वास्तुशास्त्र के सम्पूर्ण नियम और जानकारियां

वास्तुशास्त्र के सम्पूर्ण नियम और जानकारियां

वास्तुशास्त्र का उदय सूर्य और पृथ्वी की वजह से ही हुआ है। सूर्य की किरणों के फलस्वरूप ही धरती में पैदा हुई भौगोलिक स्थितियां ही वास्तु के कारणभूत है। मकान को बनाने के लिए वास्तुशास्त्र के नियम से युक्त ये स्थितियां मदद करने वाली होती है। आग्नेय, नैऋत्य तथा वायव्य की दिशाओं में कुएं व गड्ढें हो तो इस तरह के मकानों में सदा लड़ाई-झगड़े ही होते हुए देखे जाते हैं। इस तरह के मकानों के लक्षणों को साफ तरह से देखने पर हम इसके बारे में यह बात अवश्य ही कह सकते हैं कि वास्तुशास्त्र का कितना ज्यादा महत्व है।

वास्तुशास्त्र के नियम

वास्तुशास्त्र में जमीन की दिशाओं की लंबाई, चौड़ाई के अनुसार ही जमीन की गुणवता व इसके लाभ तथा हानि के बारे में मकान को बनवाते समय इनका जरूर चुनाव करना चाहिए। वास्तुशास्त्र के नियम के अनुसार जमीन को चार भागों में बांटा गया है जैसे-

  1. नैऋत्य, दक्षिण, पश्चिम तथा वायव्य कोण में ऊंची गजपृष्ठ की जमीन के स्वामी धनवान और लंबी उम्र जीने वाले होते हैं।
  2. बीच में ऊंची और चारों तरफ से नीची करपृष्ठ की जमीन के स्वामी अपना जीवन सुखी व्यतीत करने वाले, उत्साही होते हैं तथा इनकी धन-संपति में बहुत ज्यादा बढोत्तरी होती रहती है।
  3. पूर्व, पूर्व-दक्षिण, उत्तर-पूर्व में ऊंची तथा पश्चिम दिशा में नीची दैत्यपृष्ठ की जमीन के स्वामी धन तथा संतान वाले होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति पशु के रखने पर नुकसान उठाते हैं।
  4. पूर्व-पश्चिम की तरफ लंबी, उत्तर तथा दक्षिण दिशा में ऊंची एवं बीच में नीची नागपृष्ठ जैसी जमीन के स्वामी मानसिक रोग से परेशान रहने वाले होते हैं तथा ऐसे व्यक्तियों को अपनी मृत्यु का डर हर समय लगा रहता है। इनको अपनी स्त्री तथा संतान की तरफ से बहुत नुकसान होता है और इनके दुश्मनों की संख्यां बढती रहती है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार मकान, दुकान, फैक्ट्री आदि बनवाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी होना चाहिए।

  1. फैक्ट्री-उद्योग, कारखाने, दुकान, कामर्शियल कांपलेक्स तथा होटल आदि को बनवाते समय इस बात का बहुत ही ज्यादा ध्यान रखना चाहिए कि इनका ईशानकोण कभी भी दूसरी दीवारों से ऊंचा नहीं होना चाहिए।
  2. अगर फैक्ट्री के ईशानकोण को छोड़कर किसी भी दिशा में कुएं या गड्ढे हों, तो उस जगह के स्वामी को बुरे परिणामों को भुगतना पड़ता हैं।
  3. अगर मकान या फैक्ट्री की ईशान दिशा में कोई भी टूटी हुई दीवार, दरार, गड्ढा या भग्नावशेष हों, तो ऐसे मकान या फैक्ट्री के मालिक की संतान विकलांग होती है।
  4. मकान या फैक्ट्री में ईशान दिशा में कभी भी शौचालय नहीं बनवाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने पर इनके मालिकों का ज्यादा समय क्लेश में ही बीतता है। कभी तो इनके घर में झगड़े होते रहते है और, कभी फैक्ट्री के मजदूर आपस में लड़ते रहते हैं
  5. अगर किसी व्यक्ति के मकान में रसोई घर ईशान दिशा में होगा, तो ऐसे घरों में अधिकतर लड़ाई-झगड़े होते रहेंगे तथा इनको धन का भी नुकसान होगा।
  6. जिन व्यक्तियों के घर के ईशान कोण में कूड़ा-कचरे का ढेर या पत्थरों का ढेर तथा कबाड़ आदि हो, तो उनको वहां पर ये सब चीजे नहीं रखना चाहिए क्योंकि ऐसा होने से घरों के मालिक के दुश्मनों की बढोतरी हो जाएगी तथा उसकी उम्र में भी कमी आने लगेगी एवं उसका चरित्र भी खराब हो जाएगा।
  7. वास्तुशास्त्र के अनुसार मकान के कमरों में ईशान दिशा से सटाकर मच्छरदानी की छड़ियों, दूसरी किसी भी तरह की बेकार पड़ी वस्तु, यहां तक कि सफाई करने वाली झाडू को भी नहीं रखना चाहिए, अगर इस तरह से हो जाता है, तो ऐसे मकान में धन-संपति की कमी हो सकती है।
  8. किसी भी तरह की जमीन-जायदाद को खरीदने से पहले वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुसार ही उस जमीन-जायदाद की जांच एवं जमीन के आकार तथा कोणों के परिक्षण के बारे में किसी अच्छे वास्तुशास्त्र के जानकार से सलाह अवश्य ही लेनी चाहिए।
  9. मकान बनाने से पहले जागरण करना, किसी अच्छे मुहूर्त में मकान का पूजन, उस मकान के नींव का पूजन अवश्य ही करवाना चाहिए। मकान के पूरी तरह से बन जाने के बाद उसकी ठीक तरह से विधिवत प्रतिष्ठा, वास्तु पूजा, गायत्री मां का जप, गणेश जी महाराज का पूजन, शिव की पूजा, जप, विष्णु भगवान की पूजा, नौ ग्रहों की पूजा तथा घर की शांति बनाए रखने के लिए हवन के साथ, पंडितों को भोजन करवाने के बाद उनको दान-दक्षिणा आदि देकर विदा करना चाहिए।
  10. मकान सदा ही इस तरह का बनवाना चाहिए जिसमें उस मकान में रहने वाले व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा प्राकृतिक रोशनी, स्वच्छ तथा स्वच्छ वायु मिल सके। मकान इस तरह का बनवाना चाहिए जिसमें सूर्य के उदय होने पर सूरज की किरणों का लाभ उस मकान में रहने वाले सभी सदस्यों को अच्छी तरह से मिल सके।
  11. कभी-भी फैक्ट्री, कारखानों तथा मिल या स्कूलों का मेन गेट कोण में नहीं होना चाहिए।
  12. दुकान हो, फैक्ट्री हो या किसी का अपना निजी मकान हो, इस बात का हमेशा ही ध्यान रखना चाहिए कि उनका मुख्य गेट गलत दिशा में न हो।
  13. किसी भी वस्तु चाहे वो रसोई घर हो, जनरेटर हो, ट्रांसफार्मर हो या आयल इंजन, इन सबका मुहूर्त या स्थापना करते समय सदा इनको अग्निकोण दक्षिण पूर्व दिशा में होना चाहिए।
  14. चाहे किसी भी तरह का रथ हो, बैलगाड़ी हो, चाहे जानवर हो, टैक्सी हो या फिर पार्किग हो, इस सभी के लिए मकान का उत्तर-पश्चिम कोना ही काम में लेना चाहिए।
  15. मकान में चाहे बारिश का पानी हो या कृत्रिम पानी हो, इन सबके निकलने की दिशा सदा ही उत्तर-पूर्व की तरफ से ही होनी चाहिए।
  16. प्रशासकीय कमरे, किसी भी तरह की बैठक हो, बात-चीत करने का कमरा या बहुत ही आवश्यक फैसले लेने हो, इस तरह के कमरे घर के उत्तर या पूर्व दिशा में ही होने चाहिए।
  17. पूजा करने वाले कमरे में पूजा करने वाले का मुंह हमेशा पूर्व, ईशान या उत्तर की दिशा में ही होना चाहिए।
  18. मकान में शौचालय, मूत्रालय, मैनहोल, गटर या गंदी नाली उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्वकोण में ही होनी चाहिए।
  19. काम न आने वाले या दर्यनीय वृक्षों को कभी-भी मकान तथा फैक्ट्री के मुख्य गेट पर नहीं लगाना चाहिए।




वास्तु शास्त्र की सम्पूर्ण जानकारियां

  1. जीवन और वास्तुशास्त्र का संबंध
  2. जाने घर का सम्पूर्ण वास्तु शास्त्र
  3. घर, ऑफिस, धन, शिक्षा, स्वास्थ्य, संबंध और शादी के लिए वास्तु शास्त्र टिप्स
  4. वास्तु शास्त्र के आधारभूत नियम
  5. वास्तु शास्त्र के प्रमुख सिद्धान्त
  6. अंक एवं यंत्र वास्तु शास्त्र
  7. विभिन्न स्थान हेतु वास्तु शास्त्र के नियम एवं निदान
  8. वास्तु का व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव
  9. हिन्दू पंचांग अथार्त हिन्दू कैलेंडर क्या है?
  10. युग तथा वैदिक धर्म
  11. भारतीय ज्योतिष शास्त्र
  12. भवनों के लिए वास्तुकला

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