वास्तु शास्त्र के अनुसार बच्चों का कमरा

वास्तु शास्त्र के अनुसार बच्चों का कमरा

बच्चों का कमरा

भारत में चौदह वर्ष तक की उम्र के लगभग 20 करोड़ बच्चे हैं अतः बच्चों के विकास के लिए चिंतन-मनन करना संभव होता है। बच्चों के चहुंमुखी विकास के लिए साफ सुथरा बच्चों का कमरा, उचित पौष्टिक आहार, चिकित्सा सुविधा, शिक्षा, वस्त्रों आदि की आवश्यकता हो तो उसके साथ ही साथ एक उचित वातावरण की भी गहन आवश्यकता होती है जिसमें खेल-कूद, पढ़-लिखकर उसका विकास होता है। बच्चा हर काम खेल-खेल में ही सीखता है और अपने आस-पास चारों तरफ की वस्तुओं का उसके मस्तिष्क पर विशेष प्रभाव पड़ता है।

बच्चों के लिए उचित पुस्तकों, खिलौनों और मनोरंजन सामग्री की दिशा में हमारे देश में भी विदेशों की तरह तेजी से कार्य हो रहा है परंतु बच्चों के लिए फर्नीचर के बारे में बहुत कम वास्तुकारों एवं इंटीरियर डेकोरेटर्स ने सोचा है अतः बच्चों का कमरा सजाने से संबंध रखने वाले विभिन्न पहलुओं पर हम यहां विस्तृत रूप से वास्तुशास्त्रानुसार चर्चा करेंगे।

प्रायः फर्नीचर, बिजली की फिटिंग्स, बेड, कुर्सी, मेज आदि के गलत डिजाइन एवं मैटिरियल से बच्चों से संबंधित छोटी-मोटी दुर्घटना होती रहती है। कभी छोटे बच्चे बिजली के प्लग के सुराखों में अंगुली दे देते है, कभी फर्नीचर की उठापटक में चोट खा जाते हैं। छोटे बच्चे दीवारों व फर्नीचर का रंग पेंट भी खुरचकर खा जाते हैं।

बच्चों के कमरे की योजना बनाते समय कुछ बातों पर ध्यान देने की विशेष आवश्यकता होती है जैसे फर्नीचर ऐसा हो कि चोट लगने का खतरा कम हो, खिलौनों के रखने की सही व्यवस्था हो, पढ़ाई के लिए उचित साइज की स्टडी-टेबल या कुर्सी-मेज हो, मानसिक विकास के लिए बहु-उपयोगी व न टूटने वाला फर्नीचर हो, कमरे में खेलने के लिए काफी स्थान हो, रंगों का उचित चुनाव हो और कमरे में जाने पर कमरे से बच्चों की व्यक्तित्व की झलक मिल सके।

वास्तुशास्त्र के अनुसार बच्चों का निरंतर विकास होता रहता है और उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनकी आवश्यकताओं में भी परिवर्तन होता रहता है अतः फर्नीचर इस प्रकार का होना चाहिए जो बच्चों की बढ़ती उम्र के साथ-साथ बढ़ सके।

बच्चों के लिए वास्तुनियम-

  • बच्चों का कमरा बनवाते समय यह ध्यान रखें कि लड़की का कमरा दक्षिण दिशा में बनवाएं।
  • बच्चों का कमरा बनवाते समय लड़के का कमरा पश्चिम दिशा में बनवाएं।
  • पलंग का सिरहाना हमेशा पूर्व दिशा की ओऱ होना चाहिए। इससे जब भी बच्चा पड़ने के लिए बैठेगा तो उसका मुख पूर्व दिशा में ही होगा।
  • जो बच्चा कॉमर्स पढ़ रहा हो उसे उत्तर दिशा में मुख करके पढ़ना चाहिए। इस तरह के वास्तुनियम का पालन करने से जीवन में बच्चा जीवन में अधिक उन्नति करता है।

फर्नीचर इस प्रकार का बनवाएं कि उनकी ऊंचाई घटाई-बढ़ाई जा सके जैसे दीवार पर लगाने वाले शेल्फ या केबिनेट को ऊंचा या नीचा टांगा जा सकता है। स्टडी टेबल अलग से डालने की बजाए एक उत्तरी या पूर्वी दीवार पर उचित ऊंचाई पर एक शेल्फ लगाकर बनाई जा सकती है।
बच्चों को हमेशा कुछ न कुछ चित्रकारी करते रहने की आदत सी होती है। फर्श पर, दीवार पर, फर्नीचर पर जहां भी मन करता वहां लकीरें खींच देते हैं। गृहिणी की समझ में नहीं आता कि इस मुसीबत का हल कैसे ढूंढें। इस समस्या का समाधान हम बताते हैं। बच्चों के लिए दीवार पर एक छोटा सा लगभग 3×4 फुट का ब्लैकबोर्ड बनवा दें। इस पर बच्चे अपनी मर्जी के अनुसार जब जी चाहे चाक और सलेटी से चित्र बना सकते हैं। बच्चों को अपनी कलात्मक क्षमता की अभिव्यक्ति का माध्यम ब्लैकबोर्ड मिल जाने से उनका बौद्धिक व रचनात्मक विकास तो होगा ही साथ ही दीवारों, फर्श एवं फर्नीचर पर फालतू तरीकों से भी छुटकारा मिलेगा।

ब्लैकबोर्ड के अलावा बच्चों को टाइम-टेबल, पेंटिंग, फोटो, ड्राइंग्स आदि पिन-अप करने के लिए एक पिन-अप बोर्ड का भी इंतजाम कर देना चाहिए। इसके लिए भूसा बोर्ड या सेलोटेक्स बोर्ड का 2×4 फुट का एक टुकड़ा एक दीवार पर लगवा लें। बच्चे इस पर अपनी बनाई हुई ड्राइंगस, चित्र आदि जब जी चाहे पिन से लगा उतार सकते हैं।

महानगरों में रहने वाले बच्चों के कमरे के लिए वास्तुनियम- बच्चों का कमरा अधिकतर एक से अधिक बच्चों के लिए काम में लिया जाता है। इसलिए जब कभी दो बड़े बच्चों का बेड कमरे में लगा दिया जाता है तो पूरा कमरा ही घिर जाता है और खेलने व पढ़ाई-लिखाई के लिए स्टडी-टेबल आदि फर्नीचर की जगह कम पड़ जाती है। जगह की कमी की समस्या का समाधान करने के लिए दोमंजिले बेड लाभप्रद रहते हैं। एक के ऊपर एक बेड़ बनाने से कमरे में सिर्फ एक ही बेड का स्थान घिरता है और बच्चे भी इसे बहुत पसंद करते हैं। ऊपर के बेड़ पर जाने के लिए छोटी सी सीढ़ी भी लगाई जा सकती है।

इसके अतिरिक्त बेड के नीचे से दराज की तरह निकल आने वाले बेड का भी प्रयोग कर सकते हैं। दिन के समय बेड को दूसरे के नीचे सरका दिया जाए तो इससे बच्चों का कमरा में खेलने, कूदने के लिए काफी स्थान मिल सकता है। इस तरह रात को सोने के लिए बेड को बाहर निकला कर सोया जा सकता है।

बच्चों के कमरे में प्रकाश की व्यवस्था- बच्चों के कमरे में रात्रि के समय धीमा प्रकाश रहना अति आवश्यक है बच्चा रात को उठकर डर न जाए या उसे किसी चीज से चोट न लग जाए इसके लिए एक कम वाट के नाइट लैम्प की भी व्यवस्था कर देनी चाहिए। इसके अतिरिक्त टेबल पर टेबल लैम्प इस प्रकार लगाना चाहिए कि उसका प्रकाश बाईं ओर से आए। ब्लैकबोर्ड के ऊपर भी एस स्पॉट लाइट का प्रबंध करना चाहिए।

बच्चों का कमरा में पढ़ने, अध्ययन करने, रुचि-अभिरुचि की पूर्ति करने एवं रात में प्रयोग करने के लिए प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। यदि छोटे बच्चे का कमरा हो तो प्लग प्लॉइंट इतनी ऊंचाई पर होना चाहिए कि बच्चे का हाथ उस तक न पहुंच पाएं। किशोर एवं युवाओं के लिए साढ़े चार फुट की ऊंचाई पर प्लग प्वॉइंट लगाना उचित रहता है। अध्ययन के लिए टेबल-लैम्प इस तरह का हो कि बाईं ओर से प्रकाश आए। स्वस्थ व्यक्ति के लिए 60 वाट का बल्व टेबल-लैम्प में लगाना काफी रहता है। ब्लैकबोर्ड या पिन-अप बोर्ड के ऊपर भी एक स्पॉट लाइट लगवा देनी चाहिए। एकसार प्रकाश के लिए यहां भी ट्यूबलाइट लगाना उचित रहेगी। रात को नाइट लैम्प की भी व्यवस्था होनी चाहिए।

दिन के समय भी अध्ययन टेबल को इस तरह से लगाएं कि खिड़की से प्रकाश बाईं तरफ से आए। खिड़की के सामने टेबल लगाने से आंखों पर सीधा प्रकाश पड़ेगा जो मन को बेचैन करता है।

बच्चों के खिलौने- बच्चों की अलमारी में शेल्फ उचित ऊंचाई पर ही लगाएं ताकि बच्चों के हाथ शेल्फ पर आसानी से पहुंच सकें ताकि वे अपने खिलौने, पुस्तकें आदि बगैर किसी की मदद के व्यवस्थित करके रख सकें। अलमारी व दरवाजों आदि के हैण्डल को बच्चों के नाम के पहले अक्षर के डिजाइन का देने से लुभावना व आकर्षक लगेगा। अधिकांश फर्नीचर दीवार से सटा हुआ ही लगाएं। ऐसा करने से बच्चों को कमरे में खेलने- कूदने, घूमने-फिरने को काफी जगह मिल जाती है।

बच्चों के कमरे के वातावरण का बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास में भारी हाथ होता है। बच्चों को बचपन से ही स्वावलम्बी बनाना व तरीके सलीके से रहना सिखाना बहुत आवश्यक है। अतः बच्चों का फर्नीचर अर्थात ऐसा हो कि छोटा बच्चा भी उसे अपने आप सरका-खिसका सके एवं सही प्रकार से व्यवस्थित कर सके। इससे घर की स्त्री को सिर दर्द तो कम होता ही है साथ ही बच्चा भी आत्मनिर्भर बनता है।

बच्चों के कमरे में लगाए जाने वाले फर्नीचर के लिए आवश्यक है कि वह मजबूत हो और साथ ही वजन में हल्का भी हो। बच्चों के कमरे में लगाए जाने वाले फर्नीचर देवदार, कैल आदि हल्की एवं मुलायम लकड़ी के होने चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार देवदार या कैल का बना फर्नीचर अत्यंत शुभ होता है।

फर्नीचर पर या तो आप स्प्रिट पॉलिश या वैक्स पॉलिस कर सकते हैं या फिर सुंदर रंगों में इनेमल पेंट कर सकते हैं। बच्चों के लिए फर्नीचर से मिलते-जुलते ही सोफ्ट वुड के खिलौने भी उपयोगी रहते हैं जिन्हें तोड़-मरोड़कर बच्चा अपनी बुद्धि का विकास कर सकता है। फर्नीचर पर अगर आप डेकोरेटिव लेमिनेट लगवा लें तो एक तो उसे साफ करने में आसानी रहेगी दूसरे छोटे बच्चे द्वारा पेंट को खुरचकर खाने का डर भी नहीं रहेगा।

लाइट प्वॉइंट एवं प्लग इतनी ऊंचाई पर होना चाहिए कि बहुत छोटे बच्चे का हाथ उस तक न पहुंच सकें परंतु समझदार बच्चा उस तक आसानी से पहुंच सकें। बच्चों के कमरे में फर्श पर गहरे रंग का गलीचा, कालीन या जूट की दरी अवश्य बिछाएं। इससे एक तो फर्श का तापमान सहनीय रहेगा साथ ही बच्चों के गिरने पर चोट लगने या गिराकर खिलौने तोड़ने का डर भी नहीं रहेगा।

बच्चों के कमरे में आप निस्संदह शोख, चटक रंग प्रयोग कर सकते हैं जैसे पीला, केसरी, नीला, बैंगनी या अन्य भड़कीले लुभावने रंग। तेज व गहरे रंग बच्चों को बहुत पसंद आते हैं एवं कमरे में भी बहुत अच्छे लगते हैं। यदि दीवारों पर रंग के स्थान पर वॉलपेपर टाईल या पेण्ट का प्रयोग करें तो बेहतर रहता है। इन्हें धोकर साफ किया जा सकता है अतः बच्चा उस पर कुछ दाग-धब्बे भी डाल दे तो कठिनाई नहीं होती है। इसके अलावा वॉलपेपर में आकर्षक, सुंदर, लुभावने, फूल-पत्ती के डिजाइन भी मिलते हैं साथ ही यह टिकाऊ भी होता है जिससे प्रतिवर्ष के रंग-सफेदी के खर्च में भी बचत हो सकती है।

ध्यान रहे कि बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं जैसा चाहा बना लिया। अच्छे माहौल में पले-बढ़े बच्चे निश्चित रूप से कल को सफल समझदार नागरिक बन सकते हैं अतः थोड़ी सी समझबूझ, लगन व प्रयास से आप बच्चों के कमरे की ऐसी योजना तैयार कर सकते हैं जिसमें बच्चे के सर्वागीण विकास के लिए उचित वातावरण तैयार हो सके।

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