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कैसा हो मकान का फर्नीचर - वास्तु ज्ञान

By placing furniture in the house according to Vastu, the beauty of the house increases multiplied. With this, Vastu defects also go away. Today, it is considered very important to have furniture in every house according to Vastu Shastra. The use of wood for making furniture is very much in fashion nowadays. Let us know why the furniture in the house should be according to Vastu –

कैसा हो मकान का फर्नीचर – वास्तु ज्ञान

मकान में फर्नीचर रखने से मकान की सुंदरता गई गुणा बढ़ जाती है। इसलिए आज के युग में हर मकान का फर्नीचर रखवाना बहुत ही जरुरी समझा जाता है। आजकल लकड़ी का इस्तेमाल करने का बहुत ही ज्यादा चलन हो गया है। मकान के बारे में निरीक्षण या जांच करने पर आप यह बहुत ही आसानी से अंदाजा लगा लेंगें कि मकान का कोई भी किनारा अथवा जगह ऐसी नहीं होगी, जहां पर कि लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया गया हो। मकान के कमरों, रसोईघर से लेकर सोने वाले कमरे या आराम करने वाले कमरों तक, आंगन व छत की रूपरेखा को संवारने तक के लिए भी लकड़ी आदि का इस्तेमाल किया जाता है। फर्नीचर को बनाते समय इमारती लकड़ी जैसे कि- सागवान की लकड़ी, शीशम, कैल तथा आम की लकड़ी आदि को इस्तेमाल में लाया जाता है।

फर्नीचर का अर्थ

फर्नीचर अंग्रेजी भाषा का शब्द है जिसका मतलब उठने-बैठने, सामान को रखने, सोने, आराम करने, पढ़ने-लिखने आदि के लिए भी इस्तेमाल में लाने वाली अलग-अलग तरह की वस्तुओं के लिए किया जाता है जैसे कि कुर्सी, मेज, सोफा, पंलग, मूढ़ा, चारपाई, अलमारी, तख्त, तिपाई, डेस्क, रैक आदि। फर्नीचर को व्यक्ति के जीवन का एक बहुत ही अटूट अंग माना गया है तथा इस फर्नीचर के बिना व्यक्ति के जीवन के बारे में कल्पना करना भी बहुत ही मुश्किल है। वास्तुशास्त्रों के अनुसार मकान की सजावट के लिए फर्नीचर की बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका मानी गई है।

फर्नीचर शब्द के बारे में सोचते ही हमारे दिल में कई तरह के प्रश्न पैदा हो जाते हैं, जैसे कि- नया फर्नीचर किस तरह का खरीदना चाहिए, पुराने तरह के फर्नीचर का इस्तेमाल किस तरह से करना चाहिए, अच्छी तरह के फर्नीचर में किस तरह के गुण होते हैं, बहुत ज्यादा समय तक इस्तेमाल में लाना वाला फर्नीचर किस तरह का होता है तथा फर्नीचर का चुनाव किस तरह से करें व उसको किस स्थान पर रखना उचित होता है।

अच्छी तरह के मकान की रूपरेखा की व्यवस्था रखने के लिए फर्नीचर का अन्य सजावट के साधनों, परदों, कालीन, रंगों आदि का किस तरह से तालमेल बैठाना चाहिए। बेंत, गद्देदार लकड़ी, प्लास्टिक अथवा मजबूत या स्टील के फर्नीचर में से कौन सा फर्नीचर खरीदना चाहिए, अगर वास्तु के सिद्धान्तों के अनुसार रंगों तथा जगह आदि का चुनाव ठीक तरीके से करें तो अवश्य ही इससे लाभ प्राप्त हो सकता है।

मकान का फर्नीचर बनवाने में लकड़ी का इस्तेमाल क्यों करना चाहिये?

कमजोर लकड़ी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस तरह से करने पर हानि की संभावना बनी रहती है। इसलिए पुरानी और कमजोर लकड़ी का इस्तेमाल कभी-भी नहीं करना चाहिए। इसी तरह से दरवाजे के लिए भी दूध देने वाले पेड़ों की लकड़ी का इस्तेमाल करना नुकसानदायक माना जाता है। श्मशान भूमि के पेड़ों की लकड़ियों को भी इस्तेमाल में नहीं लाना चाहिए, वर्ना मकान में कभी-भी सुख की प्राप्ति नहीं होगी।

किसी भी प्रकार का फर्नीचर बनाने के लिए अच्छी तथा शुभ पेड़ों की लकड़ी का ही इस्तेमाल करना अच्छा होता है। फर्नीचर को बनवाने के लिए साल की लकड़ी, अशोक, चंदन, शीशम, महुआ आदि की लकड़ी का अगर इस्तेमाल किया जाए तो यह सबसे अच्छा होता है। अगर किसी वजह से इस तरह की लकड़ी का इंतजाम न हो सके, तो नीम के पेड़ की लकड़ी, अर्जुन, बबूल, खैर तथा नागकेशर आदि के पेड़ की लकड़ी को भी इस्तेमाल के लिए लाया जा सकता है।

बहेड़ा की लकड़ी, पीपल, वट का पेड़, गूलर की लकड़ी, करंज व कैथ आदि की लकड़ी को फर्नीचर बनाने के लिए इस्तेमाल में नहीं लाना चाहिए।

अशुभ तरह की लकड़ियों का अगर इस्तेमाल किया जाता है तो इससे प्रेतबाधा, बुरे स्वप्न, बेकार की चिंताएं हमेशा ही परेशान करती रहती है तथा व्यक्ति की कीर्ति व सुख में भी कमी आती है।

आधुनिक युग में फर्नीचर पर सुंदरता की निगाह से कई तरह के चित्रण उत्कीर्ण किए जाने लगे हैं। पंलग के सिरहाने की तरफ चित्रण अंकित कराते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आकृतियां अच्छी तथा शुभ होनी चाहिए। प्रदर्शन के रूप में सांप के आकार की तरह, सिंह के मुंह की तरह, बाज अथवा गिद्ध की आकृतियां को नहीं बनवाना चाहिए। अशुभ तरह की आकृतियां मन की वृत्ति को खराब करने के साथ ही साथ पारिवारिक जीवन को भी बर्बाद कर देती है।

लकड़ी का फर्नीचर

फर्नीचर बनवाते समय सागवान की लकड़ी, शीशम की लकड़ी, आबनूस, चीड़, कैल, देवदार तथा आम आदि के पेड़ों की लकड़ी को इस्तेमाल में लाया जा सकता है। फर्नीचर को बनाने के शीशम की लकड़ी के लिए इस्तेमाल करना काफी समय तक अच्छा जाना जाता है। शीशम की लकड़ी मजबूत, टिकाऊ व सुंदर भी मानी जाती है। इसी तरह से गहरे रंग की इस लकड़ी का रेशा बहुत ही सुंदर होता है और पालिश वाले फर्नीचर में यह रेशा बहुत ही खूबसूरत व मन को लुभाने वाला जाना जाता है, लेकिन शीशम की लकड़ी बहुत ही मजबूत तथा सख्त मानी जाती है, जिसकी वजह से शीशम की लकड़ी को काटना, इसको छीलना एवं इसकी नक्काशी करना ज्यादा आसान नहीं होता है। इसलिए आज के युग में फर्नीचर को बनाने वाले कारीगरों ने इसकी बजाय सागवान यानी कि टीक की लकड़ी का इस्तेमाल बहुत ही ज्यादा मात्रा में करने लगे हैं। सागवान की लकड़ी में भी शीशम की लकड़ी के सभी तरह के गुण तथा खूबियां पाई जाती है, लेकिन यह शीशम की लकड़ी के विपरीत थोड़ी सी कोमल भी होती है। आज के युग में फर्नीचर के लिए सागवान की लकड़ी को बहुत ही ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

शीशम की लकड़ी तथा सागवान की लकड़ी के अलावा आबनूस, चीड़, आम, कैल तथा देवदार के पेड़ों की लकड़ियों को भी फर्नीचर के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। आम की लकड़ी बहुत ही ज्यादा मंहगी नहीं होती है, इसलिए आम की लकड़ी को सस्ते और कामचलाऊ फर्नीचर के लिए जैसे कि- बैंच, तख्त, डेस्क, पेटियों आदि के इस्तेमाल के लिए कर सकते हैं। इसी तरह से आबनूस व चीड़ की लकड़ी अधिक जगह पर न मिल पाने की वजह से बहुत ही कम प्रचलित है। देवदार तथा कैल की लकड़ी बहुत ही हल्की मानी जाती है व मुलायम लकड़ी भी मानी जाती है। देवदार व कैल की लकड़ी को काटना, छीलना व चीरना बहुत ही आसान होता है। इन लकड़ियों का बना फर्नीचर बहुत ही ज्यादा हल्का होता है। इस तरह की लकड़ियों का फर्नीचर वैसे तो बहुत ही सस्ता होता है, लेकिन सागवान की लकड़ी से मजबूत नहीं होता है। छोटे बच्चों के लिए देवदार की लकड़ी से बना हुआ हल्का फर्नीचर ही अच्छा तथा बेहतरीन जाना जाता है।

आज के समय में भी फर्नीचर के कार्य के लिए लकड़ी के प्लाईवुड़, बोर्ड व कम्प्रैस्ड भूसा बोर्ड आदि का इस्तेमाल किया जाता है। अलमारी, कप बोर्ड, रैक आदि को बनाने के लिए ये अच्छे माने जाते हैं क्योंकि बड़े साईज की अपेक्षित मोटाई प्लाईवुड की शीट व बोर्ड बहुत ही आराम से मिल जाते हैं इसलिए इनको छिलने, एक समान या प्लेन करने के लिए, टुकड़ों को जोड़ने के लिए ज्यादा परिश्रम भी नहीं करना पड़ता है।

बेंत का फर्नीचर

आजकल पूरे भारत वर्ष में बेंत के फर्नीचर का इस्तेमाल भी बहुत ही ज्यादा किया जा रहा है। बेंत के डण्ड़ों को किसी भी तरह से मोड़-तरोड़ करके उस पर बेंत का एक तरह से जाल बुना जाता है। बेंत की बनी हुई कुर्सियां, मेज, झूले, आराम करने वाली कुर्सियां, सोफा व बच्चों आदि के लिए फर्नीचर बहुत ही ज्यादा मशहूर माने जाते हैं। बेंत के बने हुए फर्नीचर हल्के व काफी दिनों तक चलने वाले तथा टिकाऊ होने की वजह से काफी इस्तेमाल में लाए जाते हैं। हल्के रंगों के फर्नीचर तथा स्प्रिट पालिश वाले बेंत के फर्नीचर बहुत ज्यादा आकर्षक, लुभावने व सुंदर दिखाई देते हैं। बेंत से बने हुए फर्नीचर घर के आंगन, बैठक, बरामदे तथा बगीचों आदि में रखने के लिए बहुत ही अच्छे जाने जाते हैं।

 गद्देदार फर्नीचर

गद्देदार फर्नीचर (सोफा-सेट) की बनावट भी मुख्य रूप से मजबूत लकड़ी से ही बनी होती है। इस पर नारियल का भूसा, रूई तथा स्प्रिंग को लगाकर मुलायम बनाया जाता है। सोफा-सेट या गद्देदार फर्नीचर को बनाने के लिए कपड़ा, रेक्सीन, चमड़ा, लैदर फोम तथा प्लास्टिक आदि का इस्तेमाल इसके लिए किया जाता है, परंतु आजकल पोलीफोम अथवा स्पंज आदि को गद्देदार फर्नीचर के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आज के समय को देखते हुए पोलीफोम के बने हुए गद्दे बहुत ही आरामदायक व टिकाऊ तो माने जाते ही है तथा इसके साथ ही साथ इनमें कीड़े-मकोड़े तथा धूल-मिट्टी भी नहीं घुसते हैं।

 

स्टील का फर्नीचर

विशेषता बनाए रखता है। लोहे के पाइपों पर प्लास्टिक की बेंत, तारों अथवा निवाड़ की बुनाई किया हुआ फर्नीचर भी बहुत ही ज्यादा ताकतवर व काफी दिनों तक चलने वाला जाना जाता है। इसके साथ ही इसकी मुख्य परेशानी इसका बहुत अधिक भारीपन होने को माना जाता था। कुछ समय के बाद इसका भी हल ढूंढ लिया गया। स्टील के स्थान पर एल्युमिनियम का इस्तेमाल किया जाने लगा है, क्योंकि एल्युमिनियम का वजन बहुत ही कम होता है तथा इसके साथ ही इसमें जंग भी नही लगती है व पानी से खराब हो जाने का खतरा भी नहीं होता है। टिकाऊ, हल्का और रख-रखाव के नजरिये से बहुत ही सस्ता होने की वजह से एल्युमिनियम व प्लास्टिक का फर्नीचर भी आज के समय में बहुत ही ज्यादा मशहूर होता जा रहा है।

फोल्डिंग फर्नीचर के क्षेत्र में प्लास्टिक तथा एल्युमिनियम से बना हुआ फर्नीचर एक तरह से विशेष महत्व रखता है। आज के समय को देखते हुए आजकल के मकानों के बड़े-बड़े बरामदों या दालान, सहन और हाल आदि समाप्त होते जा रहे हैं और छोटे फ्लैट बहुत ही ज्यादा मशहूर होते जा रहे हैं। इसलिए एक अथवा दो कमरों में जहां स्थान की बहुत ही ज्यादा परेशानी मानी जाती है, इसके बारे में फोल्डिंग फर्नीचर विशेष तरीके से बहुत ही कामयाब साबित हुआ है। एल्युमिनियम की राड़ पर नायलान की निवाड़ (निवार) से बनी हुए कुर्सियां, पंलग आदि के मशहूर होने की वजह भी यहीं मानी जाती है। जिन व्यक्तियों को व्यापार या नौकरी के काम के लिए बार-बार अपने शहर को बदलना पड़ता है, उन व्यक्तियों के लिए तो फोल्डिंग फर्नीचर का होना बहुत ही अच्छा तथा उचित समझा जाता है।

 

प्लास्टिक के बने हुए फर्नीचर

इस मंहगाई के जमाने में समय के बदलने के साथ-साथ फर्नीचर के भी संसार में कई तरह के नए-नए आविष्कार किये जाने लगें और प्लास्टिक से बने हुए फर्नीचर का भी इस संसार में जन्म हुआ। आजकल के इस युग में प्लास्टिक की बनी हुई कुर्सियां, स्टूल, अलमारी, टेबल आदि बहुत ही ज्यादा खूबसूरत तथा बहुत ही ज्यादा सुंदर-सुंदर रंगों में व डिजाइनों में मिल जाते हैं। इन प्लास्टिक के फर्नीचरों में न तो किसी भी तरह के रंग-पालिश को करने का खर्चा और न दीमक आदि के लगने का किसी भी तरह का कोई डर होता है तथा ये फर्नीचर वजन में भी बहुत ही हल्के जाने जाते हैं। इनको उत्तर दिशा अथवा पूर्व दिशा में भी रख दें तो किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।

फर्नीचर को खरीदने पहले क्या सावधानी बरतें?

किसी भी तरह के फर्नीचर को खरीदने से पहले इस बात के बारे में अवश्य ही जान लेना चाहिए कि आपको कितने फर्नीचर की आवश्यकता है और क्या असलियत में आपके कमरे में उस फर्नीचर को ठीक तरीके से लगाने के लिए सही जगह भी है या नहीं है। इस तरह की परेशानियों से बचने के लिए यह भी जरूरी हो जाता है कि आपको पहले से ही फर्नीचर को इस्तेमाल करने के लिए और आवश्यकता के अनुसार ही किसी तरह की योजना को तैयार कर लेना चाहिए। इस तरह से करने के लिए एक प्लेन कागज पर छोटे साइज के कमरे का नक्शा तैयार कर लेना चाहिए। इसके बाद उसी साइज के अनुसार ही अलग-अलग तरह के फर्नीचर जैसे कि- सोफा-सेट, मेज, बेड़ या पंलग, कुर्सी, अलमारी, रैक, टेलिविजन आदि के भी कागजों पर नक्शों आदि को बना करके छोटे-छोटे टुकड़े काट लेना चाहिए। इस तरह से हो जाने के बाद कमरे के नक्शे पर फर्नीचर के खाकों के टुकड़ों को आगे-पीछे, दाएं-बाएं करके अपने कमरे का वास्तुशास्त्र के अनुसार ही फर्नीचर को लगवाना अच्छा होता है।

इस तरह से सब कुछ हो जाने पर बहुत ही आराम से आप कमरे में अलग-अलग तरह के फर्नीचर का एक समूह बना सकेंगे तथा इससे आपको यह भी मालूम हो जाएगा कि कमरे में कितना फर्नीचर आरामपूर्वक तरीके से लगाया जा सकता है।

फर्नीचर का चुनाव

फर्नीचर का चुनाव हमेशा ही कमरे के साइज व उसकी आकृति (आकार) के अनुसार ही करना चाहिए। एक बड़े कमरे के लिए जो फर्नीचर अच्छा माना जाता है, वहीं पर एक छोटे कमरे के लिए इस तरह का फर्नीचर कभी-भी ठीक नहीं माना जाता है। इसलिए हमेशा ही फर्नीचर को बनवाते समय अथवा किसी भी तरह के फर्नीचर को खरीदते समय उसका आकार-प्रकार व्यक्ति के मस्तिष्क में होना चाहिए। कमरे के बडे होने पर आप अवश्य ही एक आम साइज से भी बड़ा डबल बेड या पलंग को बडे़ कमरे में डाल सकते हैं तथा उसके साथ ही बड़ी-बड़ी साइड वाली मेजों या टेबल को भी लगा सकते हैं, लेकिन उसी साइज का डबल बेड एक छोटे कमरे में डालना बहुत ही मुश्किल या गलत काम होता है।

नए फर्नीचर को बनवाते समय तथा उसको खरीदते समय उस फर्नीचर का घर पर पड़े हुए पुराने फर्नीचर से तालमेल बैठाना भी बहुत ही आवश्यक हो जाता है। अधिकतर पुराना फर्नीचर तो फूल-पत्तीदार नक्काशी वाला अथवा ओरियंटल किस्म का होता है और नई तरह का फर्नीचर सीधी-सरल रेखाओं और प्लेन जमीन का अथवा आधुनिक स्कैण्डीनेवियन किस्म का होता है। इसलिए एक ही कमरे में नए या पुराने फर्नीचर को आपस में मिलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। बहुत अधिक बड़ी आकृति के कमरे में अलग-अलग तरह के फर्नीचर के एक समूह को बनाकर यानी कि एक कोने में आधुनिक फर्नीचर व दूसरे कमरे में पुराने ढंग का फर्नीचर को इक्ट्ठा कर सकते हैं। इन सबके अतिरिक्त अलग-अलग कमरों में अलग-अलग तरह के फर्नीचर को लगाकर नए अथवा पुराने माहौल को बनाया जा सकता है।

आधुनिक मकान का फर्नीचर, असलियत में देखा जाए तो पुराने नक्काशी करे हुए फर्नीचर की बजाय अधिक आरामदायक, सुविधाजनक, हल्का तथा बहुत ही सस्ता भी जाना जाता है। फिर भी इसके बावजूद इसका साइज भी इसकी तुलना में बहुत ही छोटा माना जाता है तथा इस फर्नीचर के रख-रखाव में बहुत ही ज्यादा आसानी होती है। नक्काशीदार फर्नीचर में अधिकतर कटाव तथा धूल-मिट्टी की पर्त भी जम जाती है, जिसको साफ करना ज्यादा आसान नहीं समझा जाता। इसलिए आधुनिक फर्नीचर ही आजकल के समय में छोटे परिवारों, छोटे घरों व सीमित आय के व्यक्तियों के लिए हर तरह से अच्छा होता है।

जब भी नए फर्नीचर को खरीदें तो हमेशा ही अच्छी क्वालिटी का लेना चाहिए। फर्नीचर को खरीदते समय उसकी ऊपरी चमक-दमक की चकाचौंध में फंसने की बजाय उसकी मजबूती तथा उसकी उपयोगिता पर ही ध्यान देना चाहिए। अपने विश्वास करने वाले बढ़ई से अपनी ही देख-रेख में अपनी जरुरत के हिसाब से फर्नीचर को बनवाया जाए तो वह सबसे अच्छा फर्नीचर भी बन जाएगा तथा अपनी मनपंसद का भी फर्नीचर तैयार हो जाएगा। फर्नीचर को बनवाने के लिए जरूरत की सामग्री जैसे कि- लकड़ी, सनमाइका, ग्लू, रंग, कब्जे, हैण्डल आदि की अच्छी (उच्च) क्वालिटी को अपने विश्वनीय दुकानदार से ही लेना चाहिए। फर्नीचर को बनाने वाले की चतुरता तथा उसकी ईमानदारी का भी बहुत ही ज्यादा महत्व माना जाता है जैसे चतुरता या कुशलता यानी कि सही तरह के चूल, जोड़, फिटिंग आदि और उसकी ईमानदारी, यदि अपहोल्सट्री का फर्नीचर है और फ्रेम का काम टीकवुड़ के फर्नीचर का बताया है तो टीकवुड़ ही अच्छी होती है। असलियत में ऊपर से देखने पर इसके बारे में नहीं पता चलता है कि फर्नीचर में फ्रेम का काम किस तरह की लकड़ी से किया गया है और फ्रैम का काम यानी कि उसका ढांचा तैयार करते समय सही तरह से चूल आदि को बना कर पेंचों से अच्छी तरह से कसा गया है अथवा फिर लकड़ी के ऊपर लकड़ी को रखकर के उसको कीलों से ठोंक दिया गया है या नहीं।

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