनी चाहिए।
  • मकान को बनवाते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मकान में उत्तर दिशा एवं पूर्व दिशा की तरफ खुली छत को रखना अच्छा होता है।
  • मकान में उत्तर-पूर्व दिशा में दरवाजे एवं मकान की खिड़कियां ज्यादा होनी चाहिए तथा उन्हें बराबर की संख्या में ही होना चाहिए, जैसे- दो, चार, छः, आठ आदि। लेकिन इस बात का ध्यान रखे कि आखिरी की संख्या शून्य पर नहीं आनी चाहिए जैसे- दस, बीस. तीस आदि।
  • मकान को बनवाते समय उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ की चार दीवारी को नीची ही रखनी चाहिए।
  • मकान के अंदर पश्चिम दिशा एवं दक्षिण दिशा की तरफ खिड़कियां हो सके तो कम ही लगवानी चाहिए।
  • मकान को बनवाते समय दक्षिण दिशा एवं पश्चिम दिशा में दीवारें मोटी बनवानी चाहिए।
  • मकान बनवाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मकान के मुख्य गेट पर शुभ मंगल का निशान अवश्य ही होना चाहिए जैसे कि- ओम, स्वास्तिक तथा गणेश आदि।

मुख्य तथा प्रवेशगेट- vastu shastra के अनुसार मकान बनवाते समय मकान का मुख्य दरवाजा (गेट) मकान के मुख्य रास्ते की अवस्था पर निर्भर करता है, लेकिन वास्तु-सिद्धान्त (Vastu Principles) के अनुसार मुख्य दरवाजे की स्थिति निम्नलिखित सही होती है जैसे-

  • अगर जमीन पूर्व दिशा के मुख की तरफ है तो उस मकान का मुख्य गेट उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में बहुत ही शुभ जाना जाता है, क्योंकि उत्तर-पूर्व को पूर्व दिशा में सबसे शुभ माना जाता है।
  • अगर मकान दक्षिण दिशा के मुख्य रास्ते पर मौजूद है, तो मुख्य द्वार दक्षिण-पूर्व की दक्षिण दिशा की तरफ होना चाहिए। मुख्य द्वार दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ नहीं होना चाहिए।
  • अगर मकान पश्चिम दिशा के रास्ते पर स्थित है तो अंदर प्रवेश करने का मुख्य दरवाजा या गेट पश्चिम दिशा में या उत्तर-पश्चिम में पश्चिम दिशा की तरफ ही होना चाहिए। अगर मकान के अंदर जाने का मुख्य गेट या दरवाजा दक्षिण-पश्चिम दिशा में होगा, तो उस घर के मालिक को बहुत अधिक नुकसान होता रहेगा।
  • अगर मकान उत्तर दिशा की तरफ बना हुआ हो, तो उस मकान के अंदर जाने का मुख्य दरवाजा या गेट उत्तर-पूर्व दिशा में उत्तर दिशा की तरफ ही होना चाहिए क्योंकि उत्तर दिशा के दरवाजा का स्थान अच्छा होता है।
  • उत्तर-पूर्व वाली जमीन पर मकान बनवाते समय उत्तर दिशा में उत्तर-पूर्व की तरफ ही गेट बनवाना शुभ माना जाता है तथा इस गेट का रास्ता उत्तर-पूर्व में पूर्व दिशा की तरफ भी बनवाया जा सकता है।
  • उत्तर-पश्चिम दिशा की जमीन पर मकान का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ ही होना चाहिए।
  • जिनके मकान की जमीन दक्षिण-पूर्व वाली हो, तो उनको अपने मकान के अंदर जाने का मुख्य गेट या दरवाजा दक्षिण दिशा में दक्षिण-पूर्व दिशा की तरफ ही बनवाना चाहिए।
  • जमीन अगर उत्तर-पूर्व की हो, तो उस मकान का मुख्य द्वार उत्तर-पूर्व में पूर्व की तरफ ही होना चाहिए।
  • दक्षिण-पश्चिम की जमीन वाली जगह में मकान के अंदर जाने का मुख्य गेट उत्तर-पश्चिम दिशा में पश्चिम दिशा की तरफ ही बनवाना चाहिए।
  • जिनके मकान की जमीन दक्षिण-पूर्व की हो, तो उस मकान का मुख्य दरवाजा उत्तर-पूर्व की पूर्व दिशा में ही बनवाना अच्छा होता है।
  • किसी भी मकान में जाने के लिए उसका मुख्य द्वार ही महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए मुख्य गेट को बनवाते समय वास्तु-सिद्धान्त (Vastu Principles) को ध्यान में ही रखकर बनवाना चाहिए।
  • अगर मकान पूर्व दिशा के मुख की तरफ हो, तो उनको अपने मकान का मुख्य गेट (मेन गेट) उत्तर-पूर्व में पूर्व दिशा की तरफ ही स्थापित करवाना चाहिए।
  • उत्तर दिशा के मुख की तरफ के मकान में मुख्य दरवाजा उत्तर-पूर्व दिशा में उत्तर दिशा की तरफ ही बनवाना चाहिए।
  • पश्चिम दिशा के जमीन वाले मकान के अंदर जाने का मुख्य दरवाजा उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ ही होना चाहिए।
  • जिनका मकान दक्षिण दिशा की तरफ हो, उनको मकान में अंदर जाने का प्रमुख दरवाजा या गेट पूर्व दिशा में उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ ही बनवाना चाहिए।
  • जिनका मकान उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ हो, तो उनके मकान में जाने का मुख्य प्रवेश गेट पूर्व दिशा या उत्तर-पूर्व दिशा में बनवाना बहुत ही शुभ माना जाता है।
  • दक्षिण-पश्चिम दिशा वाले मकान में जाने का मुख्य रास्ता पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में या फिर दक्षिण में दक्षिण-पूर्व दिशा में होना अच्छा समझा जाता है।
  • ऐसे मकान जो दक्षिण-पूर्व दिशा में बने हुए हो, तो इन मकानों का मुख्य रास्ता या मेन गेट दक्षिण दिशा में दक्षिण-पूर्व दिशा में हो, तो यह बहुत अच्छा माना जाता है।
  • उत्तर-पूर्व वाले मकान में अगर रास्ता उत्तर या पूर्व दिशा में है, तो उस मकान का मुख्य गेट (बाहर निकलने का रास्ता) उत्तर-पूर्व दिशा में पूर्व दिशा की तरफ ही बनवाना अच्छा होता है।
  • उत्तर-पश्चिम दिशा वाले मकानों में बाहर निकलने का रास्ता उत्तर दिशा और पश्चिम दिशा की तरफ हैं, तो उस मकान का मुख्य रास्ता उत्तर-पूर्व दिशा में उत्तर दिशा की तरफ होना वास्तु-सिद्धान्त (Vastu Principles) के अनुसार शुभ माना गया है।
  • दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ के जो मकान होते हैं उनका मुख्य रास्ता अगर दक्षिण दिशा और पश्चिम दिशा की तरफ है, तो उनको अपने मकान का मुख्य गेट उत्तर-पश्चिम दिशा में पश्चिम दिशा की तरफ बनवाना चाहिए।
  • अगर पूर्व-पश्चिम दिशा की तरफ मकान बना हो और उनका मुख्य द्वार भी दक्षिण दिशा या पूर्व दिशा में बना हुआ हो, तो उनको अपना मेनद्वार उत्तर-पूर्व दिशा में पूर्व दिशा की तरफ बनवा लेना चाहिए।
  • मकान के मुख्य गेट को बनवाते समय अच्छे लग्न या अच्छे मुहूर्त (समय) को ही देखकर बनवाना चाहिए।
  • अगर मकान का मेनद्वार वास्तु के कम चौड़ाई वाले भाग में हो, तो ऐसे द्वार बहुत ही अच्छे तथा लाभदायक माने जाते हैं।
  • कभी-भी उल्टी दिशा में मकान का मुख्य दरवाजा या गेट नहीं बनवाना चाहिए, इस तरह से बनवाना नुकसानदायक होता है तथा इसे शुभ नहीं माना जाता है।
  • मकान बनवाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मकान का मुख्यद्वार हमेशा मकान के अंदर की तरफ ही खुलना चाहिए और अगर दरवाजा दो पल्लों में बंटा हों, तो यह बहुत ही अच्छा तथा लाभकारी माना जाता है।
  • मुख्य गेट के दरवाजे एक समान कोण में ही बने होने चाहिए।
    मकान में मेन गेट के दरवाजे इस तरह के होने चाहिए कि वे न ही खुद खुले और न हीं अपने आप बंद हो।मुख्य गेट के दरवाजे खुलते समय व बंद करते समय किसी भी तरह की आवाज नहीं करनी चाहिए।
  • एक के ऊपर दूसरा दरवाजा नहीं रखना चाहिए और अगर रखना भी पड़े तो ऊपर के दरवाजे की थोड़ी सी ऊंचाई को कम कर लेना चाहिए।
  • मकान के अंदर जितने भी दरवाजे या खिड़कियां लगी हों, तो उन सभी की लंबाईं एक समान ऊंचाई तक ही होनी चाहिए तथा इनकी संख्या भी एक समान ही होनी चाहिए।
  • मकान को बनवाते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मकान की चारदीवारी दक्षिण दिशा तथा पश्चिम दिशा में मोटी एवं ऊंची ही होनी चाहिए।
  • मकान के अंदर पूजा करने का कमरा या पूजा करने की जगह उत्तर-पूर्व की दिशा में होना बहुत ही अच्छा माना जाता है।
  • रसोईघर दक्षिण-पूर्व की दिशा में होना उत्तम बताया गया है तथा इस तरह का होना आरामदायक न हों, तो ऱसोईघर को उत्तर-पश्चिम दिशा के क्षेत्र में भी बनाया जा सकता है
  • मकान को बनवाते समय इस बात का भी प्रमुख महत्व है कि मकान में सोने का कमरा नैऋत्य दिशा से आग्नेय दिशा व नैऋत्य दिशा से वायव्य दिशा की तरफ बनाना बहुत ही उत्तम माना जाता है। मकान मालिक के बड़े-बुजुर्गों के सोने का कमरा मालिक के कमरे से पश्चिम दिशा या दक्षिण दिशा की तरफ ही बनवाएं तो अच्छा होगा। अपनी उम्र से छोटे भाईयों एवं अपनी बेटों के सोने का कमरा मालिक के सोने के कमरे से पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की तरफ बनवाना बहुत ही शुभ समझा जाता है।
  • मकान बनवाते समय अपनी पुत्रियों के सोने का कमरा उत्तर-पश्चिम दिशा के भाग में होना चाहिए।
  • vastu shastra के सिद्धान्तों के अनुसार घर में आने वाले रिश्तेदारों या मेहमानों के सोने का कमरा उत्तर-पश्चिम दिशा के क्षेत्र में ही होना चाहिए।
  • मकान में मौज-मस्ती (मनोंरजन) करने वाले कमरे दक्षिण दिशा की तरफ या फिर पश्चिम दिशा की तरफ ही बनवाने चाहिए।
  • दक्षिण-पूर्व दिशा के पास में हमेशा ही संगीत, डांस या साधना आदि के कमरे का होना अच्छा होता है।मकान की छत पर पानी की टंकी हमेशा उत्तर-पश्चिम दिशा में अच्छी रहती है, लेकिन इस पानी की टंकी की ऊंचाई दक्षिण-पश्चिम दिशा के क्षेत्र के मकान की ऊंचाई से ज्यादा ऊंची नहीं होनी चाहिए।
  • नए मकान में कभी-भी पानी की टंकी को दक्षिण-पश्चिम दिशा के क्षेत्र में नहीं बनवाना चाहिए।
  • मकान में काम करने वाले नौकरों के रहने का कमरा दक्षिण-पूर्व दिशा या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनवाना बहुत ही अच्छा माना जाता है तथा उसकी दीवारें अपने मुख्य मकान के उत्तर-पूर्व की दीवारों को नहीं छूनी चाहिए।
  • मकान में सफाई (सेप्टिक) वाले टैंक को उत्तर-पश्चिम दिशा या दक्षिण-पूर्व की दिशा में बनवाना अच्छा होता है।
    मकान की जमीन के नीचे पानी की टंकी उत्तर-पूर्व की दिशा में बनवाना अच्छी मानी जाती है तथा पानी की टंकियां उत्तर-पूर्व दिशा में जमीन के ऊपर नहीं बनवानी चाहिए।
  • मकान में सीढ़ियों को बनवाते समय इस बात का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है कि ये सीढ़ियां पूर्व दिशा एवं उत्तर दिशा में कम्पाउंड की दीवार के समीप से जाती हुई नहीं बनवानी चाहिए। ऊपर की तरफ जाती हुई सीढ़ियों का मंडप दक्षिण-पश्चिम दिशा के क्षेत्र के निर्माण से ज्यादा ऊंचाई पर नहीं होना चाहिए।
  • पश्चिम एवं दक्षिण कम्पाउंड दीवार के पास सीढ़ियों को बनाया जा सकता है।
  • मकान को बनवाते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मकान में नई बनाने वाली वस्तुओं का ही इस्तेमाल करना चाहिए, पुरानी वस्तुओं को प्रयोग में नहीं लाना चाहिए।
  • मकान के पास चारदीवारी के अंदर बगीचा हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनवाना उचित होता है। ज्यादा घने तथा ज्यादा ऊंचे पेड़ों या वृक्षों को इस तरह नहीं लगाना चाहिए, लताओं आदि को ज्यादा से ज्यादा इस तरफ लगाना चाहिए।
  • बगीचे में सदा ऊंचे व घने पेड़ों या वृक्षों को दक्षिण दिशा और पश्चिम दिशा के भाग में लगाना ज्यादा फायदेमंद या लाभकारी होता है।
    जिन मकानों के अंदर सूर्य के उदय होने की रोशनी एवं शुद्ध हवा नहीं आती हों, ऐसे मकान अच्छे नहीं माने जाते हैं।
  • वास्तु-विज्ञान के अंदर ईशान (उत्तर-पूर्व) की दिशा के क्षेत्र को सबसे पवित्र तथा शुद्ध माना जाता है। इसलिए इस क्षेत्र को सब तरह से शुद्ध या पवित्र रखना बहुत ही जरूरी होता है तथा चाहें तो इस भाग को खाली भी रख सकते हैं। इस बात को भी कई बार देखा गया है कि इस तरह के भाग को शुद्ध या पवित्र न रखने पर मकान के सदस्यों को मानसिक चिंता, पैसों की कमी तथा शरीर के रोग होते रहते हैं।




पोर्टिको-

  • अगर आपकी जमीन पूर्व दिशा में या उत्तर-पूर्व दिशा में है, तो पोर्टिको को उत्तर-पूर्व दिशा में पूर्व की तरफ बनवाएं, पोर्टिको को दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा में नहीं बनवाना चाहिए।
  • अगर जमीन उत्तर दिशा की तरफ है तो पोर्टिको को उत्तर-पूर्व की दिशा की तरफ ही रखना चाहिए।अगर उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ जमीन है तो पोर्टिको को पश्चिम दिशा में तथा उत्तर-पश्चिम दिशा में ही बनवाना चाहिए।
  • अगर जमीन पश्चिम दिशा की तरफ है, तो पोर्टिको को उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ तथा पश्चिम दिशा की तरफ ही बनवाना चाहिए।
  • अगर दक्षिण दिशा की तरफ जमीन हो, तो दक्षिण-पूर्व की दिशा की तरफ दक्षिण दिशा में पोर्टिको को रखना चाहिए।
  •  जमीन यदि दक्षिण-पूर्व की तरफ हो, तो दक्षिण-पूर्व की दिशा की तरफ पोर्टिको को बनवाना अच्छा होता है।
  • अगर जमीन पूर्व दिशा में हों और इसका रास्ता उत्तर-पूर्व की दिशा में हो, तो पोर्टिको को हमेशा उत्तर-पूर्व की दिशा में ही बनवाना अच्छा होता हैं तथा पोर्टिको को पूर्व दिशा में बनवा सकते हैं।
  • अगर जमीन उत्तर-पूर्व की दिशा में हो और उसका रास्ता उत्तर दिशा में या पूर्व दिशा में हो, तो उत्तर-पूर्व दिशा में पूर्व दिशा की तरफ पोर्टिको को बनवा सकते हैं तथा उत्तर दिशा में उत्तर-पूर्व की दिशा में भी पोर्टिको को रख सकते हैं।
  • अगर रास्ता उत्तर दिशा या पश्चिम दिशा में हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा के मकान में उत्तर-पूर्व दिशा में उत्तर दिशा की तरफ पोर्टिको को बनवाना चाहिए।
  • उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ पोर्टिकों को अपनी जरूरत के अनुसार भी बनवा सकते हैं।
  • ड्रेनेज (परनाला/मोरी) पानी एवं मैल आदि के निकलने का स्थान-मकान का निर्माण करते समय घर मे परनाला (ड्रेनेज पाइप लाइन) को सही जगह पर बनाना भी बहुत ही जरूरी होता है, क्योंकि मकान में इस्तेमाल करने वाले पानी या जल में रूकावट होने पर मकान के अंदर सीलन आदि के होने का खतरा बना रहता है और इसी की वजह से घर के सदस्यों को कई तरह के रोग भी हो जाते हैं। इसलिए हमेशा मकान को बनवाते समय गंदे पानी के मोरी की लाइन को बहुत ही सुव्यवस्थित तरीके से सही दिशा में बनवाना चाहिए। अगर नगर निगम की पहले से ही मोरी की लाइन बनी हुई है तो उस लाइन से ही सही ढाल को जोड़ना सही होता है, वर्ना इसके आधार पर ही ड्रेनेज लाइन को बनवाने के बारे में सोचना चाहिए, लेकिन पाइप लाइन सही रास्ते की दिशा पर ही आधारित होगी-
  • जिनका मकान पूर्व दिशा में हो, उनको पानी की निकासी के लिए पाइप लाइन को उत्तर-पूर्व की दिशा में पूर्व दिशा में बनवाना अच्छा होता है।
  • अगर मकान उत्तर दिशा में हो तो उनको उत्तर दिशा में उत्तर-पूर्व की तरफ पानी को निकालने के लिए पाइप लाइन को बनवाना चाहिए।
  • दक्षिण दिशा की तरफ अगर मकान बना हो, तो दक्षिण-पूर्व दिशा में दक्षिण दिशा की तरफ ही पानी को निकालने के लिए पाइप लाइन को बनवाएं।
  • जिनका मकान पश्चिम दिशा में हों, उनको पानी को निकालने के लिए पाइप लाइन को पश्चिम दिशा की तरफ उत्तर-पश्चिम दिशा में ही बनानी चाहिए।

गैरिज-

  • गैरिज की जगह सदा ही मकान के नौकरों के क्वार्टर (रहने के स्थान) की तरफ ही बनवाना अच्छा माना जाता है।
  • अगर किसी की जमीन पूर्व दिशा की तरफ हो, तो उनको गाड़ी खड़ी करने का गैराज दक्षिण-पूर्व की पूर्व दिशा में ही बनवाना चाहिए।
  • vastu shastra के अनुसार उत्तर दिशा की तरफ यदि जमीन हो, तो उनको अपना गैराज उत्तर-पश्चिम दिशा में उत्तर दिशा की तरफ ही बनवाना चाहिए।
  • अगर जमीन पश्चिम दिशा की तरफ बनी हुई हो, तो अपनी गाड़ी खड़ी करने के लिए गैरिज को दक्षिण-पश्चिम दिशा की जगह में पश्चिम दिशा की तरफ ही बनाना चाहिए।
  • अगर जमीन दक्षिण दिशा की तरफ हो, तो उनको अपना गैराज दक्षिण-पश्चिम दिशा में पश्चिम दिशा की तरफ ही बनवाना चाहिए।
  • ऊपर बताए गए Vastu Principles के अनुसार ही गैरिज बनवाना चाहिए। गैरिज को बनाना उसके रास्ते की स्थिति पर भी निर्भर होता है।
  • बॉलकनी के बनवाने का स्थान किस जगह पर होना चाहिए- रहने वाले मकानों में बॉलकनी का स्थान बहुत ही महत्व रखता है क्योंकि सुबह के समय उठते वक्त सूर्य की किरणें एवं कुदरती वायु खिड़कियों के साथ ही साथ बॉलकनी से ही प्राप्त की जा सकती है। इसलिए वास्तुनियमों के आधार पर बॉलकनी को बनाने में निम्नलिखित तरीके से उपयोग करना चाहिए जैसे-
  • अगर जमीन पूर्व दिशा की तरफ है तो बॉलकनी को दक्षिण-पूर्व की दिशा में नहीं बनवाना चाहिए, बल्कि उसे उत्तर-पूर्व की पूर्व दिशा में ही बनवाना चाहिए।
  • उत्तर दिशा की तरफ वाली जमीन में बॉलकनी उत्तर-पूर्व की दिशा में उत्तर दिशा की तरफ ही बनवाएं।
  • मकान में बॉलकनी को उत्तर-पश्चिम दिशा में उत्तर दिशा की तरफ ही बनवाना चाहिए।
  • जिनकी जमीन पश्चिम दिशा में हो, उनको अपने मकान में बॉलकनी उत्तर-पश्चिम दिशा में पश्चिम दिशा की तरफ ही बनवाएं तो अति उत्तम होगा।
  • दक्षिण की तरफ की जमीन वालों को अपने मकान की बॉलकनी दक्षिण-पूर्व दिशा में दक्षिण दिशा की तरफ ही बनवानी चाहिए।
  • मकान में बॉलकनी को बनवाना जमीन की दिशा पर ही निर्भर होता है, लेकिन इस तरह की कोशिश करनी चाहिए कि सुबह के समय में सूरज की किरणों का आगमन एवं कुदरती वायु का बहाव मकान में होता रहे।
  • पहाड़ों का महत्व- मकानों को बनवाते समय मनुष्य के जीवन में पहाड़ों का भी अपना अलग महत्व होता है जैसे-
  • अगर जमीन के दक्षिण दिशा में पहाड़ भी हो, तो इससे बहुत ही अच्छे लाभ प्राप्त होते हैं।
  • अगर जमीन की पश्चिम दिशा में पहाड़ या बड़ी चट्टानें भी हों, तो इससे भी बहुत ही अच्छे लाभ मिलते हैं।
  • अगर मकान के उत्तर-पूर्व की दिशा में पहाड़ नजर आते हों, तो इन पहाड़ों को नुकसानदायक माना जाता है।

साधारण वास्तुनियम-

  • vastu shastra के अनुसार जिन मकानों में उत्तर दिशा की तरफ कमरे बने हुए हो, उस मकान में दक्षिण दिशा में बनने वाले कमरों का आकार कुछ बड़ा होना चाहिए।
  • पश्चिम दिशा की तरफ बनाए जाने वाले कमरों का आकार, पूर्व दिशा की तरफ बनने वाले कमरों के आकार से कुछ छोटे ही होना चाहिए।
  • नए मकान में या किसी भी मकान में बिजली का मीटर दक्षिण-पूर्व दिशा में लगवाना अच्छा होता है।
  • कारखानों वाली जगहों पर बिजली की लाइन का खंभा दक्षिण-पूर्व की दिशा में ही होना चाहिए।
  • दक्षिण दिशा में बंद बरामदा बनवाना चाहिए।
  • इसी प्रकार से पश्चिम दिशा में ग्रिल से लगे बरामदा को नहीं बनवाना चाहिए।
  • मकान में दक्षिण-पूर्व दिशा में, उत्तर-पश्चिम दिशा में तथा दक्षिण-पश्चिम दिशा में बने हुए कमरों में रसोईघर को बनाया जा सकता है।
  • उत्तर-पूर्व की दिशा के कमरों में रसोईघर को बनाने के काम में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। परंतु कई वास्तु शास्त्र (vastu shastra) इस तरह की दिशा में भी रसोईघर को बनाने के लिए सुझाव भी देते हैं।
  • उत्तर-पूर्व की दिशा के कमरों में भी स्टोर रूम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • मकान में कभी-भी उत्तर-पूर्व की दिशा में ऊपर जाने के लिए जीने या सीढ़ियों को बनवाना अच्छा नहीं होता है।
  • उत्तर-पूर्व की तरफ के कमरों में शौचालय आदि को बहुत ही ध्यान से बनवाना उचित माना गया है।
  • जिनके कमरे दक्षिण-पश्चिम दिशा में बने हुए हों, उनको वह कमरा बच्चों के सोने के कमरे के रूप में प्रयोग करना चाहिए।
  • दक्षिण-पूर्व की तरफ बने हुए कमरों को मकान के मालिक के सोने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • जिनके मकानों में कमरे दक्षिण-पश्चिम की दिशा में बने हुए हों, उन कमरों को भी सोने के लिए प्रयोग में ला सकते हैं।
  • दक्षिण दिशा की तरफ बने हुए कमरों को भी बच्चों के सोने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • जिनके मकानों में कमरे पश्चिम दिशा की तरफ बने हों, उन कमरों को भी सोने के कमरे के रूप में प्रयोग कर सकते हैं।
  • उत्तर-पश्चिम की दिशा के कमरों को भी सोने (आराम) के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • रहने वाले मकानों के अलावा कारखानों या फैक्ट्रियों को (भागों) भी वास्तु शास्त्र (vastu shastra) के सिद्धान्तों के अनुसार इनकों बनवाने से बहुत ही अच्छे लाभ प्राप्त होते हैं।
  • आफिसों में अलग-अलग स्तर (पद) के अधिकारियों एवं काम करने वाले व्यक्तियों के बैठने की जगह भी यदि वास्तु शास्त्र के सिद्धान्तों के अनुसार ही हो, तो इससे बहुत ही अच्छे लाभ मिलते हैं।
  • सोने के कमरे में पलंग या चारपाई हमेशा दक्षिणी दिशा की दीवार से मिली हुई ही होनी चाहिए। रात को सोते समय सिरहाना दक्षिण दिशा की तरफ तथा पैर हमेशा उत्तर दिशा की तरफ होना अच्छा माना जाता है।
  • सोने के पंलग या चारपाई के सिरहाने को चाहो, तो पूर्व दिशा की तरफ भी कर सकते हैं।
  • मकान के अंदर प्रवेश करने वाले मुख्य द्वार या गेट के सामने की तरफ बहुत ही खुबसूरत व मर्यादित तस्वीर होनी चाहिए।
  • ड्राईंग रूम में सोफे पश्चिमी दिशा की दीवार के सहारे व दीवान (पंलग) आदि दक्षिण दिशा की दीवार के सहारे रखना बहुत ही अच्छा माना जाता है।
  • आग्नेय कोणों के अनुसार मकान में रसोईघर का प्लेटफार्म दक्षिण-पूर्व की दिशा में होना चाहिए तथा गैस के सिलेन्डर को रखने के लिए भी यह जगह सबसे अच्छी जगह बताई गई है।
  • मकान में गहनें-जवाहरात तथा नकद कैश आदि को अलमारी में दक्षिण दिशा की तरफ रखने से धन-संपति की बहुत ज्यादा बढोतरी होती हैं एवं इस अलमारी को सदा उत्तरी दिशा की दीवार से लगाकर ही रखना उचित होता है।
  • वास्तु शास्त्र के सिद्धान्तों (Vastu Principles) के अनुसार तुलसी के पौधे का चबूतरा पूर्व दिशा में ही बनवाना बहुत अच्छा समझा जाता है।
  • वायव्य दिशा में अगर आफिस हो तो बहुत ही अच्छा होता है।
  • मशीनरी व अस्त्र-शस्त्र (हथियार आदि) को नैऋत्य दिशा में रखना उचित होता है।
  • मकान के बगीचे में हमेशा इस तरह के पेड़-पौधे को लगवाना चाहिए, जिससे कि हमें शुद्ध तथा पवित्र हवा और ऊर्जा, ये दोनों ही मिलती रहें। इसके साथ ही इस तरह के खुशबूदार पौधे भी लगवाने चाहिए जैसे, जूही, चमेली, मोंगरा, रातरानी तथा चंपा आदि, जिनसे कि हवा टकराकर कमरों में खुशबू का अहसास हो सके।
  • मकान को बनवाते समय इस बात का जरूर ध्यान रखना चाहिए कि मकान के मुख्य दरवाजे या मेन गेट पर कुबेर, लक्ष्मी और गणेश जी महाराज की मूर्तियां स्थापित होनी चाहिए।
  • भूमिगत निर्माण (बेसमेण्ट या तहखाना)- अगर मकान को बनाते समय बेसमेन्ट बनाना भी जरूरी है तो बेसमेन्ट को जमीन की उत्तर या पूर्व दिशा में ही बनाना चाहिए। भूमिगत (जमीन का) निर्माण या पानी की टंकी (जमीन के नीचे) को दक्षिण दिशा या पश्चिम दिशा में नहीं बनवाना चाहिए। बेसमेन्ट को कभी भी मकान के बीच में नहीं बनवाना चाहिए।

वास्तु शास्त्र की सम्पूर्ण जानकारियां

  1. जीवन और वास्तुशास्त्र का संबंध
  2. जाने घर का सम्पूर्ण वास्तु शास्त्र
  3. घर, ऑफिस, धन, शिक्षा, स्वास्थ्य, संबंध और शादी के लिए वास्तु शास्त्र टिप्स
  4. वास्तु शास्त्र के आधारभूत नियम
  5. अंक एवं यंत्र वास्तु शास्त्र
  6. विभिन्न स्थान हेतु वास्तु शास्त्र के नियम एवं निदान
  7. वास्तु का व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव
  8. हिन्दू पंचांग अथार्त हिन्दू कैलेंडर क्या है?
  9. युग तथा वैदिक धर्म
  10. भारतीय ज्योतिष शास्त्र
  11. भवनों के लिए वास्तुकला

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