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मकान के लिए रंगों का महत्व

गृह या मकान के अंदर की साज-सज्जा के वास्तु नियम

 Vastu principles for interior decoration

आज के युग में मनुष्य ने कई सांसारिकवादी साधन बना लिए हैं जो पुराने समय में नहीं थे। अपने मकान में सांसारिक साधनों की साज-सज्जा (Interior Decoration) करके मनुष्य पूरी तरह से सुखी जीवन को व्यतीत कर सकता है। मकान की चार दिशाएं व चार कोण माने जाते हैं। पूर्व दिशा, पश्चिम दिशा, उत्तर दिशा, दक्षिण दिशा तथा आग्नेय कोण, वायव्य कोण, नैऋत्य कोण तथा ईशान कोण होते हैं। इसलिए निम्न सुख के लिए साधनों को जिस जगह से संबंधित माना जाता है, पहले उसको वहां पर ले जाएं अथवा उस सीमा के अंदर ले जाएं। फिर उसको जिस जगह पर रखना चाहते हैं, वहां पर ही उस सामान को रख सकते हैं। लेकिन अगर आप उन साधनों को उसकी जगह पर रख देते हैं तो अवश्य ही उस तरह के साधनों के सुख प्राप्त होगे तथा इसके साथ ही सुविधा भी मिल जाएगी। जिस तरह से कहा गया है किः-

  1. कमरे में हमेशा Dressing Table को पूर्व दिशा अथवा दक्षिण दिशा की तरफ रखना बहुत ही ज्यादा लाभदायक माना जाता है, इससे कमरे की साज-सज्जा में काफी निखार आ जाता है।
  2. अपने मकान में हमेशा ही रामायण, पुराण, गीता (Ramayana, Puranas, Geeta) आदि से मिलती-जुलती इस तरह की तस्वीरों को लगाना चाहिए, जिससे कि भक्ति की भावना जागृत हो सकें। बहुत ही ज्यादा डरावने, हिंसात्मक, लड़ाई-झगड़े करने वाले, मारकाट करने वाले, शिकार करने वालों की तस्वीर अथवा पेटिंग या चित्रकारी को नहीं लगाना चाहिए।
  3. अपने Kitchen के साथ खुली जगह में, कमरे आदि में ईशान कोण की तरफ Dining Table लगाना अच्छा माना जाता है।
  4. अधिकतर यह देखा जाता है कि कूलर, एयर कंडिशनर (cooler, air-conditioner) मकान की खिड़कियों में बाहर की तरफ ही ज्यादा लगाए जाते हैं। इन सामानों को मकान की किसी भी जगह में लगाने से किसी भी तरह का कोई Vastu Dosh पैदा नहीं होता है, लेकिन विशेष तरीके से इन चीजों को हमेशा ही आग्नेय कोण मे ही लगाना अच्छा होता है। इस तरह की सब वस्तुएं वायव्य कोण में लगाए जाने वाली होती है। वायव्य कोण में पश्चिम दिशा व उत्तर दिशा में इस वस्तुओं को कहीं भी लगाया जा सकता है। वायव्य कोण को वायु (हवा) का भी रास्ता माना गया है।
  5. घर में काम आने वाली सिलाई मशीन तथा बुनाई मशीन (sewing and weaving machines) को हमेशा ही पश्चिम दिशा की तरफ लगाना बहुत ही अच्छा माना जाता है।
  6. कालोनियों में सड़कों को उत्तर-दक्षिण दिशा की तरफ और पूर्व-पश्चिम दिशा की तरफ ही बनवाना अच्छा होता है।
  7. मकान या कालोनियों में पार्किंग के लिए सदा ही उत्तर-पश्चिम दिशा का इस्तेमाल करना अच्छा माना जाता है।
  8. सामूहिक आवासीय योजना में मानचित्र को इस तरह से बनवाना चाहिए कि जमीन उत्तर-दक्षिण दिशा में एक समान रेखा में उपस्थित हो।
  9. सामूहिक आवासीय योजना (Residential Project) को बनाते समय मकानों की सभी दीवारों को नहीं रखना चाहिए, उत्तर-पूर्व दिशा के भाग (हिस्से) को ज्यादा खुला व नीचा रखना अच्छा होता है।
  10. सामूहिक आवासीय योजना में ज्यादातर जमीन के भागों का मुंह पूर्व दिशा अथवा उत्तर दिशा की तरफ रखना अच्छा होता है। हो सके तो इस तरह की कोशिश करनी चाहिए।
  11. Hotel तथा Restaurant को बनाते समय उसके उत्तर-पूर्व के हिस्से (भाग) को खाली व नीचा ही रखना चाहिए तथा होटल एवं रेस्तरां के अंदर जाने के लिए उसका मुख्य गेट या दरवाजा उत्तर दिशा, पूर्व दिशा अथवा उत्तर-पूर्व दिशा में ही बनवाना चाहिए।
  12. होटल के छज्जे या बालकानी को उत्तर दिशा अथवा पूर्व दिशा की तरफ बनवाना चाहिए। होटल के Storeroom को दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ बनवाना अच्छा होता है तथा होटल के Bathroom व नहाने वाले कमरों को हमेशा ही पश्चिम दिशा की तरफ ही बनवाना लाभदायक माना जाता है। ऐसा करने ने वास्तु दोष तो दूर होता ही है साथ साज-सज्जा बना रहता है।
  13. Cinema Hall के Manager को उत्तर-दिशा की तरफ अपना केबिन बनवाना चाहिए और पूर्व दिशा की तरफ मैनेजर को अपना मुंह करके बैठना चाहिए। सिनेमाहाल की बनने वाली टिकट खिड़की को उत्तर अथवा उत्तर-पूर्व की दिशा में ही बनवाना चाहिए। कैश पेटी को उत्तर दिशा में अपने दाएं हाथ की तरफ ही रखना चाहिए।
  14. दुकान के ईशान कोण में पूजा-पाठ करने वाला कमरा (Pooja Room), अलमारी अथवा फर्नीचर को दुकान के दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए, इससे साज-सज्जा तो बनी रहती है साथ में वास्तु दोष भी दूर होता है। Shopkeeper को दक्षिण-पश्चिम के भाग में पूर्व दिशा की तरफ अथवा उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके बैठना चाहिए तथा दुकान में लगने वाले बिजली के मीटर को हमेशा ही आग्नेय कोण की तरफ लगवाना चाहिए।
  15. औद्योगिक प्रतिष्ठान में प्रकाशकीय कार्यालय उत्तर-पूर्व की दिशा में तथा कार आदि वाहन को खड़े करने के लिए पार्किंग का प्रबंध उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ ही करवाना चाहिए। सुरक्षा करने वाले व्यक्ति (सिक्योरिटी गार्ड) के केबिन को उत्तर दिशा के मुख्य रास्ते में उत्तर-पश्चिम कोण में ही बनवाना चाहिए।
  16. Residential Project के लिए जमीन का चुनाव करने के बाद उस जमीन को शुद्ध करने की क्रिया को करना अच्छा होता है और उन्नत, गिरावट व कोणों से बचने के लिए जमीन को वर्ग के आकार में या फिर आयताकार में काटना चाहिए।
  17. Higher buildings को इस तरह से बनाना चाहिए, कि जिससे सूरज की रोशनी व कुदरती हवा (वायु) को मकान के अंदर आने के लिए किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए, साधारण मकान की तरह ही सभी मकान के Vastu Principles को अपनाना बहुत ही अच्छा होता है।
  18. औद्योगिक प्रतिष्ठान (Industrial Establishment) में उत्तर-पूर्व का हिस्सा (भाग), दक्षिण-पश्चिम दिशा की बजाय नीचा होना चाहिए। कच्चे माल को दक्षिण दिशा की तरफ तथा तैयार हो चुके माल को उत्तर-पूर्व की दिशा में रखना बहुत अच्छा माना जाता है।
  19. किसी भी होटल अथवा रेस्तरां में खाना खाने वाला कमरा, ठहरने की जगह तथा kitchen को बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इनको वास्तु के सिद्धान्तों (Vastu Shaastra) के अनुसार ही बारी-बारी से उत्तर दिशा और पश्चिम दिशा व आग्नेय कोण में बनाना अच्छा जाना जाता है।
  20. फैक्ट्री के Storeroom को हमेशा ही दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ बनवाना चाहिए और पानी के लिए overhead water tank को वायव्य कोण में तथा फैक्ट्री की भारी मशीनों को हमेशा ही south-west direction की तरफ ही रखना लाभदायक माना जाता है।
  21. फैक्ट्री में काम करने वाले वर्करों (कर्मचारियों) के लिए कालोनियों (Quarters) को north-west direction की तरफ बनवाना सही रहता है।
  22. वास्तु के अनुसार साज-सज्जा को बनाये रखने के लिये दुकानों आदि में बनने वाली दुछत्ती अथवा टांड को हमेशा ही दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ बनवाना चाहिए तथा पीने के पानी का प्रबंध उत्तर-पूर्व की दिशा में अथवा उत्तर-पश्चिम दिशा में ही करना चाहिए।
  23. मकान की पहली मंजिल के आवासों से ऊपरी मंजिलों के आवासों की ऊंचाई को कम रखना चाहिए। सभी मंजिलों को ऊंचा-नीचा नहीं करना चाहिए। इसलिए सबसे ऊपर की मंजिल की सतह को थोड़ा सा नीचा ही रखना अच्छा होता है।
  24. हमेशा ही सोते समय अपने सिर को दक्षिण दिशा की तरफ करके ही सोना चाहिए। पानी को पीते समय अपने मुंह को उत्तर दिशा अथवा पूर्व दिशा की तरफ करके पीना चाहिए। पूजा-पाठ करते समय अपने मुंह को ईशान कोण की तरफ उत्तर दिशा अथवा पूर्व दिशा की तरफ करके बैठना चाहिए।
  25. cinema hall में लगने वाला परदा दक्षिण दिशा की तरफ लगाना चाहिए तथा उसके Projector को उत्तर दिशा की तरफ ही रखना अच्छा जाना जाता है। सिनेमाहाल में Canteen को दक्षिण-पूर्व की तरफ बनवाना चाहिए तथा शौचालय व मूत्रालय को पश्चिम दिशा अथवा दक्षिण दिशा के भाग में ही बनवाना चाहिए।
  26. अगर बहुत ही ज्यादा ऊंची-ऊची मंजिलों के मकानों को बनवाना हो, तो उसका उत्तर-पूर्व दिशा की ढलान नीची तथा south-west direction का भाग ऊंचा या उठा हुआ होना चाहिए।
  27. होटल में रिसेप्शन कक्ष को उत्तर-पूर्व की दिशा में बनवाना लाभदायक माना गया है, इससे उसकी सुंदरता अथार्त साज-सज्जा बढ़ जाती है। होटल के Cash box को भी हमेशा ही उत्तर दिशा में रखना चाहिए तथा होटल के मैनेजर का कमरा वायव्य कोण में ही बनवाना अच्छा जाना जाता है।
  28. सामुहिक आवास योजना मे जमीनों के मध्य (बीच) में पड़ने वाले रास्ते की चौड़ाई मकानों की औसत ऊंचाई से दो गुना ज्यादा होना चाहिए।
  29. Cinema Hall में पानी के प्रबंध के लिए ईशान कोण को ही चुनना चाहिए और कार आदि वाहन को खड़ा करने के लिए Parking व साइकिल आदि को खड़ा करने का स्टैंड उत्तर-पूर्व दिशा में ही रखना अच्छा होता है। सिनेमाहाल को बनाने के लिए जमीन आयताकार अथवा वर्ग के आकार का होना बहुत ही लाभदायक होता है तथा यह जमीन उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ बढ़ी हों, तो यह और भी ज्यादा अच्छी तथा लाभदायक मानी जाती है।

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