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Jyotish Tantra Ke Upay: ज्योतिष तंत्र के द्वारा वास्तुदोष का उपाय

Jyotish Tantra - Vastu Shastra

Tips of Vastu Shastra for Building Construction

ज्योतिष तंत्र के द्वारा वास्तुदोष का उपाय

Eliminating (Solving) Vaastu Doshas (Defects) Through Astrology Mechanism

Jyotish Tantra Ke Upay: While making any kind of new house or building, from which date of birth or any date, the direction or name of the house will be good or the correct name of the house should be kept. According to the auspicious effect of the house, the naming of the house is special in Vastushastra. If the birth date of the land or the owner of the house and his name is mixed as the basis, then the beauty of the house can be added to it, the following things are being told about it.

किसी भी तरह के नए मकान या भवन को बनाते समय जन्म अंक या किसी तारीख से कौन सी दिशा अथवा मकान का नाम अच्छा रहेगा अथवा मकान का कौन सा सही नाम रखना चाहिए। मकान के शुभ प्रभाव के अनुसार ही वास्तुशास्त्र में मकान का नामकरण विशेष होता है। जमीन या घर के मालिक की जन्म तिथि व उसके नाम को आधार मानकर ही मिला लिया जाए तो मकान की सुंदरता में चार चांद लगाए जा सकते हैं, इसके बारे में निम्नलिखित बातों को बताया जा रहा है, जैसे-

  1. अगर किसी व्यक्ति के मकान का नंबर 9, 18, 27, 36, 45, 108 हो या मकान के मुख्य द्वार पूर्वमुखी हो तो मकान का नाम प, शि, म, कु, अ, ध तथा भू के नाम पर होना चाहिए तथा इन नामों का रंग भी लाल, हल्का पीला, नारंगी, गोल्डन एवं हल्के नीले रंग में होना लिखा होना जरूरी होता है। इस तरह के नामों की पट्टी कभी-भी तीन कोण में नहीं लगानी चाहिए। नाम लिखने वाली पट्टी पर तांबे के पत्र को प्रयोग में लाना चाहिए। नाम की पट्टी को हमेशा ही मकान के मुख्य गेट या दरवाजे पर दाईं दिशा की तरफ ही लगाना चाहिए।
  2. जो जमीन दक्षिण दिशा तथा पश्चिम दिशा की तरफ मिलती हो और उन मकानों का नंबर भी 1, 10, 19, 28, 37, 100 अथवा फिर मकान के अंदर जाने का मुख्य दरवाजा या गेट पूर्व दिशा की तरफ हो तो इस स्थिति में उस मकान का नाम ग, पू, भा, प्र, दि, हे, हि, अ, आ, र के पहले अक्षरों में से ही रखना चाहिए। मकान के नाम लिखने वाला पत्थर भी गोल आकार का या फिर आठ कोणों के आकार का होना चाहिए। इन पत्थरों का रंग भी पीला, गुलाबी, लाल, हल्के रगों में होना शुभ माना जाता है। इन पत्थरों को मकान के दाई दिशा की तरफ ही स्थापित करवाना चाहिए।
  3. जिन मकानों का नंबर 2, 11, 20, 29, 38, 101 और मकान का मुख्य गेट या दरवाजा उत्तर-पश्चिम दिशा या पूर्व की दिशा में होता हों तो उस अवस्था में मकान का नाम श, हि, इ, क, ता, सो, र तथा म, इस तरह के अक्षरों में से चुनना चाहिए। मकान के बाहर नाम लिखने वाले पत्थर का आकार आठ कोणों वाले पत्थर में सफेद क्रीम में हल्के रंगों का होना चाहिए। नाम के पत्थर को मकान के बाहर बाई तरफ की दिशा में ही लगवाना चाहिए।
  4. जिस मकान या भवन का नंबर 12, 21, 30, 39 अथवा मकान के अंदर जाने का मुख्य गेट या दरवाजा उत्तर-पूर्व की दिशा में हो, तो इस तरह की स्थिति में मकान के नाम के लिए गु, सु, ई, ई, ज, अ नाम के अक्षरों का ही चुनाव करना अच्छा माना जाता है। मकान के नाम के लिए पत्थर चौकौर तरह का होना चाहिए तथा यह पीला, बैंगनी, हल्के हरे रंग का ही हों तो बहुत ही अच्छा होता है। इस तरह के मकान के पत्थर को मकान के बाहर बीच में ही लगवाना चाहिए।
  5. यदि मकान का नंबर 4, 13, 22, 31, 40, 103 हो अथवा मकान का मुख्य गेट या दरवाजा पूर्व की दिशा में हो तो इस तरह की स्थिति होने पर व्यक्ति को मकान का नाम क, दी, रा, अ, पू, हि के नाम पर ही रखना उचित होता है। मकान के पत्थर चौकोर आकार के होने चाहिए तथा इन पत्थरों का रंग भी नीले भूरे, क्रीम, हल्के पीले तथा केसरिया रंगों का ही होना चाहिए एवं मकान में नाम वाले पत्थर को मकान के बाहर दाईं तरफ की दिशा में ही लगवाना अच्छा माना जाता है।
  6. अगर किसी के मकान का नंबर 5, 14, 23, 32, 41, 104 होता है तथा उसके मकान का मुख्य गेट भी उत्तर दिशा की तरफ हो तो उस मकान के पहले अक्षर को च, हे, रो, टी, सी तथा से अक्षर में से चुन सकते हैं। मकान का नाम नारंगी पीले रगों में लिखा होना चाहिए। यह नाम पीतल के धातु की प्लेट पर ही लिखा जाए तो बहुत ही लाभदायक होता है।
  7. अगर किसी व्यक्ति की जमीन या फिर उसके मकान का नंबर 6, 15, 24, 33, 42, 105 नाम के अक्षर पर आता है तथा उस मकान का मुख्य गेट या दरवाजा पूर्व दिशा की तरफ अथवा पश्चिम दिशा की तरफ हो, तो इस तरह की स्थिति में व्यक्ति को मकान का नाम आ, लू, बी, भा तथा आ जैसे नाम के पहले अक्षर पर ही रखना चाहिए। मकान का नाम लिखने वाला पत्थर सफेद, काले तथा गोल्डन रगों का ही होना चाहिए। मकान के नाम को लिखने के लिए सफेद रंग की धातु पर ही लिखना चाहिए। मकान के नाम की पट्टी दक्षिणी-पूर्व की दिशा में ही स्थापित करनी चाहिए।
  8. अगर किसी व्यक्ति के मकान का नंबर 7, 16, 25, 34, 43 और 106 के अंक पर हो तथा मकान के अंदर-बाहर जाने का रास्ता भी उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ हो, तो इस तरह की अवस्था के पैदा होने पर व्यक्ति को अपने मकान का नाम ध, शि, ज, फ, प के अक्षर के नाम पर ही रखना शुभ होता है तथा मकान के नाम लिखने वाला पत्थर नीला, सफेद तथा क्रीम रंगों में ही होना चाहिए। इस पत्थर को गदा के आकार में तथा ऊंची जगह पर ही लगवाना चाहिए।
  9. अगर किसी व्यक्ति की जमीन या मकान का नंबर 8, 17, 26, 35, 44, 107 होता हो तथा उस मकान का मुख्य दरवाजा या गेट पश्चिम दिशा की तरफ हो तो उस व्यक्ति को अपने मकान का नाम से, था, सौ, र, दे तथा छ अक्षर के नाम से ही रखना चाहिए। मकान का नाम चाकलेट के रंग, राख की तरह के रंग अथवा नीले रंगों में ही लिखवाना चाहिए। नाम लिखने वाले पात्र पर नाम पंच-धातुओं से ही लिखवाना अच्छा होता है।

वास्तुशास्त्र के नियमों के आधार पर प्रमुख जगह एवं प्रमुख दिशा पर रहने के प्रमुख नतीजे हो सकते हैं। परिवार में अच्छे संबंधों को बनाने के लिए वास्तुपरक सिद्धान्तों का पालन करना बहुत ही जरूरी होता है। किसी भी व्यक्ति का मकान श्मशान घाट के पास या उसके सामने और मंदिर भी मकान के सामने की तरफ होना अच्छा नहीं माना जाता है। मकान के स्वामी की मां का कमरा भी मकान में दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही बनवाना चाहिए। मकान के मालिक की मां को अपने कमरे में आराम करना चाहिए तथा हो सके तो ज्यादा से ज्यादा समय भी अपने कमरे में ही बिताना चाहिए। माता का कमरा अपनी पुत्रवधु के कमरे के द्वार (गेट) को पार नहीं करना चाहिए। मां का पलंग पुत्रवधु के पलंग की दक्षिण दिशा, पश्चिम दिशा, दक्षिण दिशा या दक्षिण पूर्व दिशा में हो तो बहुत ही अच्छा माना जाता है। मां तथा पुत्रवधु दोनों के पंलग कमरे में इस तरह से लगे होने चाहिए कि सोने की अवस्था में दोनों के ही सिर दक्षिण दिशा या पश्चिम दिशा की तरफ ही होने चाहिए। पुत्रवधु के कमरे को कभी-भी उत्तर-पश्चिम दिशा में नहीं होना चाहिए। पुत्रवधु के कमरे के उत्तर-पूर्व की दिशा की तरफ में एक आर-पार दिखाई देने वाले बर्तन में गगांजल हमेशा ही भरा होना चाहिए। पुत्रवधु को अपने मेकअप के सामान को कमरे के उत्तर दिशा या फिर पूर्वी दिशा की दीवार की तरफ में ही रखना चाहिए और हमेशा मेकअप या श्रृंगार करते समय अपने मुख को पूर्व दिशा अथवा उत्तर दिशा की तरफ ही रखकर मेकअप आदि करना चाहिए। मकान में पूर्वी दिशा की तरफ उत्तर दिशा में स्थित खिड़कियां पर्दों आदि से ढके होने चाहिए। इन खिड़कियों आदि को सुबह के समय में सूरज के उगने के बाद खोल देना शुभ माना जाता है। दक्षिणी दिशा तथा पश्चिमी दिशा की तरफ मोटे कपड़े के पर्दों को लगाना चाहिए। अतिथि ग्रह वाले कमरे में हमेशा झालर वाले पर्दों का प्रयोग करना चाहिए। मकान के स्वामी को अपने सोने वाले कमरे में गोल आकार के पर्दों को पलंग के ऊपर लगवाना अच्छा होता है। पूजा करने वाले कमरे में सदा जाली वाले पर्दों को लगवाना चाहिए। किस कमरे में किस तरह के रंग का पर्दा होना चाहिए। इसके बारे में जिस दिशा में कमरा होता है, कमरे की उसी अवस्था के अनुसार निम्नलिखित रंग को पुतवाना चाहिए जैसे-

  1. अगर किसी व्यक्ति का कमरा दक्षिण दिशा की तरफ हो, तो उसको अपने कमरें की दीवारों को गुलाबी, मूंगिया तथा लाल रंग से रंगवाना चाहिए।
  2. अगर कमरा पूर्व दिशा की तरफ हो, तो व्यक्ति को अपने कमरे की दीवारों को सफेद रंग तथा गोल्डन रंग में ही पुतवाना चाहिए।
  3. वे व्यक्ति जिनका कमरा पश्चिम दिशा की तरफ है तो उनका अपने कमरे में नीले, हल्के आसमानी रंग को करवाना अच्छा समझा जाता है।
  4. जिस व्यक्ति का कमरा उत्तर दिशा की तरफ होता है, उसे अपने कमरे की दीवारों को हल्के हरे तथा हल्के नीले रंग से रंगवाना चाहिए।
  5. बेडरूम की दीवारों पर व्यक्ति को हल्का गुलाबी, सलेटी, गहरा नीला तथा चाकलेटी रंग करवाना चाहिए।
  6. पूजा करने वाले कमरे में सफेद अथवा नीला रंग करवाना अच्छा माना जाता है।
  7. अपने मकान में मेहमानों के बैठाने वाले कमरों की दीवारों का रंग पीला तथा नीला करवाना अच्छा समझा जाता है।
  8. मकान में रसोईघर की दीवारों को पीले, नारंगी तथा चाकलेटी रंग में ही रंगवाना चाहिए।
  9. खाना खाने वाले कमरे में गुलाबी, सलेटी, गहरा नीला तथा चाकलेटी रंग को करवाना अच्छा माना जाता है।

राशि के अनुसार ही अच्छे रंग का चुनाव-

  • जिस व्यक्ति की राशि मेष होती है उसके लिए लाल रंग को चुनना अच्छा माना जाता है।
  • ऐसे व्यक्ति जिनकी राशि सिंह होती है, उनको चमकीले रंग का चुनाव करना चाहिए।
  • कर्क राशि वाले व्यक्ति के लिए हमेशा ही सफेद रंग का चुनाव करना अच्छा होता है।
  • जिन व्यक्तियों की राशि वृष हो, उनके लिए सफेद रंग शुभ माना जाता है।
  • ऐसे व्यक्ति जिनकी राशि वृश्चिक हो, तो उनको अपने लिए गुलाबी रंग का चुनाव करना चाहिए।
  • कन्या राशि वाले व्यक्तियों के लिए हरा रंग शुभ माना जाता है।
  • जिन व्यक्तियों की राशि कुम्भ हो, उनके लिए नीला रंग तथा गुलाबी सलेटी रंग अच्छा माना जाता है।
  • ऐसे व्यक्ति जिनकी राशि धनु हो, उनके लिए पीला रंग अच्छा माना जाता है।
  • तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए सफेद तथा सलेटी रंग का चुनाव करना अच्छा होता है।
  • जिन व्यक्तियों की राशि मकर हो उनको लाल रंग तथा सलेटी रंग का चुनाव करना चाहिए।

आज के युग में इस महंगाई को देखते हुए मकान को बनवाने के लिए व्यक्ति अपने मकान में फर्श के लिए बहुत ही कीमती पत्थरों को इस्तेमाल में लाता है, जिसका कि चलन काफी हो गया है। परंतु यह बात बिल्कुल ही सच है कि मकान के फर्श में लगवाने के लिए काले रंग के पत्थरों को इस्तेमाल में नहीं लाना चाहिए। कहते हैं कि काले रंग का इस्तेमाल करने से क्रूर ग्रह राहु की शक्ति में बढोतरी होती है। इसलिए व्यक्ति हमेशा ही परेशानियों को उठाता रहता है। इस तरह से अगर मकान की कुंडली में गुरु केतु के स्थान में हो अथवा मित्र राशि में हो तो संगमरमर का इस्तेमाल कभी-भी नहीं करना चाहिए। यदि जमीन के मालिक का शुक्र ग्रह दोष वाला हो, तो भी उस अवस्था में सफेद रंग के मार्बल का इस्तेमाल कदापि नहीं करना चाहिए। व्यक्ति की आकृति-प्रकृत्ति आदि अपने जन्म नक्षत्र पर भी निर्भर करते हैं। इसलिए जिस नक्षत्र में व्यक्ति का जन्म हुआ हो उसी के आधार पर व्यक्ति को रंग के बारे में चुनाव करना चाहिए जैसे-

राशि तथा नक्षत्र देखने के लिए विधि-

यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुण्डली नहीं है तो वह व्यक्ति अपने नक्षत्र को किस तरह से मालूम करेगा, इसके लिए बताया जा रहा है जैसे-

अगर किसी व्यक्ति को अपनी राशि तथा नक्षत्र को देखने की उत्सुकता बढ़ रही हो, तो उस व्यक्ति तो इस तरह से करना चाहिए कि उसको अपने नाम का प्रथम अक्षर लिखी गई सारिणी में देखें, उसी तरह से जहां तक यह अक्षर मिले उसके ऊपर जो राशि लिखी हुई दिखाई दे रही है वही राशि ही उस व्यक्ति की होगी और उस व्यक्ति का नक्षत्र उसके बाई तरफ लिखा हुआ दिखाई दे रहा है वही उस व्यक्ति का नक्षत्र होता है। जैसे कि किसी भी व्यक्ति का नाम श्री रामचंद्र है जिसका प्रथम अक्षर र दिखाई गई सारिणी में नजर आ रहा है, तो इससे यह मालूम होता है कि श्री रामचंद्र की राशि तुला और उसका नक्षत्र चित्रा होता है।

Jyotish Tantra Ke Upay:  इसी तरह से मकान के मुख्य गेट या दरवाजे की दिशा के आधार पर ही मकान के चारों तरफ किए जाने वाले रंग को निम्नलिखित तरीके से करवाना चाहिए जैसे-

  • जिन व्यक्ति के मकान का मुख्य गेट दक्षिणी-पश्चिमी दिशा की तरफ हो उनको अपने मकान के चारों तरफ हरा रंग करवाना चाहिए।
  • ऐसे व्यक्ति जिनके मकान का मुख्य दरवाजा या गेट उत्तर-पश्चिमी दिशा की तरफ बना हुआ हो, उनको अपने मकान के चारों तरफ सफेद तथा हल्का पीला रंग करवाना अच्छा होता है।
  • जिन व्यक्तियों के मकान का मुख्य गेट दक्षिण-पूर्व की तरफ होता हों उन व्यक्तियों को अपने मकान के चारों तरफ सफेद रंग करवाना चाहिए।
  • जिनके मकान का मुख्य गेट पश्चिम दिशा की तरफ होता है, उनको मकान के चारो तरफ नीले रंग को करवाना अच्छा समझा जाता है।
  • पूर्व दिशा की तरफ के मुख्य गेट या दरवाजे वाले को मकान के चारों तरफ चमकता हुआ सफेद रंग को करवाना चाहिए।
  • जिन व्यक्तियों के मकान के अंदर तथा बाहर की तरफ जाने वाला मुख्य गेट या दरवाजा उत्तर दिशा की तरफ हो, उनको मकान के चारों तरफ हरे रंग करवाना चाहिए।
  • दक्षिण दिशा की तरफ मुख्य गेट वाले व्यक्तियों को मकान के चारों तरफ गुलाबी, मूंगिया तथा लाल रंग को करवा सकते हैं।
  • जिन व्यक्तियों का मुख्य गेट उत्तर दिशा की तरफ होता है उन व्यक्तियों को अपने मकान के चारों तरफ सुनहरे रंग को करवाना बहुत ही अच्छा होता है।

किसी भी तांत्रिक अथवा ज्योतिषी या फिर किसी वास्तु के जानकार के कहने पर कभी-भी किसी मकान अथवा भवन को नहीं तोड़ना चाहिए। इस तरह से लाखों रुपए तो खराब होते ही है तथा इसके साथ ही साथ व्यक्ति का समय भी बहुत ही ज्यादा खराब हो जाता है। परंतु अगर व्यक्ति चाहे तो सिर्फ थोड़े ही समय में यंत्र, मंत्र तथा तंत्र के उपाय करके अपने-आप मकान के वास्तु दोष (Jyotish Tantra Ke Upay) को दूर भगा सकता है। जो व्यक्ति आज के युग में भी तंत्र विज्ञान से लाभ नहीं उठा पाता, ऐसे व्यक्तियों से तो किस्मत भी पीछा नहीं छोड़ती है। अगर आप चाहे तो किसी वास्तु के विद्वान से मिल करके वास्तु दोष के उपाय के लिए उपयुक्त यंत्र, मंत्र तथा तंत्र की क्रियाओं से वास्तुदोष को दूर कर सकते हैं।

घर के लिए वास्तु टिप्स (Top 10 Vastu Tips)

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  8. जाने घर का सम्पूर्ण वास्तु शास्त्र, वास्तु शास्त्र ज्ञान और टिप्स
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