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वास्तु शास्त्र | Vastu Shastra in Hindi

वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) क्या है, इसके बारे में मालवा के बहुत ही जाने माने शासक महाराजा भोज परमार ने ग्यारहवीं शताब्दी में खुद के द्वारा रचा गया ग्रंथ समरांगण सूत्रधार के पहले भाग के पांचवें श्लोक में कहा गया है किः-

वास्तुशास्त्रादूते तस्य न स्याल्लः क्षणनिश्चयः।

तस्माल्लोकस्य कृपयाः शास्त्रमतेदुदीर्यते।।

इस श्लोक का यह मतलब है कि वास्तु शास्त्र के नियमों के अलावा अन्य कोई प्रकार नहीं है, जिससे के बारे में यह निश्चित किया जा सके कि कोई भी मकान सही बना हुआ है या नहीं बना हुआ है…Read More>>

Vastu Shastra भारत का वह प्राचीन विज्ञान है जिसकी मदद से हम हमारे आस पास की नकारात्मक ऊर्जाओं को सकारात्मक ऊर्जा में बदलने का कार्य किया जाता है। संतुलित और सुखी जीवन के लिए वास्तुशास्त्र के बारे में जानना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि हम लोग अनजाने में बहुत से ऐसा कार्य करते हैं जो वास्तु के विपरित होता है जिसका खम्याजा हम लोगों को भुगतना पड़ाता है। Vastu Shastra के ज्ञान के लिए यहां पर हम Vastu Kala की जानाकरियां हिंदी (vastu shastra in Hindi) में दे रहे हैं ताकि आपको समझने में असानी हो।

एक व्यक्ति अपना अधिकांश जीवन एक भवन या घर अंदर व्यतित करता है इसलिये भवन या घर vastu के अनुसार बना होना बहुत ही आवश्यक है। यदि वास्तु के अनुसार आपका घर या भवन या फिर कार्यालय बना है तो आपको हर वक्त उसमें सुख और स्मृधि मिलती है।

विज्ञान की दृष्टि से दखा जाये तो ब्रह्मांड की सभी चीजों में ऊर्जा पाया जाता है और उससे जुड़ी हुई ऊर्जा को काबू में रखने के लिए Vastu Shastra से अच्छा हथियार नहीं हो सकता है।

मनुष्य के जीवन को नियंत्रित करने में कई कारक अपनी मुख्य भूमिका निभाते हैं उसमें से भाग्य, कर्म और स्थान मुख्य है। किसी व्यक्ति के कर्म और भाग्य के अनुसार ही उसको जीवन में लाभ मिलता है। लेकिन यदि उसके जीवन में वास्तु दोष होता है तो उसका कर्म और भाग्य दोनों उसी के अनुसार बदल जाता है। इसलिये वास्तु जीवन की गुणवत्ता को पहचानना बहुत ही जरूरी है। वास्तु शास्त्र के बारे में हर प्रकार की जानकारियां नीचे दी जा रही है उसे ध्यानपूर्क पढ़िये और अपने वास्तु को अपने अनुसार कर लीजियें।

वास्तु शास्त्र के बारे में जानकारियां

(Wastu Sastra information in Hindi)

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