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औद्योगिक भवन

औद्योगिक भवन या इमारतें

Industrial buildings or buildings

The principles of Vastushastra should be kept in mind while designing an industrial building because a lot of money is spent on land, building, machines and equipment by their owners. Apart from this, they also spend a good amount of money to get very good results in production, make good management arrangements, minimize accidents and strikes etc., to avoid losses from fire so that they can make profit. In addition to ensuring the achievement of facilities related to the construction of electricity, water and house structure, the first important task is to choose the site of construction. As far as possible, the size of the land, its relationship with the road, the slope and the ground surface (external and internal) of the construction site should be in accordance with the principles of Vastushastra.

औद्योगिक भवन का डिजाइन बनाते समय वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि इनके मालिकों द्वारा जमीन, इमारत, मशीनों और उपकरणों पर बहुत अधिक धन राशि खर्च की जाती है। इसके अलावा वे उत्पादन में बहुत अच्छा नतीजा पाने, अच्छी प्रबंध व्यवस्था करने, दुर्घटनाओं तथा हड़ताल आदि कम से कम करने, आग से होने वाले नुकसान से बचने के लिए भी अच्छी धनराशि खर्च करते हैं ताकि वे लाभ कमा सकें। बिजली, पानी और मकान के ढांचे के निर्माण से संबंधित सुविधाओं की उपलब्धि को सुनिश्चित करने के अलावा निर्माण की जगह का चुनाव सबसे पहला महत्वपूर्ण काम होता है। जहां तक संभव हो जमीन का आकार, सड़क से उसका संबंध, ढाल और निर्माणस्थल के जमीन की सतह (बाहरी और आंतरिक) वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार होनी चाहिए।

  1. इस तरह की जमीनों को चुनना चाहिए जिनके साथ में उत्तर, दक्षिण या उत्तर तथा दक्षिण दोनों ओर सड़के हो और पूर्व उत्तर-पूर्व में गेट होना चाहिए।
  2. ऐसे निर्माण-स्थल भी हानिकारक नहीं होते जिनके साथ उत्तर और पश्चिम में सड़के हो या पश्चिम और दक्षिण में सड़के हों।
  3. चौकीदार का कमरा दक्षिण-पूर्व में हो सकता है। अगर गेट पूर्व में हो, उत्तर में गेट होने पर इसे उत्तर-पश्चिम की ओर रखा जा सकता है। द्वार पश्चिम में होने पर इसे दक्षिण-पश्चिम में बनाया जा सकता है। दक्षिण में गेट होने पर यह दक्षिण-पश्चिम में स्थित हो सकता है लेकिन इसे बांउड्री से दूर होना चाहिए।
  4. मकान की ऊंचाई दक्षिण-पश्चिम में ज्यादा होनी चाहिए। फर्श की सतह भी दक्षिण-पश्चिम में ऊंचा होनी चाहिए। यह भाग भारी सामान रखने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है जो सामान्यतः पूरे साल भरा रहे।
  5. केंद्रीय प्रशासकीय कार्यालय खंड उत्तर या पूर्व में हो सकता है लेकिन इसकी ऊंचाई प्रमुख फैक्ट्री के मकान से कम होनी चाहिए।
  6. नौकरों के मकान, कर्मचारियों के मकान, शौचालय खंड आदि दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम में हो सकते हैं लेकिन इन मकानों की ऊंचाई मुख्य मकान की ऊंचाई से कम होनी चाहिए। यदि इन क्वाटरों पर बहुमंजिली इमारत हो तो दक्षिण-पश्चिम कोने को चुनना चाहिए। इसके लिए दक्षिण-पूर्व कोने के इस्तेमाल से बचना ही सही है। हर स्थिति में इसे मुख्य मकान और बांउड्री की दीवार से दूर रखना चाहिए।
  7. टंकिया, कुएं, बोरवेल, भूमिगत हौदी, तालाब आदि सिर्फ उत्तर-पूर्वी भाग में होना चाहिए।
  8. यदि ओवरहेड टैंक छत के ऊपर रखें जाए तो उन्हें पश्चिम, दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए और मकान के उत्तर-पूर्व कोने से ज्यादा ऊंचे होने चाहिए।
  9. फैक्ट्री में भारी मशीनें पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम में रखनी चाहिए। जब मशीनों को फर्श के सतह से नीचे रखना हो तब उत्तर या पूर्व की ओर का प्रयोग किया जा सकता है लेकिन इन मशीनों का भार हल्का होना चाहिए।
  10. यदि कच्चेमाल का भंडार फैक्ट्री के अंदर हो तो उसे दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम की ओर होना चाहिए।
  11. तैयार वस्तुओं को प्रवेशद्वार के पास रखना चाहिए ताकि उन्हें जल्द बाहर भेजा जा सके लेकिन इससे इमारत के पूर्व, उत्तर और उत्तर-पूर्व के फर्श पर पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम के फर्श से ज्यादा वजह नहीं पड़ना चाहिए।
  12. तेल भंडार की टंकी जमीन के अंदर होने की स्थिति में उन्हें उत्तर-पूर्व भाग में होना चाहिए। यदि इन्हें जमीन के ऊपर रखना हो तो उत्तर-पूर्व कोने में नहीं रखना चाहिए। इसके लिए अन्य कोना इस्तेमाल में लाया जा सकता है लेकिन इनकी ऊंचाई बहुत ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
  13. ट्रांसफार्मर, जेनरेटर, ब्वायलर, भट्टियां या अन्य इंजन जिसमें आग का प्रयोग होता है। यह सिर्फ दक्षिणी-पूर्वी कोने में होने चाहिए।
  14. सेप्टिक टैंक को पूर्व या उत्तर दिशा में रखना चाहिए लेकिन उत्तर-पूर्व कोने में और दक्षिण-पश्चिम भाग में नहीं। इसी प्रकार पानी शुद्ध करने और एफ्लुयेंट (निस्सारी) संयंत्रों को उत्तर और पूर्वी की ओर रखा जा सकता है।
  15. जब फैक्ट्री बहुत बड़ी हो तो पूजा करने के कमरे का निर्माण पश्चिम की ओर मुख किए हुए पूर्व में स्थित होना चाहिए।
  16. इमारत के चारों ओर खुली हुई जगह छोड़नी चाहिए। उत्तर और पूर्व की ओर खुली जगह ज्यादा होनी चाहिए तथा निर्माण-स्थल का ढाल उत्तर-पूर्व कोने की ओर होना चाहिए।
  17. फैक्ट्री की इमारत के दक्षिण-पश्चिम कोने का इस्तेमाल फैक्ट्री मालिक या मैनेजिंग डायरेक्टर के कार्यालय के लिए किया जा सकता है। इस विशेष जगह की स्थिति के कारण वह बहुत शक्तिशाली हो जायेगा।

मकानों, इमारतों व फैक्टरियों में प्रयोग होने वाली सूची-

  • भूमिगत पानी की टंकी
  • शौचालय
  • बोरवेल
  • घास मैदान (लॉन)
  • हल्के सामान रखने की जगह
  • पानी शुद्धीकरण संयंत्र
  • कारों और साइकिलों की जगह
  • सेप्टिक टैंक
  • उत्पादित (तैयार) वस्तुओं के रखने की जगह
  • ब्वायलर हाउस
  • ट्रांसफार्मर
  • हल्की मशीनों के रखने की जगह
  • एल.टी.रूम
  • कम वजन वाली मशीनों के रखने की जगह
  • डीजल स्टोर
  • स्टोर का स्थान
  • जनरेटर
  • डाक विभाग
  • कच्चेमाल की जगह
  • जमीन के ऊपर स्थित तेल, एसिड स्टोर, रिफायनरी स्टोर
  • ओवरहैड टैंक
  • मजदूरों के प्रवेश की जगह
  • मंदिर
  • प्रशासन
  • कार्यालय के कर्मचारियों के प्रवेश की जगह
  • सुरक्षा (सिक्योरिटी)
  • कैंटीन
  • बड़े-बड़े पेड़
  • रसोई

वास्तुशास्त्र और धर्मशास्त्र (Vastu Shastra and Theology)

  1. भारतीय ज्योतिष शास्त्र
  2. भारतीय रीति-रिवाज तथा धर्मशास्त्र
  3. प्राचीन भारत की धर्मनिरपेक्ष वास्तुकला
  4. वेद तथा हिन्दू शब्द की स्तुति
  5. हिन्दू पंचांग अथार्त हिन्दू कैलेंडर क्या है?
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  7. वास्तु तथा पंचतत्व
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