वास्तु शास्त्र – बरामदा, बॉलकनी, टेरेस, दरवाजा तथा मण्डप

अंक एवं यंत्र वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र में मकान के निर्माण के दो भाग दिए हैं। वायव्य से आग्नेय के कर्ण से ईशान तक का त्रिभुजाकार क्षेत्र सूर्य तथा कर्ण से नैऋत्य तक का त्रिभुजाकार क्षेत्र चन्द्र क्षेत्र कहलाता है। चन्द्र क्षेत्र में सूर्य क्षेत्र के निर्माण से अधिक निर्माण व अधिक भार होना चाहिए । बरामदा बनवाने से निर्माण हल्का होता है। इसलिए बरामदे का निर्माण हमेशा ईशान कोण में करना चाहिए तथा बरामदे के लिए पूर्व व उत्तर दिशाए भी शुभ रहती है। बरामदे के स्तम्भ हमेशा गोल होने चाहिए।

वृहत्संहिता में बरामदा बनाने के निर्देश दिए गए हैं कि मकान के फ्लोर एरिया के बाहर कमरों की चौड़ाई या लम्बाई के एक तिहाई चौडाई की बरामदा या गैलरी बनानी चाहिए। वृहत्संहिता के अनुसार बरामदा मकान में चारों भागों में कहीं भी हो सकता है।

बॉलकनी हमेशा उत्तर व पूर्व की ओर बनवानी चाहिए। यदि पश्चिम व दक्षिण की ओर बॉलकनी हो तब पूर्व व उत्तर की ओर की बॉलकनी अधिक बड़ी होनी चाहिए जिससे उत्तर व पूर्व की दिशाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ प्राप्त हो सके।

टैरेस भी हमेशा ईशान कोण की ओर बनवाया जाना चाहिए।  इसके अलावा टेरेस को पूर्व व उत्तर में भी बनवाया जा सकता है। इसकी ऊंचाई हमेशा मकान की ऊंचाई से कम रखनी चाहिए।

द्वार मण्डल भी टैरेस की तरह मकान की ऊंचाई से कम होना चाहिए। इसे उत्तरी ईशान व पूर्वी ईशान पर रखना चाहिए। द्वार मण्डप के बाहर स्तम्भ गोल बनवाने चाहिए।

पोर्टिको को ईशान कोण में बनवाना चाहिए यह वास्तुशास्त्र के अनुसार शुभ माना जाता है। पोर्टिको की ऊंचाई हमेशा मकान की ऊंचाई से कम रखनी चाहिए। यह वाहनों को धूप व बरसात से बचाव के लिए बनवाया जाता है। टैरेस व पोर्टिको एक ही संरचना है लेकिन अलग-अलग भी बनवाएं जा सकते हैं।

वास्तु शास्त्र की सम्पूर्ण जानकारियां

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  6. अंक एवं यंत्र वास्तु शास्त्र
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(This content has been written by Super Thirty India Group)

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